वंदे मातरम् को मिली कानूनी सुरक्षा, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बना नया कानून

Vande Mataram को अब कानूनी सुरक्षा मिल गई है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नया कानून लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। जानें वंदे मातरम् से जुड़े नए कानून की

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को अब कानूनन अपराध माना जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद मंगलवार, 11 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘वंदे मातरम् बिल’ को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है।

Vande Mataram Law 2026: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब राष्ट्रीय सम्मान कानून के तहत स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिल गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह विधेयक कानून बन गया है। नए प्रावधानों के तहत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके दौरान किसी सभा में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा।

यह संशोधन Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में किया गया है। पहले इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े अपमान तथा राष्ट्रीय गान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसे कृत्यों पर कार्रवाई का प्रावधान था। 2026 के संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल कर दिया गया है।

अब वंदे मातरम् को रोकना पड़ेगा भारी

नए कानून का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान जानबूझकर की जाने वाली रुकावट या व्यवधान को अपराध की श्रेणी में लाना है। कानून के तहत किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का गायन रोकने या ऐसे कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने पर कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। राष्ट्रीय गान से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में भी इसी तरह की सजा का प्रावधान है।

हालांकि, कानून का मुख्य फोकस जानबूझकर रोकने या व्यवधान डालने जैसे कृत्यों पर है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ऐसी स्थिति में स्वतः आपराधिक मामला बन जाएगा जहां कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत नहीं गाता।

संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था बिल

‘Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026’ को संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। राज्यसभा ने 29 जुलाई को इसे पारित किया, जबकि लोकसभा ने 30 जुलाई को विधेयक को मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ ही यह कानून बन गया। सरकार का तर्क रहा है कि राष्ट्रीय गीत को पहले से ही देश के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है, लेकिन 1971 के कानून में इसके लिए राष्ट्रीय गान जैसी स्पष्ट दंडात्मक सुरक्षा नहीं थी। संशोधन के जरिए इसी कानूनी अंतर को दूर किया गया है।

‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ में क्या अंतर है?

भारत में ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। दोनों का देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक योगदान रहा है। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को कहा था कि ‘वंदे मातरम्’, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाएगा। 2026 का संशोधन अब राष्ट्रीय गीत को एक स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा भी प्रदान करता है।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर इस साल सरकारी स्तर पर प्रोटोकॉल और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर भी नए निर्देश चर्चा में रहे हैं। सरकार ने आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान के क्रम तथा गायन से जुड़े प्रोटोकॉल को स्पष्ट किया है। इन बदलावों की पृष्ठभूमि में 2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का एक प्रमुख प्रतीक बना।

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