असम में ड्रोन से डाक पहुंचाने की शुरुआत, बाढ़ प्रभावित इलाकों में मिलेगी तेज कनेक्टिविटी

असम में ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बैग पहुंचाने के लिए पहली Drone Run शुरू हुई। असम और हिमाचल में 150 ड्रोन रूट विकसित किए जा रहे हैं, जिससे डाक सेवा तेज होगी।

असम में ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बैग पहुंचाने के लिए पहली Drone Run शुरू की गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसकी जानकारी साझा की। असम और हिमाचल में 150 ड्रोन रूट विकसित किए जाने की योजना है।

असम: बाढ़ और दुर्गम इलाकों से जूझ रहे असम में डाक पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली Drone Run का वीडियो साझा करते हुए बताया कि ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बैग ड्रोन के जरिए पहुंचाए गए। इस तकनीक से दूरदराज क्षेत्रों में डाक सेवा को तेज, भरोसेमंद और ट्रैक करने योग्य बनाने की कोशिश की जा रही है।

असम में शुरू हुई पहली Drone Run

असम में दूरदराज इलाकों तक डाक पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बैग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए पहली Drone Run शुरू की गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया पर इसका वीडियो साझा किया।

यह पहल खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होता है। ड्रोन के जरिए जरूरी डाक सामग्री को कम समय में निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

असम और हिमाचल में 150 रूट का ड्रोन नेटवर्क

दूरदराज क्षेत्रों में डाक सेवा को मजबूत करने के लिए असम और हिमाचल प्रदेश में करीब 150 ड्रोन रूट विकसित किए जा रहे हैं। इनमें अकेले असम में 40 रूट शामिल होने की जानकारी दी गई है।

ड्रोन नेटवर्क के जरिए डाक को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के साथ उसकी ट्रैकिंग भी संभव होगी। इससे ऐसे क्षेत्रों में डिलीवरी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, जहां पारंपरिक परिवहन व्यवस्था मौसम या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रभावित होती है।

10 किलो तक सामान ले जा सकते हैं कुछ ड्रोन

ड्रोन नेटवर्क के लिए Skye Air Mobility की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी के पास AI-powered autonomous drones मौजूद हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुछ ड्रोन करीब 10 किलोग्राम तक का पेलोड लेकर लगभग 30 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं।

कुछ अन्य मॉडल इससे ज्यादा दूरी तय करने में सक्षम बताए जाते हैं। इन ड्रोन में ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वे उड़ान भरने और लैंडिंग जैसी प्रक्रियाओं को निर्धारित सिस्टम के आधार पर पूरा कर सकते हैं।

बाढ़ प्रभावित असम में ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है तकनीक

असम में हर साल बाढ़ के कारण सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसी परिस्थितियों में कई इलाकों तक जरूरी सामान और सेवाएं पहुंचाना चुनौती बन जाता है।

ड्रोन के जरिए सड़क या पुलों के बाधित होने की स्थिति में भी डाक और जरूरी सामग्री पहुंचाने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। इससे आपदा या आपात स्थिति में दूरदराज क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया टेक्नोलॉजी आधारित सेवा का उदाहरण

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Drone Run का वीडियो साझा करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेक्नोलॉजी आधारित जन सेवा के विजन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि डाक विभाग देश के अलग-अलग हिस्सों तक सेवा पहुंचाने और अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नई तकनीकों को अपना रहा है।

असम में शुरू हुआ यह ड्रोन प्रयोग भविष्य में डाक सेवा के अलावा दुर्गम और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दूसरी जरूरी सेवाओं की डिलीवरी के लिए भी तकनीक के इस्तेमाल का रास्ता खोल सकता है।

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