MGNREGA की जगह लागू की गई VB-G RAM G योजना को शुरू हुए करीब एक महीना हो चुका है। इस दौरान योजना के तहत 9.69 करोड़ से ज्यादा पर्सन-डे रोजगार पैदा हुए हैं।
नई दिल्ली: ग्रामीण रोजगार को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। सरकार के अनुसार, VB-G RAM G के लागू होने के बाद पहले महीने में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 9.69 करोड़ से अधिक पर्सन-डे रोजगार दर्ज किए गए। नई व्यवस्था के तहत मजदूरी की औसत दर में भी बढ़ोतरी हुई है। अब राष्ट्रीय औसत दैनिक मजदूरी 327.4 रुपये तक पहुंच गई है।
नई ग्रामीण रोजगार योजना को MGNREGA की जगह लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।
पहले महीने में 9.69 करोड़ पर्सन-डे रोजगार
लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, VB-G RAM G के लागू होने के बाद करीब एक महीने की अवधि में 9.69 करोड़ से ज्यादा पर्सन-डे रोजगार दर्ज किए गए। पर्सन-डे का मतलब एक व्यक्ति को एक दिन मिला रोजगार है। इसलिए यह आंकड़ा यह नहीं बताता कि इतने अलग-अलग लोगों को नौकरी मिली, बल्कि कुल रोजगार-दिवसों को दर्शाता है।
ग्रामीण इलाकों में ऐसे रोजगार का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह योजना उन परिवारों को काम उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए तैयार हैं।
औसत मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये हुई
सरकार ने बताया कि VB-G RAM G के तहत 1 जुलाई से 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम बेस वेज रेट लागू की गई। इसके बाद राष्ट्रीय औसत घोषित मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई। इस हिसाब से राष्ट्रीय औसत मजदूरी में करीब 28.6 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि हुई है। सरकार के मुताबिक, योजना लागू होने से पहले कई राज्यों में घोषित मजदूरी 300 रुपये से कम थी।
सबसे कम घोषित दैनिक मजदूरी करीब 241 रुपये थी। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में मजदूरी की वास्तविक दर अलग हो सकती है और यह संबंधित नियमों तथा अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगी।
संसदीय समिति ने 400 रुपये न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश की

इसी बीच ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरी तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताई है। कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलका की अध्यक्षता वाली समिति ने मजदूरी निर्धारण में इस्तेमाल होने वाले आधार वर्ष और महंगाई के पैमाने की समीक्षा करने की सिफारिश की है।
समिति का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक जीवन-यापन लागत को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर सकती। समिति ने क्षेत्रीय आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 400 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी पर विचार करने की सिफारिश की है।
महंगाई के अनुरूप मजदूरी तय करने पर जोर
संसदीय समिति ने ग्रामीण परिवारों की वास्तविक खर्च क्षमता को ध्यान में रखते हुए मजदूरी में नियमित संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऐसा महंगाई सूचकांक जरूरी है, जो वास्तविक जीवन-यापन लागत को बेहतर तरीके से दर्शा सके। समिति ने मजदूरी में व्यवस्थित इंडेक्सेशन यानी महंगाई के अनुरूप समय-समय पर बदलाव सुनिश्चित करने की भी सिफारिश की है।
उसका मानना है कि जब तक मजदूरी निर्धारण की संरचना में व्यापक सुधार नहीं होता, तब तक मौजूदा व्यवस्था में पर्याप्त वेतन वृद्धि की वित्तीय गुंजाइश बनाई जानी चाहिए।
हर परिवार को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि VB-G RAM G देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। यह रोजगार परिवार के उन वयस्क सदस्यों के लिए है, जो अकुशल शारीरिक काम करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हों। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ आय का अधिक स्थिर स्रोत उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
VB-G RAM G के वित्तीय ढांचे को लेकर राज्यों की चिंताओं पर केंद्र ने स्पष्ट किया कि योजना में 60:40 फंडिंग मॉडल अपनाया गया है। यानी सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारें निर्धारित अनुपात में खर्च साझा करेंगी। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए अलग फंडिंग व्यवस्था है। इन क्षेत्रों में 90:10 के अनुपात में खर्च साझा किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार 90 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी।












