उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित है। यह एक सुरक्षित विधानसभा सीट है, जहां केवल SC वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो रही हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर राजनीतिक दलों की खास नजर है। सहारनपुर जिले की रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट भी ऐसी ही महत्वपूर्ण सीट है, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2022 में यहां बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर काफी बदलती नजर आई। बीजेपी और विपक्षी गठबंधन के बीच वोटों का अंतर बेहद कम रह गया। ऐसे में 2027 में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
रामपुर मनिहारन सीट का मौजूदा राजनीतिक गणित
रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की विधानसभा संख्या 6 है और यह SC आरक्षित सीट है। वर्तमान में यहां से बीजेपी के देवेंद्र कुमार निम विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी। उस चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने समाजवादी पार्टी (SP) के गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी अलग-अलग उम्मीदवार उतारे थे।
2022 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो बीजेपी को 89,109 वोट, RLD-SP गठबंधन को 64,864 वोट और BSP को 68,516 वोट मिले थे। आजाद समाज पार्टी को 4,606, जबकि कांग्रेस को 1,544 वोट मिले। इस तरह बीजेपी के देवेंद्र कुमार निम ने करीब 24,245 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। खास बात यह रही कि BSP दूसरे स्थान पर रही और RLD-SP गठबंधन तीसरे नंबर पर चला गया।
2024 में बदल गई तस्वीर
2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर मनिहारन विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों ने बीजेपी के लिए नई चुनौती पेश की। बीजेपी-RLD गठबंधन को यहां 85,950 वोट मिले, जबकि SP-कांग्रेस गठबंधन 84,393 वोटों तक पहुंच गया। दोनों के बीच महज 1,557 वोटों का अंतर रहा। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में बीजेपी ने इसी विधानसभा सीट पर 24 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। यानी दो साल के भीतर बीजेपी की बढ़त काफी कम हुई।
वहीं BSP को 2024 में करीब 42,541 वोट मिले। 2022 की तुलना में पार्टी का वोट काफी घटा। इससे संकेत मिलता है कि BSP का एक बड़ा वोट हिस्सा विपक्षी गठबंधन की ओर गया हो सकता है। हालांकि, किसी खास सामाजिक समूह के वोट के स्थानांतरण का अंतिम निष्कर्ष केवल चुनावी आंकड़ों से निकालना सावधानी की मांग करता है।

2027 में सपा को क्यों दिख रही उम्मीद?
रामपुर मनिहारन में 2024 के आंकड़े समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए उत्साह बढ़ाने वाले हैं। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी-RLD गठबंधन को बेहद करीबी मुकाबले में रोक दिया। ऐसे में अगर 2027 में SP-कांग्रेस के बीच गठबंधन या बेहतर तालमेल रहता है, तो बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती हो सकती है। दूसरी तरफ बीजेपी के लिए सबसे बड़ा फायदा उसका मौजूदा संगठनात्मक आधार और पिछड़े तथा अति पिछड़े वर्गों में पकड़ हो सकता है। इसके अलावा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की रणनीति भी पार्टी के चुनावी समीकरण का हिस्सा रह सकती है।
जातीय समीकरण भी बेहद अहम
रामपुर मनिहारन की राजनीति में सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपलब्ध स्थानीय चुनावी अनुमानों के अनुसार क्षेत्र में मुस्लिम और SC मतदाताओं की संख्या बड़ी है। इसके अलावा गुर्जर, सैनी, जाट, पाल-कश्यप और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाता भी चुनावी परिणाम प्रभावित कर सकते हैं।क्योंकि सीट SC के लिए आरक्षित है, इसलिए उम्मीदवारों का सामाजिक आधार और संबंधित दल के साथ विभिन्न समुदायों का गठजोड़ निर्णायक हो सकता है।
मुस्लिम वोटों के साथ SC मतदाताओं का रुख विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा, जबकि बीजेपी ओबीसी, अति पिछड़े और अन्य समर्थक सामाजिक समूहों को एकजुट रखने की कोशिश करेगी।
BSP की भूमिका फिर बना सकती है बड़ा अंतर
2022 में BSP का प्रदर्शन रामपुर मनिहारन में बेहद महत्वपूर्ण रहा था। पार्टी 68 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रही थी। लेकिन 2024 में उसका वोट काफी कम हो गया। अगर 2027 में BSP फिर मजबूत होकर चुनाव लड़ती है और अपना पारंपरिक वोट बैंक वापस खींचती है, तो मुकाबले का गणित पूरी तरह बदल सकता है। यही वजह है कि बीजेपी, SP और BSP—तीनों के लिए यह सीट रणनीतिक रूप से अहम हो सकती है।










