प्रदेश सरकार राज्य कर्मचारियों की तरह अब शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा का लाभ देने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को लोकभवन में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार आज एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है, जिसमें शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने सहित कई बड़े नीतिगत फैसलों पर मुहर लग सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यह बैठक लोकभवन, लखनऊ में आयोजित होगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह प्रदेश के शिक्षा जगत और सरकारी सेवाओं से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम माना जाएगा।
8 लाख से अधिक शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज का तोहफा
कैबिनेट बैठक में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना का है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार, राज्य कर्मचारियों की तरह, शिक्षकों को भी बिना नकद भुगतान के इलाज की सुविधा देने की तैयारी में है। इससे प्रदेश के करीब 8 लाख से अधिक शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और मध्यान्ह भोजन रसोइए लाभान्वित होंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी। अब इसे अमल में लाने की दिशा में अंतिम मंजूरी दी जा सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस योजना को आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर लागू किया जाएगा, जिससे सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पूरी तरह कैशलेस इलाज संभव होगा।
लखीमपुर खीरी हादसे के पीड़ितों को मिल सकता है आवास
कैबिनेट बैठक में लखीमपुर खीरी में नाव पलटने की घटना से प्रभावित ग्रामीणों के लिए राहत प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। सरकार की ओर से हादसे में प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के निर्णय पर मुहर लगने की संभावना है। यह फैसला राज्य सरकार की आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदनशील नीति को दर्शाता है। बैठक में आवास एवं शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। इनमें प्रमुख हैं:
- ‘उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क) उद्ग्रहण, संग्रहण नियमावली, 2026’
- उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति, 2026
इन प्रस्तावों का उद्देश्य वाह्य विकास शुल्क प्रणाली में सुधार, शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देना है। यदि इन्हें मंजूरी मिलती है, तो रियल एस्टेट, आवास परियोजनाओं और शहरी पुनर्विकास की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग को 9.92 करोड़ रुपये की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के भवन निर्माण कार्यों को तेज करने के लिए 9.92 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की है। इसके तहत:
- उन्नाव (पुरवा) और चंदौली सदर स्थित उप निबंधक कार्यालय भवनों के लिए 2.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- इन दोनों परियोजनाओं की कुल पुनरीक्षित लागत 5.81 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा, उन्नाव (सफीपुर, बांगरमऊ), बाराबंकी (रामसनेही घाट), सुलतानपुर (लंभुआ, जयसिंहपुर), प्रतापगढ़ (कुंडा) और बुलंदशहर (खुर्जा) में रिकॉर्ड रूम निर्माण के लिए 7.03 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है। सरकार का मानना है कि इन भवनों के निर्माण से स्टांप एवं पंजीकरण सेवाओं में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
10% ईंधन अधिभार पर विवाद, नियामक आयोग में याचिका
इस बीच, पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा फरवरी महीने में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने के आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले के खिलाफ विद्युत नियामक आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल किया है। पॉवर कॉर्पोरेशन का कहना है कि नवंबर 2025 में बिजली खरीद की वास्तविक दर 5.79 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि स्वीकृत टैरिफ 4.94 रुपये प्रति यूनिट है। इसी अंतर के आधार पर अधिभार लगाया गया है।
वहीं, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने मांग की है कि इस बिजली खरीद की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और 10% वसूली पर तत्काल रोक लगे।









