ज्ञानेश कुमार कौन हैं? SIR विवाद के बीच चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त का करियर और विवाद

ज्ञानेश कुमार कौन हैं? 1988 बैच के IAS अधिकारी और भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के करियर, सरकारी जिम्मेदारियों और SIR से जुड़े ताजा विवाद पर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों और फैसलों को लेकर विवादों में हैं। एक अखबार की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।

नई दिल्ली: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चर्चा में हैं। 23 सितंबर 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर कई बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।

हालांकि, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों में बताए गए आंतरिक मतभेदों की व्याख्या अलग तरीके से की है। आयोग के अनुसार SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और अंतिम निर्णय सर्वसम्मत रहे। इसलिए इस पूरे मामले में रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों और आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

फॉर्म-6 को लेकर क्या है विवाद?

ताजा विवाद नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त जानकारी मांगी गई। आवेदक से यह बताने को कहा गया कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR से जुड़ी मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई और इसके कानूनी आधार तथा नए मतदाताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि अंतिम निर्णयों में तीनों आयुक्तों की सहमति शामिल थी।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वह भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य कर चुके थे। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की है।

प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां संभालीं। सहकारिता मंत्रालय में सचिव के पद पर काम करने के अलावा वह गृह मंत्रालय में भी वरिष्ठ पदों पर रहे। जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रशासनिक मामलों में भी उनके कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रही थीं।

चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त तक का सफर

ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। इसके बाद 19 फरवरी 2025 को वह मुख्य चुनाव आयुक्त बने। वर्तमान में निर्वाचन आयोग में उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कार्यरत हैं। आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में तीनों अधिकारियों को मौजूदा चुनाव आयुक्त मंडल का हिस्सा बताया गया है।

SIR को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना है। इस प्रक्रिया में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड के सत्यापन जैसे कदम शामिल होते हैं। इसी वजह से मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े हर निर्णय का सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से होता है।

2026 में SIR को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक और कानूनी बहस देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए बड़ी संख्या में अपीलें भी दाखिल हुई हैं। निर्वाचन आयोग ने इन मामलों में अपने सत्यापन और अपील प्रक्रिया का बचाव किया है। ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर इससे पहले भी राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं। 

उनकी नियुक्ति, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर विपक्षी दलों ने अलग-अलग मौकों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन आरोपों पर आयोग ने अपने संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर अपना पक्ष रखा है।

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