पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक अजीत माईती को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पिंगला के पूर्व विधायक और वर्तमान में पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद के सह-सभाधिपति अजीत माईती पर 15 लाख रुपये लेने और बाद में रकम वापस नहीं करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शुक्रवार तड़के उनके घर पर छापेमारी की और वहीं से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें डेबरा थाने ले जाया गया। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में पिंगला थाने में 23 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता भाजपा नेता गोविंद दास हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2016 में अजीत माईती ने उन्हें पार्टी में ब्लॉक अध्यक्ष का पद दिलाने का भरोसा दिया था। इसी आश्वासन के बदले उनसे 15 लाख रुपये लिए गए। गोविंद दास का कहना है कि बाद में उन्हें वह पद नहीं मिला और जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर उन्हें परेशान किया गया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की।
शिकायत के अनुसार, मामला करीब दस साल पुराना है। उस समय अजीत माईती स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय थे। आरोप है कि ब्लॉक अध्यक्ष बनाने का भरोसा देकर रकम ली गई, लेकिन शिकायतकर्ता को पद नहीं मिला। इसके बाद कथित तौर पर पैसे लौटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई दस्तावेज, लेनदेन का रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं।
शुक्रवार की सुबह पुलिस की टीम ने मादपुर स्टेशन के पास स्थित अजीत माईती के घर पर छापेमारी की। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय अजीत माईती घर में ही मौजूद थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद डेबरा थाने पहुंचाया। इसके बाद मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्हें मेदिनीपुर अदालत में पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अजीत माईती ने गिरफ्तारी के दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इसे राजनीतिक कारणों से की गई गिरफ्तारी बताया और कहा कि उन्हें पुलिस तथा प्रशासन पर भरोसा है। यह उनका पक्ष है, जबकि पुलिस शिकायत में उनके खिलाफ 15 लाख रुपये लेने और उसे वापस नहीं करने का आरोप लगाया गया है। मामले में आरोपों की वास्तविकता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
अजीत माईती की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाती है। वह 2021 के विधानसभा चुनाव में पिंगला विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने पिंगला से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा उम्मीदवार स्वागता मन्ना से हार गए। रिपोर्टों के अनुसार हार का अंतर 18 हजार से अधिक मतों का था।
विधायक रहने से पहले और उसके बाद भी अजीत माईती पश्चिम मेदिनीपुर की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह तृणमूल कांग्रेस के संगठन में जिला स्तर की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद के सह-सभाधिपति के पद पर हैं। इसी वजह से उनकी गिरफ्तारी के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2016 में कथित तौर पर हुई 15 लाख रुपये की लेनदेन की वास्तविक प्रकृति क्या थी। शिकायतकर्ता के दावे और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। पुलिस बैंक लेनदेन, किसी लिखित समझौते, बातचीत या अन्य साक्ष्य की भी जांच कर सकती है। इसके अलावा शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के दौरान अजीत माईती और शिकायतकर्ता के बीच हुए संपर्क की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
मामले में यह भी जांच का विषय होगा कि रकम किस उद्देश्य से दी गई थी और क्या वास्तव में किसी राजनीतिक पद का आश्वासन देकर पैसे लिए गए थे। शिकायतकर्ता ने इसे पद दिलाने के नाम पर रकम लेने का मामला बताया है। वहीं पुलिस को यह तय करना होगा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। अभी जांच शुरुआती चरण में है।
अजीत माईती की गिरफ्तारी के बाद उन्हें थाने ले जाने की कार्रवाई सुबह ही पूरी कर ली गई। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है और शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका बयान दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। अदालत में पेशी के बाद उनकी आगे की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होगी।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शिकायत 23 सितंबर को दर्ज हुई और दो दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की। पुलिस ने शुक्रवार सुबह उनके घर पर छापेमारी की। हालांकि यह कार्रवाई किस आधार पर और किन धाराओं के तहत की गई, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी पुलिस की ओर से अभी सामने नहीं आई है। कुछ रिपोर्टों में गिरफ्तारी का कारण शिकायत में लगाए गए वित्तीय आरोप बताए गए हैं, जबकि एक रिपोर्ट में पुलिस की ओर से धाराओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने की बात कही गई है।
अजीत माईती की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब वह पूर्व विधायक होने के साथ-साथ जिला परिषद के महत्वपूर्ण पद पर भी हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी उनकी स्थानीय राजनीतिक भूमिका बनी हुई थी। अब गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच और अदालत में होने वाली आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
शिकायतकर्ता गोविंद दास की ओर से लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया है कि रकम वापस मांगने पर उन्हें कथित तौर पर परेशान किया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस को शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की भी जांच करनी होगी। यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त शिकायत, दस्तावेज या प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने आता है तो उसे केस की जांच में शामिल किया जा सकता है।
पुलिस के लिए 2016 से जुड़े मामले में समय बीतने का पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इतने पुराने विवाद में कथित लेनदेन से संबंधित दस्तावेज और गवाहों की भूमिका अहम हो सकती है। जांच एजेंसियां यह देख सकती हैं कि उस समय दोनों पक्षों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या किसी राजनीतिक संगठनात्मक पद को लेकर वास्तव में कोई बातचीत या समझौता हुआ था।
मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं होती। अजीत माईती पर लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायत और पुलिस कार्रवाई के स्तर पर हैं। अदालत में मामले की सुनवाई और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की कानूनी स्थिति तय होगी। अजीत माईती ने खुद गिरफ्तारी को राजनीतिक कारणों से बताया है, इसलिए उनके इस दावे को भी उनके पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पश्चिम मेदिनीपुर में इस गिरफ्तारी के बाद स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। अजीत माईती लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस के संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। 2021 में वह पिंगला से विधायक बने थे। 2026 में इसी सीट से चुनाव लड़ने के बाद भाजपा उम्मीदवार से हार गए। इसके बावजूद जिला परिषद में उनकी जिम्मेदारी बनी हुई थी।
अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि 15 लाख रुपये से संबंधित शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं। शिकायतकर्ता के बयान, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य संभावित सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही अजीत माईती का पक्ष भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
फिलहाल अजीत माईती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें डेबरा थाने ले जाया गया है। उन्हें मेदिनीपुर अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है। अदालत में पेशी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए 15 लाख रुपये के आरोपों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।










