लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मंगलवार (17 फरवरी 2026) को उत्तर प्रदेश विधानसभा का घेराव किया और कई मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
Akhilesh Yadav: लखनऊ में मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का घेराव करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर प्रदर्शन किया। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखे आरोप लगाए।
अखिलेश यादव का कांग्रेस प्रदर्शन पर रिएक्शन
अखिलेश यादव ने कहा,
'यह वह सरकार है, जो विरोध को स्वीकार नहीं कर सकती। यह केवल अपना राग अलापती रहती है। अगर आपको विरोध करना है तो पूरी तैयारी के साथ करना चाहिए। अगर पुलिस का एक डंडा आए, तो आपके पास 50 तैयार होने चाहिए। विरोध केवल दिखावा नहीं होना चाहिए, बल्कि रणनीतिक और संगठित होना चाहिए।'
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग से समाजवादी पार्टी ने समय मांगा है, ताकि पिछड़े, दलित और मुस्लिम समुदायों के लिए उनके फॉर्म भरने और अधिकार सुनिश्चित करने संबंधी मुद्दों पर बैठक की जा सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
'मुख्यमंत्री बिष्ट साहब को किसी बात की जानकारी नहीं है। इनके साथी कभी ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाते और संघ के नेताओं से कोई सीख नहीं ली। हमारे रामजी को लोकसभा में अंतिम बेंच पर बैठाना यह दर्शाता है कि इस सरकार में ईमानदारी और पारदर्शिता नहीं है। आने वाले चुनाव में यह विधानसभा से बाहर हो जाएंगे।'
इसके अलावा उन्होंने महोबा में पानी की टंकी से पानी गिरने और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों को उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और जनहित की अनदेखी चरम पर है।
विपक्ष और लोकतंत्र
अखिलेश यादव ने अपने बयान में लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन इसे रणनीतिक और संगठित तरीके से करना चाहिए। केवल प्रदर्शन और नारेबाजी से कुछ नहीं होगा। विपक्ष को जनता के मुद्दों के साथ खड़ा होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनावों की तैयारी को दर्शाता है। कांग्रेस का विधानसभा घेराव और समाजवादी पार्टी का समर्थन, दोनों ही विपक्षी दलों के सामूहिक रणनीतिक कदम के रूप में देखे जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2026 और 2027 के चुनावों की तैयारी तेज़ हो रही है। अखिलेश यादव का यह बयान राज्य की सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ विरोध की रणनीति और विपक्षी एकता को स्पष्ट करता है। उनके अनुसार विपक्ष को केवल विरोध करना ही नहीं बल्कि जनता के अधिकार और विकास के मुद्दों को भी उठाना चाहिए।










