उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पुणे में दिया संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश कहा- ‘विकसित भारत के लिए स्वस्थ भारत जरूरी’

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पुणे में संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए स्वस्थ भारत जरूरी है। पढ़ें उनका पूरा संबोधन

भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने कहा कि “विकसित भारत” का सपना तभी पूरा हो सकता है जब देश के नागरिक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ हों। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

नई दिल्ली: सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को पुणे में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ‘स्वस्थ भारत’ भी शामिल होना चाहिए।उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए नागरिकों का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। उपराष्ट्रपति ने लोगों से संतुलित आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियां करने और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाज स्वस्थ रहेगा, तभी देश मजबूत और विकसित बन सकेगा। इसलिए हर नागरिक को अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विकसित राष्ट्र की नींव है स्वस्थ समाज

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश के विकास का आधार उसके नागरिकों का स्वास्थ्य होता है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक प्रगति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों का शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित हो। राधाकृष्णन ने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो “स्वस्थ भारत” का लक्ष्य समान रूप से महत्वपूर्ण होना चाहिए।

प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की अपील

उपराष्ट्रपति ने लोगों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं, जिन्हें संतुलित दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर कम किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे

  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें
  • रोजाना शारीरिक गतिविधि करें
  • मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें
  • प्रकृति के करीब रहने की आदत विकसित करें

उनके अनुसार, निसर्गोपचार और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गई है।

महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक

कार्यक्रम में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने Mahatma Gandhi को याद किया और कहा कि गांधीजी प्रकृति को सबसे बड़ा उपचारक मानते थे। उनका विश्वास था कि सादगी, अनुशासन और प्राकृतिक जीवनशैली ही सच्चे स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने कहा कि निसर्गोपचार आश्रम की स्थापना गांधीजी के इसी विचार पर आधारित थी और आज भी यह संस्था लोगों को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही है।

राधाकृष्णन ने आश्रम के लिए भूमि दान करने वाले किसान और इस संस्था से जुड़े लोगों के योगदान की भी सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुस्तक विमोचन और गणमान्य लोगों की मौजूदगी

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आश्रम के प्रबंध न्यासी डॉ. नारायण हेगड़े द्वारा लिखित पुस्तक Secrets of Our Happiness का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पुस्तकें लोगों को सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। कार्यक्रम में Jishnu Dev Varma और Sunetra Pawar सहित कई प्रमुख अतिथि मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

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