पटना से वाराणसी आकर निर्माण क्षेत्र में पहचान बनाने वाले इंजीनियर अजय सिंह की बेटियां अब उनके कारोबार और सपनों को आगे बढ़ा रही हैं। बड़ी बेटी सना सिंह कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारियां संभालकर पारिवारिक व्यवसाय को नई दिशा दे रही हैं।
वाराणसी: संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग से सफलता की नई कहानी लिखने वाले इंजीनियर अजय सिंह आज अपनी बेटियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं। करीब 25 वर्ष पहले खाली हाथ वाराणसी पहुंचे अजय सिंह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। अब उनकी बेटियां उनके सपनों और विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
मूल रूप से बिहार के पटना स्थित भवानी टोला के रहने वाले अजय सिंह करीब 25 वर्ष पहले बेहतर भविष्य की तलाश में वाराणसी आए थे। शुरुआती दौर में चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन के दम पर निर्माण क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
वर्ष 2001 में उन्होंने भवन निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। उनका पहला बड़ा प्रोजेक्ट डीपीएस वाराणसी की इमारत रहा, जिसने उन्हें नई पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने शिक्षा, धार्मिक और व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
देशभर में बनाई पहचान
अजय सिंह के नेतृत्व में कई प्रतिष्ठित परियोजनाएं तैयार हुईं। इनमें डीपीएस की विभिन्न शाखाओं के भवन, सारनाथ का जापानी मंदिर, दुर्गाकुंड का त्रिदेव मंदिर, आईपी मॉल, जयपुरिया स्कूल, सैम्स इंस्टीट्यूट, एपेक्स कॉलेज और चुनार स्थित संतुष्टि कॉलेज जैसे कई प्रमुख निर्माण शामिल हैं।
लगातार सफल परियोजनाओं के कारण उनका नाम निर्माण क्षेत्र में विश्वसनीयता और गुणवत्ता का प्रतीक बन गया।
पिता के सपनों को आगे बढ़ा रही हैं सना सिंह
अजय सिंह की बड़ी बेटी सना सिंह पेशे से वकील हैं और दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। इसके साथ ही वह अपने पिता के व्यवसाय में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
सना कंपनी के कानूनी और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी संभालती हैं। वह परियोजनाओं से जुड़े एग्रीमेंट, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और आर्थिक प्रबंधन को आधुनिक तरीके से संचालित कर रही हैं। उनका मानना है कि अपने पिता के सपनों और मेहनत को आगे बढ़ाना उनके लिए गर्व की बात है।
आधुनिक सोच से कारोबार को दे रही नई दिशा
सना सिंह का कहना है कि वह चाहतीं तो किसी अन्य क्षेत्र में भी अपना करियर बना सकती थीं, लेकिन उन्होंने परिवार के व्यवसाय को आगे बढ़ाने का फैसला किया। वह तकनीक और आधुनिक कार्यशैली का उपयोग करके कंपनी के संचालन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बना रही हैं।
पिता की व्यस्तता कम करने के लिए वह कई जिम्मेदारियां स्वयं संभालती हैं। इससे कंपनी के कामकाज में तेजी और पारदर्शिता दोनों आई हैं।
परिवार भी निभा रहा अहम भूमिका
अजय सिंह की छोटी बेटी शिविका सिंह अमेरिका की बफेलो यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वहीं उनकी पत्नी ऊषा सिंह फाइनेंस में एमबीए हैं और वाराणसी में अपना रिसॉर्ट व्यवसाय संचालित करती हैं।
सना अपनी मां के व्यवसाय में भी सहयोग करती हैं। इस तरह पूरा परिवार अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए एक-दूसरे के सपनों और प्रयासों को मजबूती दे रहा है।
"बाबा ने बहुत कुछ दिया"
अजय सिंह का कहना है कि जब वह वर्ष 2000 में वाराणसी आए थे, तब उनके पास बहुत सीमित संसाधन थे। लेकिन काशी की धरती और बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें सफलता, सम्मान और पहचान मिली।
उन्होंने कहा कि आज उनकी सबसे बड़ी खुशी यह है कि उनकी बेटियां जिम्मेदारी के साथ परिवार की विरासत और मूल्यों को आगे बढ़ा रही हैं। उनके अनुसार, बेटियों का आत्मनिर्भर बनना और परिवार के सपनों को आगे ले जाना किसी भी पिता के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।











