पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा गरमा गया है। मुर्शिदाबाद और जंगीपुर के सांसदों ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई रोकने की अपील की। उन्होंने SIR से जुड़े लंबित मामलों में तेजी लाने की मांग भी की।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। मुर्शिदाबाद और जंगीपुर के सांसदों ने राज्य सरकार के सामने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। सांसदों ने सरकार से मामले की समीक्षा करने और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के लंबित मामलों में तेजी लाने की भी मांग की है।
मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान ने शनिवार को राज्य सचिवालय नबान्न में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बैठक के बाद दोनों सांसदों ने पत्रकारों से बातचीत में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देशों का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान धार्मिक स्थलों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर सांसदों की आपत्ति
अबू ताहिर खान ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। सांसद ने राज्य सरकार से इस कार्रवाई को रोकने की अपील करते हुए कहा कि लोगों को धार्मिक गतिविधियों और नमाज के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
खान के मुताबिक, मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में चिंता है। उन्होंने राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और स्थिति को सामान्य करने की मांग की।
मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल इलाका है और यहां धार्मिक तथा राजनीतिक मुद्दों का असर स्थानीय राजनीति पर भी दिखाई देता रहा है। ऐसे में मस्जिदों से जुड़े लाउडस्पीकर का मुद्दा सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
अदालत के निर्देशों के पालन पर भी जोर
जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने कहा कि अदालत के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई को उचित नहीं बताया। उनका कहना है कि सरकार को पूरे मामले पर विचार करना चाहिए और कार्रवाई के प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
रहमान ने स्पष्ट किया कि उनका पक्ष अदालत के निर्देशों की अवहेलना करने का नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून और न्यायिक आदेशों का सम्मान जरूरी है, लेकिन प्रशासन को कार्रवाई करते समय धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए।
इस मुद्दे ने राज्य में कानून, धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
अबू ताहिर खान ने आरोप लगाया कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मामले में राज्य पुलिस जरूरत से ज्यादा सक्रियता दिखा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
सांसदों का कहना है कि इस मामले को लेकर सरकार को स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनना चाहिए। उनका दावा है कि अचानक होने वाली कार्रवाई से समुदाय के बीच असंतोष पैदा हो सकता है।
हालांकि, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण और न्यायिक निर्देशों का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में प्रशासन आम तौर पर निर्धारित नियमों और अदालत के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करता है। इसी वजह से राजनीतिक दलों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
SIR के लंबित मामलों का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में सांसदों ने केवल लाउडस्पीकर का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि मतदाता सूची से संबंधित विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के लंबित मामलों पर भी चर्चा की।
अबू ताहिर खान के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले में बड़ी संख्या में मामले संबंधित न्यायाधिकरणों के सामने लंबित हैं। उन्होंने दावा किया कि कई वास्तविक मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और वे अपने मामलों पर फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
सांसद ने कहा कि मामलों के निपटारे में देरी होने से प्रभावित लोगों को कई तरह की प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पासपोर्ट सत्यापन, जमीन के पंजीकरण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने जैसी प्रक्रियाओं का उदाहरण दिया।
31 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी करने की मांग
अबू ताहिर खान ने राज्य सरकार से SIR से संबंधित लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की मांग की है। उन्होंने प्रक्रिया को 31 दिसंबर तक पूरा करने का अनुरोध किया।
उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में जल्द फैसला होना जरूरी है, ताकि जिन लोगों के नाम गलती से हटाए गए हैं, वे आवश्यक दस्तावेजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में परेशानी से बच सकें।
SIR का मुद्दा पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। मतदाता सूची में नामों की जांच और संभावित बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री के सामने भी उठा चुके हैं मुद्दा
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा मुर्शिदाबाद के सांसदों ने केवल राज्य सरकार के सामने ही नहीं उठाया है। इससे पहले उन्होंने केंद्र सरकार के सामने भी इस विषय को रखा था।
गुरुवार को अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और मुर्शिदाबाद जिले से जुड़े सांसद यूसुफ पठान ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने से संबंधित मुद्दे पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई थी।
इससे स्पष्ट है कि सांसद इस मामले को राज्य स्तर से आगे ले जाकर केंद्र सरकार के सामने भी रख रहे हैं। वहीं, SIR से जुड़े लंबित मामलों में तेजी लाने की मांग भी उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है।
नौशाद सिद्दीकी भी कर चुके हैं विरोध
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा केवल मुर्शिदाबाद के सांसदों तक सीमित नहीं है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट से जुड़े विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है।
उन्होंने कथित तौर पर संबंधित प्रशासनिक निर्देशों को लेकर सवाल उठाते हुए लिखित आदेश की मांग की है। उनका रुख है कि यदि कोई औपचारिक आदेश जारी किया गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने की संभावना की भी बात कही है।
इस तरह लाउडस्पीकर का मुद्दा अब राज्य की राजनीति में अलग-अलग विपक्षी और क्षेत्रीय आवाजों को एक मंच पर लाता दिखाई दे रहा है।
धार्मिक स्वतंत्रता और ध्वनि प्रदूषण के बीच बहस
लाउडस्पीकर को लेकर विवाद केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक व्यवस्था, ध्वनि प्रदूषण और धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल उठते रहे हैं।
एक तरफ प्रशासन के सामने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों और न्यायिक निर्देशों को लागू करने की जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक समुदायों की ओर से धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप को लेकर चिंता जताई जाती है।
पश्चिम बंगाल में सामने आया मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख के कारण यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।
मुर्शिदाबाद में राजनीतिक असर की संभावना
मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला है। जिले में बड़ी मुस्लिम आबादी होने के कारण धार्मिक और चुनावी मुद्दों का यहां की राजनीति पर सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रिया को बढ़ा सकता है।
इसके साथ ही SIR के लंबित मामलों को लेकर सांसदों की चिंता भी महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची से जुड़े विवाद सीधे तौर पर चुनावी राजनीति से जुड़े होते हैं। इसलिए लाउडस्पीकर और SIR दोनों मुद्दों को एक साथ उठाए जाने से आने वाले समय में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सांसदों की मांग है कि राज्य सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई पर पुनर्विचार करे और SIR से जुड़े लंबित मामलों को तेजी से निपटाए। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने अदालत के निर्देशों और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। यदि कार्रवाई जारी रहती है तो राजनीतिक विरोध बढ़ सकता है, जबकि नियमों में किसी तरह की छूट या बदलाव भी नए विवाद को जन्म दे सकता है।











