वाराणसी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। बीते 34 घंटों में जलस्तर 1.18 मीटर बढ़कर 66.44 मीटर पहुंच गया। यह चेतावनी बिंदु से 3.82 मीटर नीचे है, लेकिन बढ़ते पानी से तटवासियों की चिंता बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश: बाढ़ का पानी उतरने के बाद वाराणसी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। बीते 34 घंटों में गंगा के जलस्तर में 1.18 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। रविवार शाम छह बजे जलस्तर 66.44 मीटर पहुंच गया। हालांकि, यह अभी चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 3.82 मीटर और खतरे के निशान 71.26 मीटर से 4.82 मीटर नीचे है। तेजी से बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है।
24 घंटे में 90 सेमी बढ़ा जलस्तर
गंगा के जलस्तर में वृद्धि शनिवार शाम से शुरू हुई और रात में इसकी रफ्तार काफी तेज हो गई। शनिवार सुबह आठ बजे से रविवार सुबह के बीच 24 घंटे में जलस्तर में 90 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान गंगा का जलस्तर 66.16 मीटर पहुंच गया।

इसके बाद जलस्तर बढ़ने की गति कुछ कम हुई। रविवार सुबह के बाद शाम छह बजे तक 10 घंटे में जलस्तर 28 सेमी बढ़ा और 66.44 मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद भी जलस्तर करीब तीन सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ता रहा।
इस तरह शनिवार सुबह से रविवार शाम छह बजे तक 34 घंटे की अवधि में गंगा के जलस्तर में कुल 1.18 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
चेतावनी और खतरे के निशान से अभी नीचे
तेजी से जलस्तर बढ़ने के बावजूद गंगा का पानी फिलहाल चेतावनी बिंदु और खतरे के निशान से काफी नीचे है। वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है।
रविवार शाम छह बजे 66.44 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। यानी पानी चेतावनी बिंदु से 3.82 मीटर और खतरे के निशान से 4.82 मीटर नीचे है। इसके बावजूद जलस्तर बढ़ने की रफ्तार ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है, जो गंगा के तटवर्ती इलाकों में रहते हैं और पिछले महीने आई बाढ़ का असर देख चुके हैं।
नौका संचालन अभी भी बंद
पिछली बाढ़ के बाद गंगा का जलस्तर कम होने लगा था, जिससे तटवर्ती लोगों को कुछ राहत मिली थी। हालांकि, अभी तक नौका संचालन शुरू नहीं हो सका है। बढ़ते जलस्तर और घाटों की मौजूदा स्थिति के कारण नावों का संचालन प्रभावित है।
गंगा आरती भी अभी घाटों के सामान्य हिस्से में नहीं बल्कि घाटों की छतों पर की जा रही है। वहीं, शवदाह की व्यवस्था भी प्रभावित है। मणिकर्णिका घाट की छत और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह किया जा रहा है।
घाटों पर सिल्ट और कीचड़ जमा
गंगा का पानी कम होने के बाद घाटों पर बड़ी मात्रा में सिल्ट और कीचड़ जमा हो गया है। कई स्थानों पर दलदल जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।
श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से भी रोका जा रहा है। ऐसे में गंगा का जलस्तर दोबारा तेजी से बढ़ने से घाटों पर सामान्य गतिविधियां बहाल होने में और समय लग सकता है। फिलहाल तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि पर नजर बनाए हुए हैं।












