संत प्रेमानंद गुरुवार सुबह अचानक वृंदावन के श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे। उनके आगमन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए जुट गए। उन्होंने पूजा और सत्संग के बाद अपने गुरु गौरांगी शरण से आशीर्वाद लिया।
वृंदावन: संत प्रेमानंद गुरुवार सुबह अचानक श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे तो आश्रम के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे पहुंचे संत प्रेमानंद ने आश्रम में पूजा और सत्संग किया। इसके बाद वह अपने गुरु गौरांगी शरण के आश्रम पहुंचे, जहां ध्यान लगाकर उनका आशीर्वाद लिया और फिर नए यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए।
अचानक श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे संत प्रेमानंद
वृंदावन में गुरुवार की सुबह उस समय हलचल बढ़ गई, जब संत प्रेमानंद अचानक श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पहुंचे। लंबे समय बाद उनके आश्रम आने की सूचना मिलते ही उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं के बीच उत्साह बढ़ गया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में भक्त आश्रम के बाहर उनके दर्शन के लिए पहुंच गए।

जानकारी के अनुसार, संत प्रेमानंद सुबह करीब साढ़े पांच बजे श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे थे। उन्होंने आश्रम में करीब 15 मिनट बिताए। इस दौरान उन्होंने पूजा और सत्संग किया। उनके अचानक पहुंचने से आश्रम के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई और काफी देर तक लोग उनके दर्शन का इंतजार करते रहे।
संत प्रेमानंद का यह दौरा करीब आधे घंटे का रहा। श्रीराधा केलिकुंज में कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने अपने गुरु गौरांगी शरण के आश्रम की ओर रुख किया।
गुरु गौरांगी शरण से लिया आशीर्वाद
श्रीराधा केलिकुंज में पूजा और सत्संग पूरा करने के बाद संत प्रेमानंद अपने गुरु गौरांगी शरण के आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने करीब 10 मिनट तक ध्यान लगाया और अपने गुरु का आशीर्वाद लिया।
गुरु के आश्रम में समय बिताने के बाद संत प्रेमानंद सुबह करीब छह बजे यमुना पार जहांगीरपुर गांव में स्थित नए आश्रम यमुना विहार कुंज के लिए रवाना हो गए। उनके इस कार्यक्रम की जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं थी, इसलिए अचानक उनके पहुंचने से आश्रम में मौजूद लोगों और अनुयायियों के बीच काफी उत्सुकता देखने को मिली।
शिष्य की मौत के बाद फैल रही थीं कई तरह की सूचनाएं
संत प्रेमानंद के अचानक श्रीराधा केलिकुंज पहुंचने की पृष्ठभूमि में आश्रम से जुड़ी हालिया घटनाओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिष्य रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या के बाद श्रीराधा केलिकुंज आश्रम में अपने बच्चों के बारे में जानकारी लेने और उन्हें तलाशने के लिए कुछ लोगों की भीड़ पहुंचने लगी थी।
इस दौरान आश्रम से जुड़े लोगों और वहां आने वाले लोगों के बीच व्यवहार को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके साथ ही संत प्रेमानंद के आश्रम आने और वहां की स्थिति को लेकर अलग-अलग तरह की सूचनाएं भी लोगों के बीच फैल रही थीं।
ऐसे समय में संत प्रेमानंद का स्वयं श्रीराधा केलिकुंज पहुंचना उनके अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण रहा। उनके दौरे से आश्रम से जुड़ी चर्चाओं और भ्रामक सूचनाओं के बीच स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद भी बनी।
भक्तों में दिखा उत्साह
संत प्रेमानंद के अचानक आश्रम पहुंचने की सूचना सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से तेजी से फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीराधा केलिकुंज के बाहर पहुंचने लगे। भक्तों में संत के दर्शन को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
कई लोग काफी समय तक आश्रम के बाहर मौजूद रहे। संत प्रेमानंद का दौरा भले ही कम समय का रहा, लेकिन उनके अनुयायियों के बीच इसकी चर्चा काफी तेज हो गई।
श्रीराधा केलिकुंज में पूजा और सत्संग के बाद गुरु से आशीर्वाद लेने और फिर यमुना विहार कुंज के लिए रवाना होने के साथ उनका यह संक्षिप्त दौरा समाप्त हुआ। उनके अचानक वृंदावन आने से सुबह से ही आश्रम और आसपास का क्षेत्र भक्तों की मौजूदगी से भरा रहा।











