देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मुंबई से हिमाचल प्रदेश और ओडिशा से जम्मू-कश्मीर तक भारी बारिश के कारण भूस्खलन, जलभराव और सड़कें बंद होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून का असर लगातार गंभीर होता जा रहा है। भारी बारिश, भूस्खलन, जलभराव और बाढ़ जैसी घटनाओं ने मुंबई से लेकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, उत्तराखंड और राजस्थान तक जनजीवन को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर सड़कें बंद हैं, बिजली और पेयजल सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि भूस्खलन की घटनाओं में लोगों की जान भी गई है। मौसम विभाग की ओर से 18 अगस्त तक विभिन्न क्षेत्रों के लिए बारिश और खराब मौसम को लेकर चेतावनियां जारी की गई हैं।
मुंबई में भूस्खलन से सात लोगों की मौत
मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के बड़ा हादसा हुआ। गौसिया चॉल क्षेत्र में पहाड़ी का एक हिस्सा खिसकने के बाद भारी मलबा नीचे स्थित तीन मकानों पर गिर गया। हादसा सुबह करीब 3.45 बजे हुआ, जब अधिकांश लोग घरों में मौजूद थे। घटना के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में तीन बच्चों समेत छह लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। कुल सात लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए।
स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्य चलाया। मुंबई की मेयर रीतू तावड़े ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।
हिमाचल प्रदेश में 313 सड़कें बंद
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। विभिन्न इलाकों में भूस्खलन और मलबा आने से 313 सड़कें बंद हो गई हैं। इससे दूरदराज के क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हुआ है और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी जिले में सबसे अधिक 117 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा चंबा में 74, कुल्लू में 60, शिमला में 36 और सिरमौर में 13 सड़कें प्रभावित हैं। बारिश का असर केवल सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं है। करीब 65 पेयजल योजनाएं और 112 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून से अब तक बारिश और मौसम संबंधी आपदाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं से राज्य को 911 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। लगातार बारिश के बीच भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
18 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश समेत पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक सड़क बंद होने और स्थानीय स्तर पर यातायात बाधित होने का जोखिम बना रह सकता है। पहले से प्रभावित इलाकों में प्रशासन की चुनौती और बढ़ सकती है, क्योंकि लगातार बारिश से बचाव कार्य, सड़क मरम्मत और बिजली-पानी की सेवाओं को बहाल करने में मुश्किलें आती हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
ओडिशा में रेड और ऑरेंज अलर्ट
ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बालासोर और भद्रक जिलों के लिए भारी से अत्यधिक बारिश की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने की आशंका जताई गई है।जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, अंगुल, क्योंझर, मयूरभंज और ढेंकनाल सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, आंधी और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में भी असर
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, कठुआ और पुलवामा में भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी। कई मार्ग प्रभावित हुए और कुछ स्थानों पर यातायात रोकना पड़ा। उत्तराखंड में भी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए मद्महेश्वर यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। राजस्थान में मानसून सक्रिय रहने से कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई।
चित्तौड़गढ़ के बासी में 227 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि उदयपुर के उदय सागर बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद गेट खोले गए। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की मुकुंदरा सुरंग में पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। जयपुर समेत कई शहरों में जलभराव की समस्या भी सामने आई।












