कोलंबिया के नए राष्ट्रपति अबेलार्दो डे ला एस्प्रीएला के शपथ लेने के कुछ घंटों बाद अमेरिका ने करीब 1 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता देने का ऐलान किया। नई सरकार ने ड्रग कार्टेल और सशस्त्र अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया है।
बोगोटा: कोलंबिया में दक्षिणपंथी नेता अबेलार्दो डे ला एस्प्रीएला के राष्ट्रपति पद संभालने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने देश के लिए करीब 1 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता देने का ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक यह पैकेज संगठित अपराध और अवैध आव्रजन से निपटने में दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
राष्ट्रपति बनते ही ड्रग कार्टेल के खिलाफ सख्त रुख
अबेलार्दो डे ला एस्प्रीएला ने 7 अगस्त को कोलंबिया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उन्होंने पारंपरिक राजधानी बोगोटा के बजाय कैली शहर में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया, जिसे उनके राजनीतिक अंदाज में एक महत्वपूर्ण प्रतीक के तौर पर देखा गया। राष्ट्रपति बनने के बाद अपने शुरुआती संबोधन में उन्होंने देश के ड्रग कार्टेल, सशस्त्र समूहों और संगठित अपराध के खिलाफ कड़ा अभियान चलाने का संकल्प लिया।
डे ला एस्प्रीएला ने सुरक्षा बलों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अपराधियों के लिए देश में कोई सुरक्षित जगह नहीं होगी। उन्होंने सशस्त्र विद्रोही समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और देश के पुनर्निर्माण का वादा किया। उनके भाषण में कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिखाई दिया।
अमेरिका ने घोषित किया 1 अरब डॉलर का सुरक्षा पैकेज
नई सरकार के शुरुआती घंटों में अमेरिका की ओर से घोषित 1 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता को दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि सहायता का उद्देश्य संगठित अपराध और अवैध आव्रजन से मुकाबले जैसे साझा लक्ष्यों को हासिल करने में कोलंबिया की मदद करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डे ला एस्प्रीएला के बीच राजनीतिक नजदीकी पहले से चर्चा में रही है। चुनाव से पहले ट्रंप ने डे ला एस्प्रीएला के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया था और उनके राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका-कोलंबिया संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई थी।
नई सरकार के आने के साथ वॉशिंगटन और बोगोटा के बीच सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
'टोटल पीस' नीति से अलग होगी नई सरकार
डे ला एस्प्रीएला की सुरक्षा नीति उनके पूर्ववर्ती गुस्तावो पेट्रो की रणनीति से काफी अलग है। पेट्रो सरकार ने सशस्त्र समूहों और आपराधिक संगठनों के साथ बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने के लिए 'टोटल पीस' यानी पूर्ण शांति की नीति अपनाई थी।
इस रणनीति के तहत सरकार ने विभिन्न विद्रोही और आपराधिक समूहों के साथ बातचीत तथा समझौते की कोशिश की। साथ ही किसानों को कोका की खेती छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की नीति भी अपनाई गई। लेकिन आलोचकों का आरोप रहा कि इस रणनीति से सशस्त्र समूहों की ताकत कम नहीं हुई और कई इलाकों में हिंसा तथा विस्थापन जारी रहा।
डे ला एस्प्रीएला ने संकेत दिया है कि वह बातचीत आधारित मॉडल को पीछे छोड़कर अधिक आक्रामक सुरक्षा नीति अपनाएंगे। उनका जोर सैन्य कार्रवाई, अपराधियों पर कठोर कार्रवाई और नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने पर रहेगा।
कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति का बढ़ता प्रभाव
डे ला एस्प्रीएला की जीत को केवल कोलंबिया की घरेलू राजनीति में बदलाव नहीं माना जा रहा है। यह पूरे लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी राजनीति के बढ़ते प्रभाव की व्यापक तस्वीर का हिस्सा भी है।
क्षेत्र के कई देशों में आर्थिक दबाव, महंगाई, बेरोजगारी और संगठित अपराध को लेकर जनता की चिंता ने सुरक्षा-केंद्रित और सख्त नेतृत्व के लिए समर्थन बढ़ाया है। अल साल्वाडोर के नायिब बुकेले और इक्वाडोर के डेनियल नोबोआ जैसे नेताओं ने भी अपराध और गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाया है।
डे ला एस्प्रीएला का मॉडल भी इसी तरह की सख्त कानून-व्यवस्था वाली राजनीति से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। हालांकि, उनकी नीतियों को लेकर मानवाधिकार और सैन्य कार्रवाई से जुड़े सवाल भी उठ सकते हैं।
ट्रंप के साथ मजबूत संबंध बनाने की तैयारी
डे ला एस्प्रीएला ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत में अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने ट्रंप द्वारा स्थापित 'Shield of the Americas' सुरक्षा साझेदारी में कोलंबिया को शामिल करने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इस कदम का स्वागत किया है।
वॉशिंगटन ने डे ला एस्प्रीएला के आर्थिक एजेंडे को भी सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि नई सरकार के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को और गहरा करने के अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह बदलाव पूर्व राष्ट्रपति पेट्रो की विदेश नीति से भी अलग है। पेट्रो ने अमेरिका की कई नीतियों की आलोचना की थी और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर भी वॉशिंगटन से अलग रुख अपनाया था।
इजरायल के साथ भी मजबूत रिश्तों का संकेत
डे ला एस्प्रीएला ने अमेरिका के साथ-साथ इजरायल के साथ भी मजबूत रणनीतिक और सैन्य संबंध बनाने की इच्छा जताई है। यह नीति पेट्रो सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है, जिसने गाजा में इजरायली सैन्य अभियान को लेकर इजरायल की आलोचना की थी।
नई सरकार के तहत कोलंबिया की विदेश नीति में अमेरिका और इजरायल के साथ करीबी सहयोग को अधिक महत्व मिलने की संभावना है। इससे देश की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

कौन हैं अबेलार्दो डे ला एस्प्रीएला?
अबेलार्दो डे ला एस्प्रीएला पेशे से वकील और कारोबारी हैं। उन्होंने खुद को पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग एक बाहरी व्यक्ति यानी 'आउटसाइडर' के तौर पर पेश किया। उनका उपनाम 'El Tigre' यानी 'द टाइगर' है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी राजनीतिक छवि में भी करते हैं।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने वकालत के क्षेत्र में काम किया और कई चर्चित आपराधिक मामलों में बचाव पक्ष के वकील के रूप में पैरवी की। अब राष्ट्रपति के तौर पर उनका मुख्य एजेंडा उन्हीं आपराधिक नेटवर्क और सशस्त्र समूहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना है।
उनकी राजनीतिक यात्रा ऐसे समय में तेजी से आगे बढ़ी, जब देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही थी। चुनाव प्रचार के दौरान वह कई बार बुलेटप्रूफ जैकेट और सुरक्षा घेरे के बीच दिखाई दिए।
संकीर्ण अंतर से जीता राष्ट्रपति चुनाव
डे ला एस्प्रीएला ने जून 2026 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेडा को मामूली अंतर से हराया। आधिकारिक परिणामों के अनुसार उन्हें करीब 49.66 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सेपेडा को लगभग 48.70 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
इसके बाद कोलंबिया के राष्ट्रीय निर्वाचन परिषद ने उन्हें 2026 से 2030 तक के कार्यकाल के लिए आधिकारिक तौर पर निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया।
उनकी जीत ने गुस्तावो पेट्रो के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के बाद कोलंबिया की राजनीति को स्पष्ट रूप से दक्षिणपंथ की ओर मोड़ दिया है।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
राष्ट्रपति पद संभालते ही डे ला एस्प्रीएला के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। इनमें ड्रग तस्करी, सशस्त्र समूहों की गतिविधियां, ग्रामीण इलाकों में हिंसा, आर्थिक दबाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण प्रमुख हैं।
उनकी सख्त सुरक्षा नीति को कितना समर्थन मिलता है और क्या इससे हिंसा कम होती है, यह आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण सवाल होगा। राष्ट्रपति के शपथ लेने के अगले ही दिन दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया में एक कार बम विस्फोट ने सुरक्षा चुनौती की गंभीरता भी सामने ला दी। सेना ने इस हमले के लिए पूर्व FARC से अलग हुए सशस्त्र गुटों को जिम्मेदार बताया।
ऐसे माहौल में अमेरिका की 1 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता डे ला एस्प्रीएला सरकार के लिए अहम साबित हो सकती है। हालांकि, इस सहायता के साथ सुरक्षा अभियानों, मानवाधिकारों और सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय निगरानी भी बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल डे ला एस्प्रीएला ने अपने शुरुआती संदेशों से साफ कर दिया है कि उनका प्रशासन अपराध और ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा। अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग कोलंबिया की नई विदेश और सुरक्षा नीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।











