यूपी में रिटायर्ड प्रमुख सचिव गिरफ्तार, पशुधन विभाग भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन; 2014 में सपा सरकार के दौरान हुई थी भर्ती

यूपी में 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले में रिटायर्ड प्रमुख सचिव योगेश कुमार गिरफ्तार। 1198 पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच जारी।
यूपी में रिटायर्ड प्रमुख सचिव गिरफ्तार, पशुधन विभाग भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन; 2014 में सपा सरकार के दौरान हुई थी भर्ती
Photo Credit / Attribution: Google

उत्तर प्रदेश में 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। यह मामला समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में पशुधन विभाग में 1198 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान योगेश कुमार की भूमिका से संबंधित साक्ष्य मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

यह मामला करीब 12 साल पुरानी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। उस समय उत्तर प्रदेश के पशुधन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारियों के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। भर्ती प्रक्रिया के दौरान परीक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और चयन समितियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। लंबे समय से जांच के दायरे में रहे इस मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2014 में प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के कुल 1198 पदों पर भर्ती की गई थी। इसके लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच में मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों और ओएमआर शीट के मूल्यांकन की प्रक्रिया से संबंधित अनियमितताओं की बात सामने आई। 

भर्ती प्रक्रिया में मंडलीय चयन समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। ऐसी समितियों का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करना और संबंधित स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखना होता है। जांच से जुड़ी रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि इन समितियों के अधिकारों को सीमित कर मूल्यांकन की प्रक्रिया केंद्रीकृत तरीके से कराई गई। अब जांच एजेंसी इन तथ्यों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर मामले की कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।

भर्ती के समय योगेश कुमार शासन में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। EOW के महानिदेशक जेएन सिंह के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मामले की विवेचना में योगेश कुमार की भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तारी जांच का हिस्सा है; आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

इस प्रकरण का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उस समय प्रदेश के पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह थे। भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच के साथ यह सवाल भी चर्चा में रहा है कि चयन प्रक्रिया से जुड़े निर्णय किस स्तर पर लिए गए और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या थी। हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक या प्रशासनिक स्थिति मात्र से अपराध साबित नहीं होता; प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

मामले में तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति से संबंधित फाइल शासन स्तर पर लंबित होने की जानकारी भी प्रकाशित रिपोर्ट में दी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके खिलाफ आरोप सिद्ध हो चुके हैं। अभियोजन स्वीकृति और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया के बारे में आगे की आधिकारिक जानकारी से ही स्थिति स्पष्ट होगी। 

सरकारी भर्ती में अनियमितताओं के आरोप युवाओं और नौकरी के अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और समान अवसर की अपेक्षा करते हैं। यदि किसी भर्ती में नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी होती है। साथ ही, जांच के दौरान नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों और मामले से जुड़े सभी पक्षों की कानूनी स्थिति को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

इस पुराने भर्ती मामले में रिटायर्ड प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी से जांच की अगली प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित हुआ है। जांच एजेंसी के सामने भर्ती के दस्तावेजों, चयन प्रक्रिया, मूल्यांकन और संबंधित प्रशासनिक फैसलों की कड़ियों को स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। आगे की पूछताछ और न्यायिक कार्यवाही से मामले के अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

फिलहाल, योगेश कुमार की गिरफ्तारी 2014 की पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी कार्रवाई है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। जांच की प्रगति और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

Leave a comment