यह कहानी आर्यन नाम के एक होशियार और आविष्कारक लड़के की है। वह अपने शहर के रोज़ाना के भारी ट्रैफ़िक जाम से बहुत परेशान था, जिसके कारण उसे स्कूल पहुँचने में अक्सर देर हो जाती थी। इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए, उसने अपनी साधारण साइकिल को एक अनोखी 'उड़ने वाली साइकिल' में बदलने का एक बड़ा और साहसी फैसला किया।
कहानी
आर्यन एक ऐसा लड़का था जिसका दिमाग हमेशा नए विचारों से भरा रहता था। उसके कमरे में खिलौनों से ज़्यादा औज़ार और कबाड़ का सामान बिखरा रहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी समस्या थी उसके शहर का ट्रैफ़िक। हर सुबह स्कूल बस का हॉर्न और सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें उसे चिड़चिड़ा बना देती थीं। 'उफ़! यह लाल बत्ती कभी हरी होगी भी या नहीं?' वह अक्सर बस की खिड़की से बाहर देखते हुए सोचता।
एक दिन, जब वह जाम में फँसा हुआ था, उसने देखा कि एक चिड़िया बड़ी आसानी से कारों और बसों के ऊपर से उड़ती हुई जा रही है। उसी पल आर्यन के दिमाग की बत्ती जली। उसने सोचा, 'अगर मेरी साइकिल में पंख होते, तो मुझे इस धुएँ और शोर में नहीं फँसना पड़ता।'
उस सप्ताहांत, आर्यन ने खुद को अपने गैरेज में बंद कर लिया। उसने अपनी पुरानी साइकिल निकाली और अपने 'मिशन उड़ान' पर काम शुरू कर दिया। उसने पुराने सीलिंग फ़ैन की मोटर, मज़बूत कार्डबोर्ड के बड़े टुकड़े, और पतली प्लास्टिक की शीटें इकट्ठी कीं। उसने साइकिल के दोनों ओर बड़े-बड़े पंख लगाए, जो देखने में किसी ग्लाइडर जैसे लग रहे थे। पैडल के साथ उसने एक ऐसा सिस्टम जोड़ा कि जब वह तेज़ी से पैडल मारे, तो पंखों के नीचे लगे छोटे प्रोपेलर घूमने लगें और हवा का दबाव बनाएँ।
दो दिन की कड़ी मेहनत के बाद, उसकी 'आकाशा-1' साइकिल तैयार थी।
सोमवार की सुबह, आर्यन जानबूझकर थोड़ा देर से निकला। सड़क पर हमेशा की तरह गाड़ियों का मेला लगा था। आर्यन अपनी अजीब दिखने वाली साइकिल को लेकर पास के एक पार्क की ढलान पर गया। उसने एक गहरी साँस ली और पैडल मारना शुरू किया।
'चलो आकाशा, आज हमें आसमान छूना है!' उसने धीरे से कहा।
जैसे-जैसे साइकिल की रफ़्तार बढ़ी, पंखों में लगे प्रोपेलर 'घर्र-घर्र' की आवाज़ के साथ घूमने लगे। ढलान के अंत तक पहुँचते-पहुँचते, आर्यन ने महसूस किया कि साइकिल के पहिए ज़मीन छोड़ रहे हैं। और देखते ही देखते-वह हवा में था!
यह अहसास अद्भुत था। ठंडी हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी। नीचे सड़क पर रेंगती गाड़ियाँ उसे खिलौना कारों जैसी लग रही थीं। उसने देखा कि उसकी स्कूल बस अभी भी ट्रैफ़िक सिग्नल पर फँसी हुई थी। आर्यन ने ऊपर से हाथ हिलाया, हालाँकि किसी ने उसे देखा नहीं। वह खुशी से चिल्लाया, 'अब कोई ट्रैफ़िक मुझे लेट नहीं कर सकता!'
वह इमारतों की छतों के ऊपर से उड़ रहा था। बालकनी में खड़े लोग उसे हैरानी से देख रहे थे। आर्यन खुद को किसी सुपरहीरो से कम नहीं समझ रहा था। लेकिन उत्साह में वह यह भूल गया कि वह एक अनुभवी पायलट नहीं है।
उसने साइकिल को और ऊपर ले जाने की कोशिश की। तभी हवा का एक तेज़ झोंका आया। उसके कार्डबोर्ड के पंख बुरी तरह डगमगा गए। साइकिल का संतुलन बिगड़ने लगा। सामने बिजली के तारों का एक जाल था। आर्यन घबरा गया। 'अरे नहीं! मुझे नीचे जाना होगा,' उसने सोचा।
उसने पैडल मारना धीमा कर दिया और हैंडल को नीचे की तरफ मोड़ा। लैंडिंग आसान नहीं थी। वह स्कूल के खेल के मैदान की तरफ बढ़ा। साइकिल तेज़ी से नीचे आ रही थी। 'धड़ाम!' वह घास पर गिरा। गनीमत रही कि उसे ज़्यादा चोट नहीं आई, बस साइकिल का एक पंख मुड़ गया था।
स्कूल के गेट पर खड़े वॉचमैन और कुछ बच्चे दौड़कर उसके पास आए। वे हैरान थे कि आर्यन आसमान से कैसे टपका। आर्यन खड़ा हुआ और धूल झाड़ी। वह समय पर स्कूल पहुँच गया था, लेकिन उसका दिल अभी भी तेज़ी से धड़क रहा था।
उस दिन आर्यन ने सीखा कि हवा में उड़ना ट्रैफ़िक से बचने का मज़ेदार तरीका तो है, लेकिन यह बहुत ख़तरनाक भी हो सकता है। उसने तय किया कि वह अपनी 'आकाशा-1' के डिज़ाइन को और बेहतर और सुरक्षित बनाएगा, और इसका इस्तेमाल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही करेगा, न कि रोज़ाना के शॉर्टकट के लिए।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि नवाचार और नए विचार हमारी समस्याओं को हल कर सकते हैं और जीवन को आसान बना सकते हैं। लेकिन, किसी भी नई तकनीक या शॉर्टकट का इस्तेमाल हमेशा समझदारी और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। बिना पूरी तैयारी के बड़ा जोखिम उठाना मुसीबत में डाल सकता है।













