16 “एडीजेस्तर” (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ है।
उदाहरण के लिए एक अधिकारी जो पहले फैमिली कोर्ट, रायबरेली में प्रधान न्यायाधीश थे, अब उन्हें लखनऊ (उत्तर) की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में नामित किया गया है।
एक अन्य अधिकारी, जो पहले उन्नाव में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी थे, उन्हें अब मीरजापुर के भूमि अधिग्रहण/पुनर्वास प्राधिकरण का प्रभारी बनाया गया है। कई अन्य न्यायाधीश व विशेष न्यायालयों के जजों की तैनातीजिम्मेदारियाँ बदल दी गई हैं अलगअलग जिलों और अदालतों में।
यह आदेश उच्च न्यायालय के महानिबंधक द्वारा जारी किया गया है। इस तरह के स्थानांतरण आम प्रथा है ताकि न्यायिक अधिकारियों को विभिन्न जिलों में काम करने का अनुभव मिले, और किसी एक स्थान पर कार्यभार व जिम्मेदारियों का संतुलन
बना रहे।
साथ ही इससे यह सुनिश्चित होता है कि न्यायिक प्रक्रियाएँ प्रभावी, निष्पक्ष व सुचारू रूप से चलें मामलेभार व न्यायिक संसाधन बेहतर तरीके से बांटे जाएँ।
विभिन्न प्रकार की अदालतों फैमिली कोर्ट, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, भूमि अधिग्रहण अथवा अन्य ट्रिब्यूनल में न्यायाधीशों का अनुभव व कौशल देख कर उनकी तैनाती की जाती है।
यदि आप या आपका कोई परिचित किसी चल रहे मुकदमे में है, तो देखना होगा कि नया न्यायाधीश या अदालत बदल गयी है या नहीं इससे मुकदमे की सुनवाई, तारीखें और प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।











