ग्रीनलैंड विवाद को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की हाईलेवल बैठक हुई। सुरक्षा और रणनीतिक मसलों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं निकला। सभी पक्षों ने सहयोग बढ़ाने और एक कार्य योजना बनाने पर सहमति जताई।
America: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच जारी विवाद अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस में हुई हाईलेवल बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा ग्रीनलैंड का भविष्य, क्षेत्रीय सुरक्षा और ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के बयान थे।
बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका, लेकिन सभी पक्षों ने भविष्य के लिए एक कार्य योजना पर सहमति जताई। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने अमेरिका के साथ सहयोग के महत्व को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा।
ग्रीनलैंड का रुख साफ
बैठक के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी क्षेत्र में शामिल होगा। ग्रीनलैंड ने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं और सभी पक्षों के हित में सही संतुलित निर्णय लेने की आवश्यकता है।

मोट्ज़फेल्ट ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा। उन्होंने अमेरिका और डेनमार्क से कहा कि ग्रीनलैंड के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।
हाईलेवल वर्किंग ग्रुप का गठन
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने बताया कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने मिलकर एक हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने का निर्णय लिया है। यह समूह ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़े रणनीतिक मसलों और साझा समाधान पर काम करेगा।
रासमुसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है और इस बिंदु पर तीनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। रासमुसेन के अनुसार फिलहाल चीन या रूस से कोई तत्काल खतरा नहीं है, जिसे डेनमार्क संभाल न सके।
ट्रंप ने दिया विवादित बयान
बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य कार्यक्रम में बयान देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। उन्होंने दावा किया कि यदि रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करें तो डेनमार्क कुछ खास नहीं कर पाएगा, जबकि अमेरिका की भूमिका निर्णायक होगी।
ट्रंप ने कहा कि वे इस भरोसे पर नहीं रह सकते कि डेनमार्क खुद अपनी सुरक्षा कर सके। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका और डेनमार्क के रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन ग्रीनलैंड की स्थिति पर अमेरिका की निगरानी जरूरी है।











