टोंटी खोलते ही निकलता है नाले जैसा गंदा पानी, वार्ड-33 के लोग बदहाल खुले नाले, टूटी नालियां और आवारा कुत्तों से बढ़ी परेशानी

वार्ड-33 में लोगों को गंदे पेयजल, खुले नालों, टूटी नालियों और आवारा कुत्तों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने जल्द समाधान की मांग की है।
टोंटी खोलते ही निकलता है नाले जैसा गंदा पानी, वार्ड-33 के लोग बदहाल खुले नाले, टूटी नालियां और आवारा कुत्तों से बढ़ी परेशानी
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वार्ड-33: शहर के वार्ड-33 में रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी लगातार मुश्किल होती जा रही है। यहां पेयजल, सफाई और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं गंभीर संकट का रूप ले चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों की टोंटी खोलते ही साफ पानी के बजाय नाले जैसा बदबूदार और गंदा पानी निकलता है। कई बार पानी का रंग मटमैला और उसमें गंदगी के कण भी दिखाई देते हैं, जिससे लोग उसे पीने या घरेलू उपयोग में लाने से डरते हैं।

निवासियों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें पीने के लिए बाजार से पानी खरीदना पड़ता है या फिर पानी को कई बार छानने और उबालने के बाद इस्तेमाल करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंदे पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में पेट संबंधी बीमारियों, त्वचा संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं। नागरिकों ने प्रशासन से पानी की गुणवत्ता की जांच कराने और पाइपलाइन की मरम्मत की मांग की है।

वार्ड की दूसरी बड़ी समस्या खुले नाले हैं। कई गलियों में नालों पर ढक्कन नहीं हैं, जिससे उनमें लगातार गंदा पानी जमा रहता है। बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि नाले उफनने लगते हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है। इससे पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसके अलावा कई स्थानों पर नालियां टूटी हुई हैं। जल निकासी बाधित होने के कारण पानी लंबे समय तक सड़कों पर जमा रहता है। इससे बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से नालियों में कचरा जमा रहता है, जिससे जलभराव की समस्या और गंभीर हो जाती है।

वार्ड-33 के लोगों की एक और बड़ी शिकायत आवारा कुत्तों के बढ़ते झुंड को लेकर है। सुबह और शाम के समय कई गलियों में कुत्तों के समूह घूमते रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ये राहगीरों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों को अकेले बाहर भेजने में डर लगता है।

क्षेत्र के दुकानदारों का कहना है कि सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण ग्राहकों को भी परेशानी होती है। खुले नालों से उठने वाली बदबू और आसपास फैली गंदगी का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। लोगों का मानना है कि यदि नियमित सफाई, नालियों की मरम्मत और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था की जाए तो स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्याओं का केवल अस्थायी समाधान किया जाता है। कुछ दिनों तक सफाई अभियान चलाने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों ने मांग की है कि पेयजल पाइपलाइन की तकनीकी जांच कराई जाए, क्षतिग्रस्त नालियों का पुनर्निर्माण किया जाए, खुले नालों को ढका जाए और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

नगर प्रशासन से क्षेत्रवासियों ने जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। यदि समय रहते इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो बरसात के मौसम में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

फिलहाल वार्ड-33 के हजारों निवासी गंदे पेयजल, टूटी नालियों, खुले नालों और आवारा कुत्तों जैसी समस्याओं के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को बुनियादी नागरिक सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध हो सकें।

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