पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में उलझन में दिखाई दे रहे हैं। एक ओर अमेरिका सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजकर वार्ता की राह तलाश रहा है।
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump एक तरफ ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति अभी भी स्पष्ट नहीं दिखती। हालिया घटनाक्रमों से यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन दोहरी नीति पर काम कर रहा है—एक ओर सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की दिशा में भी पहल जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर रोक, मिसाइल क्षमताओं में कमी और क्षेत्रीय गतिविधियों को सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अपने हितों के खिलाफ बताते हुए पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं।
ट्रंप प्रशासन की उलझन
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने युद्ध पर नियंत्रण पाने के लिए दो समानांतर रणनीति अपनाई है। पेंटागन ने क्षेत्र में जमीनी सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया है, जिसके तहत जल्द ही लगभग 2,000 पैराट्रूपर्स फारस की खाड़ी स्थित खार्ग के नजदीक पहुंचेंगे। वहीं अमेरिकी वार्ताकारों ने ईरान को नया 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव सौंपा। अगले ही दिन व्हाइट हाउस ने चेतावनी जारी की कि अगर ईरान इस प्रस्ताव को अस्वीकार करता है, तो उस पर पहले से भी कठोर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का यह दोहरा दृष्टिकोण संकेत देता है कि अमेरिकी नेतृत्व अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि युद्ध को तेज करना चाहिए या शांति वार्ता के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे बड़ी चुनौती

युद्ध शुरू हुए तीन सप्ताह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अमेरिका अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को कैसे सुरक्षित किया जाए। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस के निर्यात का मार्ग है। ईरान के हमलों के कारण वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्टीफन हैडली ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में रहता है, तो ट्रंप के लिए विजयी होने का दावा करना कठिन होगा। उन्होंने यह भी चेताया कि सहयोगी देशों से पर्याप्त परामर्श न करने के कारण अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में पीछे रह सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस में मतभेद
अमेरिका की आंतरिक राजनीति भी इस युद्ध को लेकर जटिल हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद गहरे हुए हैं। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने विश्वास जताया कि सैन्य अभियान जल्द ही समाप्त हो सकता है, लेकिन उनके कुछ सहयोगी इससे असहमत हैं। रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने जमीनी सैनिकों की तैनाती का विरोध किया और कहा कि वह ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने का समर्थन नहीं करेंगी। हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन माइक रोजर्स ने भी पेंटागन पर पर्याप्त जानकारी न देने का आरोप लगाया।
अमेरिका द्वारा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों की तैनाती को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। संभावित योजना में खार्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करना शामिल हो सकता है, जो ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में नियंत्रण हासिल करने से अमेरिका को सैन्य और आर्थिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे जोखिम भी काफी बढ़ जाएगा।









