US के 50% टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्टर्स को झटका, UAE–यूरोप में बढ़ी नई डिमांड से मिली राहत

अमेरिका के 50% टैरिफ का असर भारतीय एक्सपोर्ट पर दिखने लगा है। ज्वैलरी, ऑटो और मरीन सेक्टर ने नई विदेशी मार्केट्स पकड़कर गिरावट को काफी हद तक संभाला हैं।

अमेरिका के 50% टैरिफ का वास्तविक असर अब भारतीय एक्सपोर्ट में दिख रहा है। ज्वैलरी, ऑटो पार्ट्स और मरीन सेक्टर ने नई विदेशी मार्केट्स में शिफ्ट होकर नुकसान को सीमित किया, जबकि स्पोर्ट्स और लेदर जैसे उद्योग अभी भी दबाव में हैं।

US Tariff: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर अब वास्तविक रूप में दिखाई दे रहा है। 27 अगस्त 2025 से लागू हुए इन हाई टैरिफ ने शुरुआती दौर में भारतीय एक्सपोर्टर्स को काफी नुकसान पहुंचाया था। लेकिन भारतीय उद्योगों ने तेजी से रणनीति बदलकर नए देशों की ओर रुख किया और बड़ी गिरावट से खुद को बचा लिया। ज्वैलरी, ऑटो पार्ट्स और मरीन जैसे सेक्टरों ने अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करते हुए एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप की ओर शिफ्ट होकर नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया है।

ज्वैलरी सेक्टर ने UAE और यूरोप की ओर शिपमेंट बढ़ाया

जेम्स और ज्वैलरी उद्योग अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। सितंबर में अमेरिका को ज्वैलरी एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 76 प्रतिशत गिरा, जो इस सेक्टर के लिए एक गंभीर झटका था। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस के डेटा एनालिसिस के अनुसार, कुल वैश्विक एक्सपोर्ट में सिर्फ 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

इस सीमित नुकसान की बड़ी वजह यह रही कि भारतीय ज्वैलरी निर्यातकों ने तुरंत अपने शिपमेंट को नए देशों की तरफ मोड़ दिया। UAE को एक्सपोर्ट में 79 प्रतिशत, हांगकांग में 11 प्रतिशत और बेल्जियम में 8 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे सेक्टर ने अमेरिकी बाजार के नुकसान की भरपाई करते हुए अपने बिजनेस को संतुलित रखा और बड़े संकट से बच निकला।

ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर की स्मार्ट रिकवरी

ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग भी अमेरिकी टैरिफ की मार से अछूता नहीं रहा। सितंबर में अमेरिका को एक्सपोर्ट 12 प्रतिशत गिर गया। लेकिन इस उद्योग ने तेज रणनीतिक बदलाव दिखाते हुए दूसरे देशों में अपनी उपस्थिति बढ़ाई।

जर्मनी, UAE और थाईलैंड से मिली नई डिमांड के कारण भारत का कुल ऑटो कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट 8 प्रतिशत बढ़ गया। यह साबित करता है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स अब एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय बहु-देशीय बाजार तैयार कर रहे हैं, जिससे भविष्य में किसी भी व्यापारिक झटके का असर कम होगा।

मरीन प्रोडक्ट्स सेक्टर ने रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की

मरीन सेक्टर अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद सबसे मजबूत और सफल री-डायवर्टेड सेक्टर बनकर सामने आया है। सितंबर में भारत का मरीन एक्सपोर्ट 25 प्रतिशत बढ़ा और अक्टूबर में भी 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

चीन, जापान, थाईलैंड और यूरोपियन यूनियन के देशों से लगातार बढ़ती डिमांड ने भारतीय मरीन उद्योग को नई रफ्तार दी। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच कुल समुद्री निर्यात 16.18 प्रतिशत बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

हालांकि अमेरिका को मरीन प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट 7.43 प्रतिशत गिरा, लेकिन चीन और वियतनाम की भारी मांग ने इस कमी को पूरी तरह संतुलित कर दिया। चीन को झींगा और प्रॉन का एक्सपोर्ट 24.54 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वियतनाम को निर्यात में 123.63 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली। इस उछाल ने अमेरिकी बाजार के प्रभाव को लगभग समाप्त कर दिया।

कुछ सेक्टरों पर अभी भी संकट बरकरार

हालांकि कई उद्योगों ने नई मार्केट स्ट्रैटेजी से रिकवरी दिखा दी, लेकिन कुछ सेक्टर अभी भी टैरिफ के असर से उबर नहीं पाए हैं।

स्पोर्ट्स गुड्स सेक्टर अक्टूबर में 6 प्रतिशत गिर गया क्योंकि इसका लगभग 40 प्रतिशत एक्सपोर्ट अमेरिकी बाजार पर आधारित है। अमेरिकी डिमांड में आई भारी गिरावट का उद्योग पर सीधा असर पड़ा और इस सेक्टर को नए बाजार तुरंत नहीं मिल सके।

इसी तरह कॉटन गारमेंट्स और लेदर फुटवियर सेक्टर भी दबाव में हैं। इन दोनों उद्योगों को अमेरिका से आने वाले ऑर्डर्स में उल्लेखनीय गिरावट का सामना करना पड़ा। उद्योग जगत के अनुसार, इन सेक्टरों को वैकल्पिक बाजार तैयार करने में थोड़ा और समय लग सकता है।

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