जयपुर में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक वित्तीय सुधार, स्थानीय मुद्राओं, डिजिटल करेंसी और सीमा पार भुगतान पर चर्चा कर रहे हैं।
जयपुर: भारत के राजस्थान स्थित जयपुर में बुधवार को BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक शुरू हुई। बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों, वित्तीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार रात जयपुर पहुंचीं। जयपुर रेलवे स्टेशन पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उनका स्वागत किया। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी और केंद्रीय बैंक प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर रहेगा फोकस
जयपुर में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच व्यापक आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करना है। सदस्य देशों के प्रतिनिधि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और उनसे उत्पन्न चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।
वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार, वित्तीय बाजारों में स्थिरता, निवेश के अवसर और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियां बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की दिशा में भी चर्चा होने की उम्मीद है।
BRICS समूह में शामिल उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने पर लगातार जोर देती रही हैं। ऐसे में जयपुर बैठक को आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर का संबोधन
बैठक की औपचारिक शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रतिनिधियों को संबोधित किया। इसके बाद वित्त मंत्रालयों और केंद्रीय बैंकों से जुड़े साझा मुद्दों पर संयुक्त सत्र आयोजित किया गया। इन सत्रों में BRICS देशों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों की आर्थिक परिस्थितियों, वित्तीय नीतियों और केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। बैठक का उद्देश्य केवल मौजूदा आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करना ही नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग के नए रास्ते तलाशना भी है।
कार्यक्रम के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के लिए सामूहिक फोटो सेशन और लंच का भी आयोजन किया गया। दो दिवसीय बैठक में आधिकारिक चर्चाओं के साथ प्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद को भी महत्व दिया जा रहा है।
ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी जयपुर पहुंचा
BRICS बैठक में भाग लेने के लिए ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी जयपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर डॉ. अब्दुल नासिर हिम्मती कर रहे हैं। विशेष विमान से जयपुर पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फत्ताली और डिप्टी एम्बेसडर मोहम्मद जावेद हुसैनी ने किया। ईरान की भागीदारी बैठक के वित्तीय और मौद्रिक सहयोग से जुड़े एजेंडे को और व्यापक बनाती है।
ईरान सहित BRICS देशों के बीच वित्तीय सहयोग, व्यापार और भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने की संभावनाएं आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में बैठक में ईरान की भागीदारी पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर जोर
जयपुर बैठक के प्रमुख एजेंडे में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार का मुद्दा शामिल है। BRICS देश लंबे समय से वैश्विक वित्तीय संस्थानों में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
बैठक में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि विकासशील देशों को पूंजी तक बेहतर पहुंच कैसे उपलब्ध कराई जाए। निजी निवेश को आकर्षित करने, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाने और विकास वित्त को मजबूत करने जैसे विषय भी चर्चा में हैं। वैश्विक वित्तीय संस्थानों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर भी विचार-विमर्श महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर चर्चा
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान बढ़ाना भी वित्तीय सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। जयपुर बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल से सदस्य देशों के बीच व्यापार में कुछ मामलों में विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने की संभावना है। इससे सीमा पार भुगतान को अधिक सुविधाजनक बनाने और लेनदेन की लागत घटाने के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
भारत के संदर्भ में रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ाने के प्रयास भी व्यापक वित्तीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए सदस्य देशों के बीच तकनीकी और वित्तीय समन्वय आवश्यक होगा।
फास्ट पेमेंट सिस्टम और CBDC पर भी नजर
बैठक से पहले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने BRICS देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम और केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC को आपस में जोड़ने की संभावनाओं की जानकारी दी थी। अगर अलग-अलग देशों की तेज भुगतान प्रणालियों को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो इससे सीमा पार लेनदेन को तेज और कम लागत वाला बनाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह CBDC के बीच संभावित इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा भविष्य की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने पिछले वर्षों में तेजी से विस्तार किया है। ऐसे में BRICS के भीतर डिजिटल वित्तीय तकनीकों पर सहयोग भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है।
विकासशील देशों के लिए वित्तीय अवसर बढ़ाने की कोशिश
BRICS देशों की अर्थव्यवस्थाओं में कई बड़े विकासशील और उभरते बाजार शामिल हैं। ऐसे देशों के लिए विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और निजी क्षेत्र के विस्तार हेतु पूंजी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। जयपुर बैठक में विकास वित्त को मजबूत करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा हो रही है। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसी वित्तीय व्यवस्था तैयार करना है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक पूंजी बाजारों और वित्तीय संस्थानों से बेहतर अवसर मिल सकें। सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से व्यापार, निवेश और वित्तीय संपर्क को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है जयपुर बैठक?
भारत की मेजबानी में आयोजित यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई स्तरों पर बदलाव से गुजर रही है। व्यापार, निवेश, भुगतान प्रणाली, डिजिटल मुद्रा और वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं। जयपुर में होने वाली चर्चाएं BRICS देशों के बीच भविष्य के वित्तीय सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। खास तौर पर सीमा पार भुगतान, स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल वित्तीय तकनीकों पर सहयोग से सदस्य देशों के बीच आर्थिक संपर्क को नई गति मिल सकती है।
वैश्विक वित्तीय सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश
जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक केवल आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच वित्तीय सहयोग को मजबूत करने का प्रयास भी है। बैठक में वैश्विक वित्तीय स्थिरता से लेकर डिजिटल भुगतान और स्थानीय मुद्राओं तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। आने वाले समय में इन चर्चाओं से निकलने वाले प्रस्ताव और सहमति BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
दो दिवसीय बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने, वित्तीय व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और डिजिटल वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर मंथन कर रहे हैं। जयपुर में हो रही यह बैठक भारत की बढ़ती भूमिका और BRICS के भीतर वित्तीय सहयोग की बदलती प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करती है।













