Air Chief Marshal AP Singh ने वायुसेना को दी सलाह, बोले-'रिटायरमेंट के बाद भी विशेषज्ञों की सेवाएं लेना जरूरी'

Air Chief Marshal AP Singh ने भारतीय वायुसेना को अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी अनुभवी और विशेषज्ञ अधिकारियों की सेवाओं का लाभ लेना

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना को आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक के मामले में नौसेना से सीख लेने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह नौसेना के अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भी जहाज निर्माण से जुड़े रहते हैं, उसी तरह का मॉडल भारतीय वायुसेना को भी अपनाना चाहिए।

Air Chief Marshal AP Singh: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक के विकास को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने भारतीय वायुसेना को भारतीय नौसेना के मॉडल से सीखने की सलाह देते हुए कहा कि देश को अपनी सैन्य तकनीक और रक्षा उपकरण समय पर विकसित करने की जरूरत है। 

उनके मुताबिक, अगर किसी तकनीक को विकसित करने में इतनी देर हो जाए कि उसके तैयार होने तक दुनिया उससे आगे निकल जाए, तो ऐसी तकनीक का रणनीतिक महत्व काफी कम हो जाता है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह टिप्पणी कर्नाटक के कारवार में आयोजित आईएनएस मालवन के कमीशनिंग समारोह के दौरान की। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

'देर से मिली तकनीक का मतलब तकनीक नहीं मिली'

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में किसी भी नई तकनीक को विकसित करने का उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसे सही समय पर सेना को उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी विकास की गति इतनी तेज होनी चाहिए कि सैन्य बल बदलती परिस्थितियों और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहें।

उनके अनुसार, यदि किसी हथियार या सैन्य प्रणाली को डिजाइन करने, विकसित करने और उत्पादन में इतना समय लग जाए कि उसके तैयार होने तक दुनिया किसी नई तकनीक को अपना चुकी हो, तो उस प्रणाली का उपयोग अपेक्षित प्रभाव नहीं दे पाएगा।

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के लिए अपनी तकनीक विकसित करना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ गति और समयबद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आत्मनिर्भरता का लक्ष्य केवल स्वदेशी उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें समय पर विकसित और सेना में शामिल करना भी आवश्यक है।

नौसेना के मॉडल से सीखने की अपील

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि नौसेना ने लंबे समय से आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया है और इसका परिणाम देश में तेजी से हो रहे युद्धपोत निर्माण के रूप में दिखाई देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय वायुसेना भी नौसेना के उस मॉडल से सीख सकती है, जिसमें नौसेना के अधिकारी जहाज निर्माण की प्रक्रिया से शुरुआत से जुड़े रहते हैं। अधिकारी इसी क्षेत्र में अनुभव हासिल करते हुए आगे बढ़ते हैं और शिपयार्ड में वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभालते हैं।

एपी सिंह के अनुसार, कई अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने अनुभव और विशेषज्ञता के जरिए इस क्षेत्र में योगदान जारी रखते हैं। उन्होंने कहा कि वायुसेना के लिए भी विमानन क्षेत्र में इसी तरह का मॉडल अपनाना उपयोगी हो सकता है। इससे स्वदेशी विमान निर्माण और रक्षा विमानन उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

तेजस की डिलीवरी में देरी का मुद्दा भी उठा चुके हैं

वायुसेना प्रमुख इससे पहले भी स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस की डिलीवरी और इसके अपग्रेड में हो रही देरी को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने रक्षा उत्पादन में समयसीमा के पालन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि सैन्य जरूरतों के मुताबिक उपकरणों की समय पर उपलब्धता जरूरी है। उनका मानना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए देश को अनुसंधान, डिजाइन, विकास और उत्पादन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।

भविष्य के युद्धों में तीनों सेनाओं का तालमेल जरूरी

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर संयुक्त संचालन यानी 'जॉइंटनेस' की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोई भी बड़ा युद्ध केवल एक सैन्य शाखा के दम पर नहीं लड़ा जाएगा। तीनों सेनाओं को एक साथ मिलकर काम करना होगा और साझा रणनीति के साथ अभियान चलाने होंगे।

उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त सैन्य कार्रवाई और बेहतर तालमेल की आवश्यकता पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। उनके मुताबिक, भविष्य में तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और समन्वय को और मजबूत करना देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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