देहरादून में उत्तराखंड कैबिनेट ने नई सहकारी नीति को मंजूरी दी है। 2036 तक लागू होने वाली नीति में ग्रामीण विकास, रोजगार, उद्यमिता, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर जोर है।
देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप राज्य की नई सहकारी नीति को मंजूरी दी है। इसे 2036 तक तीन चरणों में लागू किया जाएगा। नीति के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने तथा युवाओं और महिलाओं को सहकारिता से जोड़ने पर फोकस किया गया है। साथ ही डिजिटल सिस्टम और नए क्षेत्रों में सहकारी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।
उत्तराखंड की नई सहकारी नीति को कैबिनेट की मंजूरी

उत्तराखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप राज्य की नई सहकारी नीति को मंजूरी दे दी है। नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। सरकार ने इसे वर्ष 2036 तक तीन चरणों में लागू करने की योजना बनाई है। नीति में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के साथ उन्हें बदलती जरूरतों और नए आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी नीति
नई नीति में सहकारिता के विकास के लिए सात प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों को आधार बनाया गया है। इनमें सहकारी संस्थाओं की बुनियाद मजबूत करना, संस्थाओं को सक्रिय और सक्षम बनाना, भविष्य की जरूरतों के लिए तैयारी, समावेशिता, नए क्षेत्रों में विस्तार, युवाओं को जोड़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता और विविधीकरण शामिल हैं।
गांवों में सहकारिता की भूमिका बढ़ाने के लिए पेक्स को बहुद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से कृषि, उद्यान, डेयरी, बागवानी और मत्स्य पालन से जुड़ी सेवाओं को सहकारी नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराने, बीमा, पेंशन और डिजिटल बैंकिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है।
हिमालयी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए उनके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए क्लस्टर मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को संगठित तरीके से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सके।
युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसरों पर जोर
नई सहकारी नीति में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला सहकारी समितियों के गठन के साथ सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सहकारी मॉडल को पर्यटन, होमस्टे, ईको टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट और वन उत्पाद जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है। स्वास्थ्य, ड्रोन, एआई, हस्तशिल्प और परिवहन क्षेत्र को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ‘सहकार टैक्सी’ को बढ़ावा देने की योजना है।
पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को सहकारिता से जोड़ने का फैसला किया गया है। हब एंड स्पोक मॉडल के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की कोशिश होगी। सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कामकाज, रियल-टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, क्लाउड सीबीएस और डिजिटल डैशबोर्ड आधारित निगरानी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड अपने विशिष्ट ‘हिमालयी सहकारिता मॉडल’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
TDC के 85 कर्मचारियों के स्थानांतरण को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम लिमिटेड (TDC) के 85 कर्मचारियों को नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिलों के अन्य विभागों में सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजने के कृषि विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इनमें तृतीय श्रेणी के 22 और चतुर्थ श्रेणी के 63 कर्मचारी शामिल हैं।
इन कर्मचारियों की TDC में उपयोगिता मुख्य रूप से सीजनल होने के कारण उन्हें अन्य विभागों में भेजने का निर्णय लिया गया है। वे अधिकतम 10 वर्ष या सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले तक संबंधित विभागों में काम कर सकेंगे। इस दौरान उनका वेतन संबंधित विभाग देगा, जबकि सेवानिवृत्ति लाभ TDC की ओर से दिए जाएंगे। इससे निगम को हो रहे वार्षिक घाटे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
UUSDA में 94 पदों के सृजन को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (UUSDA) में 94 स्थायी निस्संवर्गीय पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इन पदों के जरिए विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं के संचालन में तेजी लाने का लक्ष्य है।
कोटद्वार, चंपावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रुद्रपुर, काशीपुर और सितारगंज नगर निकायों में पेयजल और सीवेज से जुड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। ऋषिकेश में सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, पेयजल और घाटों के सुंदरीकरण से संबंधित कार्य भी शामिल हैं। नए पदों से इन परियोजनाओं के सुचारू संचालन में मदद मिलेगी।









