उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब पार्टी ने पूर्वांचल पर भी फोकस बढ़ाने का फैसला किया है।
UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूर्वांचल पर विशेष ध्यान देने की तैयारी में है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को संगठन विस्तार और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की अहम जिम्मेदारी दी जा रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सितंबर में पूर्वांचल के कई जिलों में उनकी बड़ी जनसभाएं आयोजित की जा सकती हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद की सक्रिय राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इसकी शुरुआत 25 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में प्रस्तावित जनसभा से हो सकती है।
इसके बाद पूर्वांचल में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की मांग के आधार पर आकाश की सभाओं का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले मायावती की बड़ी मंडलीय रैलियों से पहले आकाश आनंद विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी के लिए माहौल तैयार करेंगे।
युवाओं और कोर वोट बैंक पर बसपा की नजर
बसपा की रणनीति में युवा मतदाताओं, खासकर नई पीढ़ी यानी Gen Z तक पहुंच बनाना प्रमुख लक्ष्य बताया जा रहा है। आकाश आनंद को पार्टी के युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाकर बसपा अपने पारंपरिक समर्थकों के साथ नए मतदाता वर्ग को भी जोड़ने का प्रयास कर सकती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित, पिछड़े और अन्य सामाजिक समूहों के बीच बसपा का लंबे समय से प्रभाव रहा है।
हालांकि, हाल के चुनावों में पार्टी के वोट आधार में बदलाव और अन्य दलों की बढ़ती सक्रियता ने बसपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने और विपक्षी दलों की ओर मतदाताओं के संभावित झुकाव को रोकने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
पूर्वांचल क्यों है बसपा के लिए अहम?

पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की राजनीति का बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें हैं और जातीय व सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। बसपा पहले इस क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन कर चुकी है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के दौरान उत्तर प्रदेश में 10 सीटें जीती थीं। इनमें पूर्वांचल की लालगंज, गाजीपुर, घोसी और जौनपुर जैसी सीटें भी शामिल थीं। लालगंज से संगीता आजाद, गाजीपुर से अफजाल अंसारी, घोसी से अतुल राय और जौनपुर से श्याम सिंह यादव चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बसपा ने उस चुनाव में सहारनपुर, बिजनौर, नगीना और अमरोहा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा श्रावस्ती और अंबेडकरनगर जैसी सीटों पर भी पार्टी को सफलता मिली थी। लेकिन इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा उत्तर प्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत सकी।
2024 की हार के बाद नए सिरे से रणनीति
2024 के लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने के बाद बसपा के सामने अपने संगठन और जनाधार को दोबारा मजबूत करने की चुनौती है। वर्तमान में लोकसभा में पार्टी का कोई प्रतिनिधि नहीं है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाना बसपा की प्राथमिकता बन गया है। पूर्वांचल में पार्टी के स्थानीय नेता और संगठन पदाधिकारी लगातार राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने में जुटे हैं।
इंदु चौधरी जैसे नेताओं की सक्रियता के साथ पूर्व सांसद अतुल राय भी क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में लगे बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जनसभाओं, कार्यकर्ता बैठकों और नए लोगों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
नेताओं को जोड़ने और संगठन विस्तार की तैयारी
बसपा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। पार्टी का लक्ष्य उन क्षेत्रों में मजबूत उम्मीदवार और स्थानीय चेहरे तैयार करना है, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा। उत्तर प्रदेश में बसपा की राजनीतिक स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या में कमी ने संगठनात्मक चुनौती बढ़ाई है। ऐसे समय में आकाश आनंद की सक्रियता को बसपा के राजनीतिक पुनर्गठन की व्यापक योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।











