लखनऊ में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा के दौरान राहत आयुक्त ने बाढ़ राहत शिविरों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए महिला कर्मचारियों और महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए। साथ ही बचाव संसाधनों और तटबंधों की तैयारियां तेज करने को कहा गया।
Lucknow: उत्तर प्रदेश में मानसून और संभावित बाढ़ की चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने राहत एवं बचाव तैयारियों को तेज कर दिया है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ राहत शिविरों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक शिविर में महिला कर्मचारियों और महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
राहत शिविरों में महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
राहत आयुक्त ने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों में अक्सर महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक होती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शिविर में महिला कर्मचारियों और महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की रूपरेखा तैयार की जाए। इसके अलावा पुलिस बल, एसडीआरएफ और पीएसी जवानों की आवश्यकता का आकलन कर समय रहते प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए गए।
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उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी जिलों को पहले से तैयारी पूरी करने के लिए कहा गया है।
स्थानीय नाविकों और गोताखोरों का लिया जाएगा सहयोग
बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का भी उपयोग किया जाएगा। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थानीय गोताखोरों और नाविकों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें सुरक्षा बलों के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का अनुभव और क्षेत्र की जानकारी आपदा के समय काफी उपयोगी साबित होती है। इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और संभावित जनहानि को कम करने में मदद मिलेगी।
तटबंधों की मरम्मत और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी
बैठक में जिलाधिकारियों को तटबंधों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
राहत आयुक्त ने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों में चिकित्सकों, आवश्यक दवाओं और एंबुलेंस की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके अलावा सभी जिलों में बाढ़ राहत कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उन्होंने नदियों के किनारे बसे गांवों और आवासीय क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। सरकार का उद्देश्य बाढ़ के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है।









