पानी में दुर्गंध, हवा में बदबू जिंदगी नरक बनी वार्ड-63 में आबादी के बीच कूड़ा डंपिंग सेंटर लोगों का जीना हुआ मुश्किल

वार्ड-63 में आबादी के बीच बने कूड़ा डंपिंग सेंटर से दुर्गंध और गंदगी फैल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदबू और प्रदूषण से उनका जीवन प्रभावित हो गया है।
पानी में दुर्गंध, हवा में बदबू जिंदगी नरक बनी वार्ड-63 में आबादी के बीच कूड़ा डंपिंग सेंटर लोगों का जीना हुआ मुश्किल
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वार्ड-63 के लोगों का कहना है कि उनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी किसी सजा से कम नहीं रह गई है। आबादी के बीच बनाए गए कूड़ा डंपिंग सेंटर से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी ने पूरे इलाके का माहौल खराब कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सुबह से लेकर देर रात तक बदबू इतनी तेज रहती है कि घरों में रहना तक मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि हवा में फैली सड़ांध और दूषित वातावरण के कारण उनका जीवन नरक जैसा हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कूड़ा डंपिंग सेंटर के आसपास रहने वाले परिवार सबसे अधिक प्रभावित हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कूड़े से निकलने वाली दुर्गंध पूरे इलाके में फैल जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। कई परिवारों का कहना है कि वे खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने को मजबूर हैं, फिर भी बदबू से राहत नहीं मिलती।

निवासियों का आरोप है कि कूड़े से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलता है, जिससे जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि पानी में भी दुर्गंध महसूस होने लगी है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ गई है और बच्चे तथा बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

इलाके के लोगों का कहना है कि कूड़ा डंपिंग सेंटर को आबादी से दूर स्थापित किया जाना चाहिए था, लेकिन इसे रिहायशी क्षेत्र के बीच बना दिया गया। परिणामस्वरूप हजारों लोगों को रोजाना गंदगी और प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उनकी शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।

कई निवासियों ने बताया कि क्षेत्र में मच्छरों और आवारा पशुओं की संख्या भी बढ़ गई है। कूड़े के ढेरों के कारण संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोगों को डर है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्वास्थ्य संकट और गंभीर हो सकता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नगर निकाय को आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली अपनानी चाहिए। कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण, नियमित सफाई और दुर्गंध नियंत्रण के उपाय किए जाने चाहिए ताकि आसपास रहने वाले लोगों को राहत मिल सके। उनका मानना है कि शहर के विकास के साथ पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि डंपिंग सेंटर को आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे दुर्गंध और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हो सके। लोगों का कहना है कि वे वर्षों से समस्या झेल रहे हैं और अब उन्हें स्थायी समाधान चाहिए।

फिलहाल वार्ड-63 के हजारों निवासी गंदगी, बदबू और प्रदूषण के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक उनकी परेशानी कम होने वाली नहीं है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही उन्हें इस समस्या से राहत मिलेगी।

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