बॉलीवुड की कॉमेडी फ्रेंचाइजी Welcome एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटी है अपने तीसरे अध्याय Welcome To The Jungle के साथ। निर्देशक अहमद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने विशाल बजट और रिकॉर्ड तोड़ स्टारकास्ट के कारण पहले ही सुर्खियों में रही।
- मूवी रिव्यू: वेलकम टू द जंगल
- ऐक्टर: अक्षय कुमार,सुनील शेट्टी,परेश रावल,जैकी श्रॉफ,रवीना टंडन,जैकलीन फर्नांडिस,दिशा पाटनी
- श्रेणी: Hindi, Comedy, Adventure
- डायरेक्टर: अहमद खान
- अवधि: 2 Hrs 45 Min
एंटरटेनमेंट न्यूज़: किसी फिल्म में जब 30–35 बड़े कलाकार एक साथ हों, तो सबसे पहले यही सवाल उठता है कि इतनी बड़ी स्टारकास्ट के बीच कहानी आखिर कैसे संभाली गई होगी और क्या वाकई सबका स्क्रीन टाइम बराबर तरीके से इस्तेमाल हुआ है या फिर यह सिर्फ एक भव्य भीड़ का तमाशा बनकर रह गई है। हम भी ‘वेलकम टू द जंगल’ देखने यही सोचकर पहुंचे थे। लेकिन मानना पड़ेगा कि इतनी भारी-भरकम स्टारकास्ट होने के बावजूद फिल्म अपनी बेतुकी, हल्की-फुल्की और पूरी तरह अफरा-तफरी से भरी कॉमेडी के दम पर कई जगहों पर दर्शकों को हंसा देती है।
हालांकि इसे देखने के लिए एक शर्त बिल्कुल जरूरी है कि आप अपना दिमाग घर पर रखकर आएं, क्योंकि लॉजिक की यहां ज्यादा गुंजाइश नहीं है। अहमद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म सुपरहिट ‘वेलकम फ्रेंचाइजी’ की तीसरी कड़ी है। साल 2007 में आई पहली फिल्म ‘वेलकम’ आज भी एक कल्ट कॉमेडी के रूप में याद की जाती है।
स्टारकास्ट का ‘महा-मेला’
Welcome To The Jungle की सबसे बड़ी पहचान इसकी भारी-भरकम कास्ट है। फिल्म में अक्षय कुमार, परेश रावल, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, लारा दत्ता, राजपाल यादव, उर्वशी रौतेला, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा, आफताब शिवदासानी, मुकेश तिवारी, किरण कुमार और कई अन्य कलाकार शामिल हैं।
इतनी बड़ी स्टारकास्ट को एक ही फिल्म में संभालना किसी भी निर्देशक के लिए चुनौतीपूर्ण काम होता है। फिल्म का बजट लगभग ₹300 करोड़ बताया जा रहा है, जिससे इसकी ग्रैंड स्केल प्रोडक्शन वैल्यू और भी स्पष्ट हो जाती है।
कहानी: कॉमेडी के पीछे एक अजीब मिशन
फिल्म की कहानी एक भ्रष्ट उद्योगपति से शुरू होती है, जो टैक्स चोरी और राजनीतिक दबाव से बचने के लिए जानबूझकर एक ऐसी फिल्म बनवाना चाहता है जो सुपर फ्लॉप साबित हो। इसी योजना के तहत वह सबसे खराब निर्देशक, टेक्नीशियन और फ्लॉप एक्टर्स को एक साथ लाता है। इस मिशन के लिए एक समय का सुपरस्टार (अक्षय कुमार) को मुख्य भूमिका में कास्ट किया जाता है, जो अब अपने करियर के कठिन दौर से गुजर रहा है। वहीं, फिल्म में कई अलग-अलग गैंगस्टर, पुराने किरदारों की याद दिलाने वाले पात्र और हास्य से भरे कलाकार कहानी को और भी अराजक बना देते हैं।
कहानी आगे चलकर भारत-पाक सीमा के पास स्थित एक गांव तक पहुंचती है, जहां फिल्म की शूटिंग शुरू होती है। लेकिन असली मोड़ तब आता है जब गांव वाले फिल्म यूनिट को असली आर्मी समझ लेते हैं और उनसे उम्मीद करते हैं कि वे उन्हें एक खतरनाक डाकू से बचाएंगे।
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निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक अहमद खान फिल्म को एक भव्य और मनोरंजक रूप देने की कोशिश करते हैं, लेकिन शुरुआती हिस्से में कहानी थोड़ी धीमी और बिखरी हुई लगती है। इंटरवल के बाद फिल्म रफ्तार पकड़ती है और असली कॉमेडी का ‘भसड़’ शुरू होता है। फिल्म का स्क्रीनप्ले पूरी तरह स्लैपस्टिक कॉमेडी पर आधारित है, जिसमें लॉजिक से ज्यादा एंटरटेनमेंट को प्राथमिकता दी गई है। कई जगह कहानी बेतुकी जरूर लगती है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी पहचान भी बन जाती है।
फिल्म का हास्य पक्ष इसकी ताकत है। डायलॉग्स और सिचुएशनल कॉमेडी कई जगह दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं। फिल्म बॉलीवुड इंडस्ट्री, स्टार सिस्टम और फिल्ममेकिंग पर हल्का-फुल्का व्यंग्य भी करती है। कुछ दृश्य जैसे सेट पर गाना शूट होने के बाद यह सवाल उठना कि उसे कहानी में कहां फिट किया जाए—दर्शकों के लिए खास तौर पर मजेदार बनते हैं।
अभिनय: हर किरदार की अपनी झलक
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-स्टार कास्ट है। अक्षय कुमार अपनी मजबूत कॉमिक टाइमिंग से फिल्म को संभालते हैं और कहानी का केंद्र बने रहते हैं। परेश रावल और राजपाल यादव अपने पारंपरिक हास्य अंदाज से दर्शकों को खूब हंसाते हैं। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी की जोड़ी स्क्रीन पर अच्छा तालमेल दिखाती है। जैकी श्रॉफ अपने दमदार लुक और गंभीर स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं, लारा दत्ता अपने किरदार में सख्त ट्रेनर की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाती हैं।
जैकलीन फर्नांडिस और दिशा पाटनी फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं। जॉनी लीवर और कीकू शारदा जैसे अनुभवी कॉमेडियन छोटे-छोटे सीन में भी दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं।
फिल्म की खासियत और कमज़ोरियां
फिल्म का संगीत औसत है, हालांकि ‘ऊंचा लंबा कद’ का रीक्रिएटेड वर्जन कुछ हद तक प्रभाव छोड़ता है। सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन बड़े बजट की झलक दिखाते हैं, लेकिन एडिटिंग में थोड़ी कसावट की कमी महसूस होती है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टार पावर और नॉन-स्टॉप एंटरटेनमेंट है। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो लॉजिक से ज्यादा हंसी और हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं।
हालांकि, कमजोर स्क्रीनप्ले और असंतुलित कहानी इसकी बड़ी कमी है। कई जगह फिल्म बिखरी हुई महसूस होती है और सभी किरदारों को समान रूप से स्क्रीन स्पेस देना चुनौतीपूर्ण साबित होता है।







