साल 2025 में भारत में भाजपा की चुनावी ताकत कायम रही, जबकि कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई। दिल्ली की जहरीली हवा और रुपये की गिरती कीमत ने आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियां बढ़ाईं। पहलगाम आतंकी हमला और पाकिस्तान से सुरक्षा खतरे ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
Year Ender: साल 2025 में भारत ने राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण घटनाओं का सामना किया। भाजपा ने दिल्ली और बिहार में अपनी चुनावी ताकत कायम रखी, जबकि कांग्रेस कमजोर होती रही। दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना रहा और रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्तर 91 तक गिर गया। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए, जिससे सुरक्षा और सीमा नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठे। इन घटनाओं ने देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।
भाजपा की जीत और कांग्रेस की कमजोरी
साल 2025 में भाजपा ने दिल्ली और बिहार में अपनी चुनावी ताकत कायम रखी। महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति ने नगर परिषद और पंचायत चुनावों में अब तक का सबसे बड़ा बहुमत हासिल किया। वहीं कांग्रेस लगातार पिछड़ती रही। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई और बिहार में सिर्फ 6 सीटों तक सीमित रह गई। इस साल की राजनीति ने साफ कर दिया कि भारतीय चुनावी परिदृश्य में भाजपा का दबदबा बरकरार है।
भाजपा की लगातार सफलता और कांग्रेस की कमजोरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को नए रणनीतिक विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया। चुनावी जीत के साथ भाजपा ने नीति निर्माण और स्थानीय विकास परियोजनाओं में भी जोर दिया, जबकि विपक्षी दलों की कमजोरी ने राजनीतिक संतुलन पर सवाल खड़े किए।

दिल्ली की जहरीली हवा और रुपये की कमजोरी
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सालभर खतरनाक श्रेणी में रहा। दिवाली से लेकर ठंड तक AQI लगातार खराब रहा और बार-बार GRAP प्रतिबंध लागू किए गए। राजधानी में रहने वाले नागरिकों का जीवन और स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, जिससे प्रदूषण नियंत्रण और दीर्घकालिक समाधान की मांग बढ़ गई।
आर्थिक मोर्चे पर रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी का नया रिकॉर्ड बनाया। साल के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपये का स्तर 91 तक गिर गया। इस गिरावट ने आयात-निर्यात, निवेश और आम जनता की खरीद शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला।
आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियां
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने 26 नागरिकों की जान ले ली। इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट का हाथ था। भारत ने इसके जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सालभर पाकिस्तान से आतंकवाद का खतरा बना रहा। यह लगातार दिखाता है कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ सतत और सशक्त कार्रवाई जारी रखने की जरूरत है।










