विक्रमशिला सेतु पर अंतिम बेली ब्रिज भी हटाया जा रहा, 65 सदस्यीय टीम जुटी; रेलिंग और सड़क कटिंग से कम किया जा रहा पुल का भार

भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर अंतिम 170 फीट बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू है। 65 सदस्यीय टीम लगी है, रेलिंग, सड़क और कमजोर स्लैब की कटिंग भी जारी है।
विक्रमशिला सेतु पर अंतिम बेली ब्रिज भी हटाया जा रहा, 65 सदस्यीय टीम जुटी; रेलिंग और सड़क कटिंग से कम किया जा रहा पुल का भार
Photo Credit / Attribution: Google

भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी पुनर्स्थापन की दिशा में अब काम एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। पुल पर बनाए गए चार बेली ब्रिज में से तीन को पहले ही हटाया जा चुका है और अब क्षतिग्रस्त हिस्से पर बने अंतिम 170 फीट लंबे बेली ब्रिज को भी खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही पुल के कमजोर तीन स्लैब की कटिंग का काम भी शुरू हो गया है। अंतिम बेली ब्रिज को हटाने के लिए 65 सदस्यीय टीम को लगाया गया है। यह वही बेली ब्रिज है जिसे सबसे अंत में इसलिए हटाया गया, ताकि पुनर्स्थापन कार्य के दौरान क्रेन, कटिंग मशीन, निर्माण सामग्री और दूसरी भारी मशीनरी को पुल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक ले जाने में परेशानी न हो।

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाया गया यह 170 फीट लंबा बेली ब्रिज बाकी बेली ब्रिज की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक जटिल है। इसमें ऊपर और नीचे दोनों तरफ डबल पैनल लगे हुए हैं। इसी वजह से इसे केवल ऊपर से खोलकर हटाना संभव नहीं है, बल्कि नीचे के हिस्से से भी पैनल खोलने पड़ेंगे। यही कारण है कि इसके डिस्मेंटलिंग में सामान्य बेली ब्रिज की तुलना में अधिक समय लग रहा है। बीआरओ के अधिकारियों के अनुसार अंतिम बेली ब्रिज को पूरी तरह खोलकर उसका सामान हटाने में करीब पांच से छह दिन लग सकते हैं।

चार बेली ब्रिज में से पहले 60 फीट वाला बेली ब्रिज हटाया गया था। इसके बाद 100 फीट और 90 फीट लंबे बेली ब्रिज को भी चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। 90 फीट लंबे तीसरे बेली ब्रिज को हटाने के बाद अब पूरा फोकस क्षतिग्रस्त हिस्से पर बने सबसे बड़े और आखिरी 170 फीट के बेली ब्रिज को हटाने पर है। अधिकारियों ने इसे सबसे अंत में हटाने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि अगर चारों बेली ब्रिज को एक साथ हटा दिया जाता तो मरम्मत के लिए इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी और निर्माण सामग्री को कार्यस्थल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता।

अब निर्माण सामग्री को नवगछिया की ओर पहुंचा दिया गया है। इसके बाद अंतिम बेली ब्रिज को खोलने का काम शुरू किया गया है। 65 सदस्यीय टीम इस पूरी प्रक्रिया में लगी हुई है। टीम में तकनीकी कर्मचारियों के साथ श्रमिक भी शामिल हैं। इससे पहले बेली ब्रिज हटाने के अभियान में 25 कैजुअल पेड लेबर समेत 65 सदस्यीय दल के काम करने की जानकारी सामने आई थी। टीम को चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग हिस्सों को हटाने और पुल के मूल ढांचे को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

बेली ब्रिज हटाने के साथ ही पुल पर अतिरिक्त भार कम करने के लिए रेलिंग और सड़क की ऊपरी परत को भी काटकर हटाया जा रहा है। पुल के करीब 20 से 25 फीट हिस्से की रेलिंग काटी गई है और सड़क पर जमा बिटुमिनस की पुरानी परतों को भी हटाने का काम चल रहा है। कई वर्षों में सड़क पर बार-बार अलकतरा डालने के कारण इसकी कई परतें बन गई थीं। इससे पुल पर अतिरिक्त डेड लोड बढ़ गया था। इन परतों और रेलिंग को हटाकर पुल का भार कम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आगे होने वाले भारी तकनीकी काम के दौरान मूल संरचना पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

अधिकारियों के अनुसार रेलिंग और सड़क कटिंग का काम पूरा होने में करीब एक सप्ताह लग सकता है। इसके साथ ही कमजोर तीन स्लैब की कटिंग भी की जा रही है। इन स्लैब को हटाना स्थायी पुनर्स्थापन की अगली प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है। स्लैब की कटिंग के बाद पुल के मूल स्ट्रक्चर की विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी। इस जांच के आधार पर आगे के हिस्सों को काटने और नए स्ट्रक्चर को स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

स्लैब और कमजोर हिस्सों की कटिंग पूरी होने के बाद हेली कटर की मदद से चार स्पैन को काटने की योजना है। इसके बाद पुल में नई बेयरिंग लगाई जाएगी। बेयरिंग की स्थापना के बाद स्टील गर्डर को सेट किया जाएगा। यह प्रक्रिया पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को स्थायी रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। स्टील गर्डर सेट होने के बाद उसके ऊपर नए डेक स्लैब की ढलाई की जाएगी। डेक स्लैब को पूरी तरह सेट होने में करीब 28 दिन लगने की संभावना बताई गई है।

इस पूरे काम का उद्देश्य केवल क्षतिग्रस्त हिस्से को अस्थायी रूप से संभालना नहीं, बल्कि विक्रमशिला सेतु को स्थायी रूप से मजबूत करना है। इसी वजह से बेली ब्रिज जैसी अस्थायी संरचनाओं को हटाकर मूल पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का तकनीकी परीक्षण और फिर नए स्टील गर्डर तथा डेक स्लैब के जरिए पुनर्निर्माण किया जा रहा है। काम के दौरान पुल के बाकी हिस्से पर भी किसी तरह का अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसका ध्यान रखा जा रहा है।

विक्रमशिला सेतु पर चल रहे इस बड़े पुनर्स्थापन अभियान के कारण पुल को वाहनों के आवागमन के लिए बंद रखा गया है। पुल बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों और जल परिवहन का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से यात्रियों और वाहनों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। पुल के बंद रहने की अवधि में गंगा के रास्ते फेरी और अन्य जल परिवहन सेवाओं को भी उपयोग में लाया जा रहा है।

विक्रमशिला सेतु को पूर्वी बिहार की महत्वपूर्ण परिवहन कड़ी माना जाता है। यह भागलपुर को नवगछिया और उत्तर बिहार के कई इलाकों से जोड़ता है। पुल पर आवागमन बंद होने का असर रोजाना सफर करने वाले लोगों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों, कारोबारियों, मरीजों और दूसरे जिलों में जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ रहा है। इसलिए पुल के स्थायी पुनर्स्थापन का काम जितनी तेजी से पूरा होगा, उतनी ही जल्दी सामान्य यातायात बहाल होने की उम्मीद बढ़ेगी।

मरम्मत अभियान को गति देने के लिए तीन सहायक अभियंताओं की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। एनएच और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों को भागलपुर भेजा गया है। प्रतिनियुक्त किए गए अभियंताओं में आरसीडी अवर प्रमंडल कोढ़ा के रतन कुमार, अवर प्रमंडल धमदाहा के गौरव कुमार और एनएच मधेपुरा डिवीजन के सहरसा अवर प्रमंडल के तुषार कुमार शामिल हैं। पांच अक्टूबर को जारी अधिसूचना में तीनों को भागलपुर एनएच कार्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया था और उनकी प्रतिनियुक्ति पुनर्स्थापन कार्य पूरा होने तक रहने की बात कही गई है।

पुनर्स्थापन कार्य में पहले से पुलों पर काम कर चुके अनुभवी अभियंताओं को भी जोड़ा गया है। गुवाहाटी और पटना के सेतु पर काम कर चुके अभियंताओं को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य तकनीकी स्तर पर काम की निगरानी मजबूत करना और अलग-अलग चरणों में आने वाली चुनौतियों का तेजी से समाधान करना है। इतने बड़े पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा तैयार करने में केवल निर्माण सामग्री और मशीनरी ही नहीं, बल्कि अनुभवी इंजीनियरिंग निगरानी भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अंतिम बेली ब्रिज को हटाने के दौरान भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। क्योंकि यह पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बना सबसे लंबा बेली ब्रिज है और इसमें ऊपर-नीचे डबल पैनल लगे हैं, इसलिए इसके हिस्सों को क्रमवार तरीके से खोलना होगा। नीचे से पैनल खोलने की प्रक्रिया भी साथ चलेगी। किसी हिस्से को अचानक हटाने से पुल के मूल ढांचे पर अनावश्यक दबाव न पड़े, इसके लिए पूरी प्रक्रिया तकनीकी निगरानी में की जा रही है।

इस बीच पुल से रेलिंग और सड़क की परत हटाने का काम भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आगे क्रेन, पोकलेन, हाइवा और दूसरी भारी मशीनों की आवाजाही होनी है। पुराने सड़क निर्माण की अतिरिक्त परतें और रेलिंग का भार कम होने से कार्यस्थल पर मशीनों की आवाजाही के दौरान पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर अतिरिक्त दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। पहले की रिपोर्टों में अधिकारियों ने अनुमान जताया था कि इस तरह करीब 30 से 35 टन तक डेड लोड कम किया जा सकता है।

अब आने वाले दिनों में अंतिम बेली ब्रिज को पूरी तरह हटाना, कमजोर स्लैब की कटिंग, स्ट्रक्चर की जांच और चार स्पैन की कटिंग जैसे काम महत्वपूर्ण होंगे। इसके बाद बेयरिंग और स्टील गर्डर लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। फिर डेक स्लैब की ढलाई और उसके सेट होने की अवधि आएगी। यानी अभी पुल की मरम्मत का काम कई तकनीकी चरणों से होकर गुजरना है। हर चरण के पूरा होने के बाद अगले चरण की शुरुआत होगी, ताकि क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित तरीके से स्थायी रूप से बहाल किया जा सके।

बीआरओ के अधीक्षण अभियंता विपिन कुमार चंद के अनुसार अंतिम बेली ब्रिज को खोलने और उसका सामान हटाने में पांच से छह दिन लग सकते हैं। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से इस कार्य के लिए बीआरओ को 4.5 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेली ब्रिज को हटाने और संबंधित तकनीकी कार्य भी पुनर्स्थापन अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

फिलहाल विक्रमशिला सेतु पर मशीनों और कर्मचारियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है। एक तरफ अंतिम बेली ब्रिज को खोलने का काम चल रहा है तो दूसरी ओर कमजोर स्लैब और सड़क की परत काटकर हटाई जा रही है। रेलिंग हटाने के साथ पुल का भार कम करने की प्रक्रिया भी जारी है। इन शुरुआती कामों के पूरा होने के बाद ही पुल के मूल क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्थायी संरचनात्मक काम तेजी से आगे बढ़ेगा।

भागलपुर के लोगों की नजर अब इस बात पर है कि बेली ब्रिज हटाने के बाद स्लैब और स्पैन की कटिंग कितनी तेजी से पूरी होती है और नए स्टील गर्डर व डेक स्लैब की स्थापना कब तक शुरू होती है। फिलहाल सबसे बड़ा तकनीकी चरण अंतिम 170 फीट बेली ब्रिज को सुरक्षित तरीके से हटाना है। 65 सदस्यीय टीम इसी काम में जुटी है और इसके पूरा होने के बाद विक्रमशिला सेतु के स्थायी पुनर्स्थापन की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

Leave a comment