वाराणसी में अंतरराज्यीय Cyber Fraud गिरोह का भंडाफोड़, महिला सरगना और संविदा पोस्टमैन समेत 6 गिरफ्तार

वाराणसी पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ कर महिला सरगना और संविदा पोस्टमैन समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 76.44 लाख की ठगी का खुलासा हुआ।

वाराणसी पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए महिला सरगना, संविदा पोस्टमैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 76.44 लाख रुपये की साइबर ठगी और 21 मामलों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

वाराणसी: सिगरा पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने महिला सरगना, संविदा पोस्टमैन सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह फर्जी पते पर बैंक खाते खुलवाकर म्यूल खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम का लेनदेन कर रहा था।

76.44 लाख रुपये की साइबर ठगी का हुआ खुलासा

वाराणसी पुलिस की सिगरा थाना टीम और साइबर क्राइम सेल ने संयुक्त अभियान चलाकर एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह अब तक 76.44 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क के खिलाफ कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, असम और मणिपुर सहित कई राज्यों में कुल 21 शिकायतें दर्ज हैं।

पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गिरोह की कथित सरगना आरती कुमारी, मालती देवी, उमंग कुमार, अनिल कुमार, संविदा पोस्टमैन शोभनाथ और जितेंद्र कुमार कन्नौजिया शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की 11 पासबुक, सात चेकबुक, तीन डेबिट कार्ड, छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

फर्जी पते पर खुलवाए जाते थे बैंक खाते

पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके आधार कार्ड में सिगरा क्षेत्र का फर्जी पता दर्ज कराता था। इसके बाद उसी पते पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

जांच के दौरान पुलिस 103 संदिग्ध म्यूल खातों की पड़ताल कर रही थी। इसी दौरान एक बैंक खाते में छह लाख रुपये के लेनदेन का पता चला। जब पुलिस खाताधारक महिला के बताए गए पते पर पहुंची, तो वहां ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला। यहीं से पूरे गिरोह के नेटवर्क का खुलासा होना शुरू हुआ।

संविदा पोस्टमैन निभा रहा था अहम भूमिका

पुलिस के अनुसार इस गिरोह में संविदा पोस्टमैन शोभनाथ की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। बैंकों की ओर से खाताधारकों के लिए भेजी जाने वाली चेकबुक, डेबिट कार्ड और अन्य बैंक किट वह सीधे गिरोह की सरगना आरती कुमारी तक पहुंचाता था। इसके बाद इन बैंक किटों को कूरियर के माध्यम से साइबर ठगों तक भेज दिया जाता था, जिससे वे देश के विभिन्न हिस्सों में ठगी की वारदातों को अंजाम दे सकें।

पुलिस का दावा है कि आरती कुमारी करीब पांच-पांच हजार रुपये देकर म्यूल खाते खरीदती थी और अब तक 63 बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा चुकी है। वहीं मालती देवी के खाते में ठगी की रकम जमा होती थी, जबकि अनिल कुमार और उमंग कुमार खाते खुलवाने तथा अन्य गतिविधियों में सहयोग करते थे।

कई राज्यों में फैला था गिरोह का नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी जितेंद्र कुमार कन्नौजिया आधार कार्ड में कूटरचित तरीके से बदलाव करने का काम करता था। उसके खिलाफ पहले भी जौनपुर में साइबर अपराध का मामला दर्ज है। वहीं गिरोह की सरगना आरती कुमारी के खिलाफ बलिया, गाजीपुर, जौनपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों में शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है।

डीसीपी क्राइम नीतू ने बताया कि 'साइ वज्र अभियान' के तहत चल रही जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस अब 103 संदिग्ध बैंक खातों और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है और आगे की जांच के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।

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