भारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में मिस्र की हबीबा रिज्क को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। वह लगातार दूसरी बार टूर्नामेंट के अंतिम चार में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कनाडा के ओंटारियो में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में अनाहत ने मिस्र की हबीबा रिज्क को 3-1 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय स्क्वैश इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम कर ली।
दिल्ली की प्रतिभाशाली खिलाड़ी अनाहत लगातार दूसरी बार वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। पिछले संस्करण में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और इस बार उनका लक्ष्य उससे भी बेहतर प्रदर्शन करना है।
क्वार्टर फाइनल में दिखाई दमदार खेल क्षमता
क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अनाहत सिंह ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने पहला गेम 11-7 और दूसरा गेम 11-5 से जीतकर मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली। हालांकि तीसरे गेम में मिस्र की हबीबा रिज्क ने वापसी करते हुए 11-6 से जीत हासिल की और मुकाबले को रोचक बना दिया। लेकिन चौथे गेम में अनाहत ने दबाव के बीच शानदार संयम दिखाया और 11-9 से गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। चार गेम तक चले इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने तकनीकी कौशल, मानसिक मजबूती और फिटनेस का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगातार दूसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचकर बनाया रिकॉर्ड
यह उपलब्धि भारतीय स्क्वैश के लिए बेहद खास मानी जा रही है। जूनियर स्तर पर विश्व चैंपियनशिप में लगातार दो वर्षों तक सेमीफाइनल तक पहुंचना किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। अनाहत सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और खुद को भारत की सबसे होनहार युवा खिलाड़ियों में शामिल किया है। लगातार दूसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनकी सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और प्रतिभा का परिणाम है।
भारतीय स्क्वैश की नई उम्मीद
भारत में स्क्वैश खेल पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कई भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, लेकिन जूनियर वर्ग में इस तरह की निरंतर सफलता दुर्लभ रही है। अनाहत सिंह की उपलब्धियां भारतीय स्क्वैश के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिलते रहे, तो वह आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

मिस्र की खिलाड़ी पर जीत का महत्व
स्क्वैश की दुनिया में मिस्र लंबे समय से एक प्रमुख शक्ति रहा है। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में मिस्र के खिलाड़ी लगातार विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहे हैं। ऐसे में मिस्र की खिलाड़ी हबीबा रिज्क को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचना अनाहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस जीत ने न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि वह विश्व की सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।
सेमीफाइनल में होगा कड़ा मुकाबला
अब अनाहत सिंह का सामना मिस्र की ही बारब समेह से होगा। मिस्र की खिलाड़ी मजबूत फॉर्म में हैं और उनके खिलाफ मुकाबला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनाहत अपनी मौजूदा लय बरकरार रखती हैं और दबाव में शांत रहकर खेलती हैं, तो उनके पास फाइनल में पहुंचने का अच्छा अवसर होगा। भारतीय प्रशंसकों की नजर अब इस मुकाबले पर होगी, क्योंकि अनाहत इतिहास रचते हुए फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
युवा उम्र में हासिल की कई उपलब्धियां
अनाहत सिंह कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने विभिन्न जूनियर प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार पदक जीते हैं। उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण उनकी तकनीकी दक्षता, कोर्ट पर तेज गति और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता मानी जाती है। यही गुण उन्हें दुनिया की शीर्ष युवा खिलाड़ियों में शामिल करते हैं।
भारतीय खेल जगत में खुशी की लहर
अनाहत की इस उपलब्धि से भारतीय खेल जगत में उत्साह का माहौल है। खेल विशेषज्ञों, पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने उनकी जीत पर खुशी जताई है और आगामी मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं दी हैं। भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि देश के खिलाड़ी पारंपरिक खेलों के अलावा अन्य वैश्विक खेलों में भी लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं।
फाइनल की ओर बढ़ते कदम
सेमीफाइनल में जगह बनाने के बाद अब अनाहत सिंह की नजर फाइनल और संभावित स्वर्ण पदक पर होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म और आत्मविश्वास को देखते हुए भारतीय समर्थकों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। यदि वह सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने में सफल रहती हैं, तो यह भारतीय स्क्वैश इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाएगी। फिलहाल पूरा ध्यान उनके अगले मुकाबले पर है, जहां वह एक और मिस्री खिलाड़ी की चुनौती का सामना करेंगी।











