ग्रीनलैंड विवाद के बाद यूरोप ने अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। यूरोपीय संघ 93 बिलियन यूरो के जवाबी टैरिफ की तैयारी में है, जिससे Trade War गहराने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
Trump Tariff: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति अब उलटा असर दिखाने लगी है। जिस तरह से ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर दबाव की रणनीति अपनाई, उसने यूरोप को एकजुट कर दिया है। अब यह टकराव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ी Trade War का रूप ले चुका है। यूरोपीय संघ ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की धमकी या ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाला नहीं है।
यूरोप की तैयारी ऐसी है कि अगर जवाबी टैरिफ लागू हुआ तो अमेरिका को करीब 93 बिलियन यूरो यानी लगभग 107 बिलियन डॉलर का झटका लग सकता है। यह आंकड़ा अमेरिका की बड़ी कंपनियों और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
ग्रीनलैंड विवाद से भड़की ट्रेड वॉर
इस पूरे टकराव की जड़ ग्रीनलैंड है। राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात करते रहे हैं। उन्होंने इसे रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से अहम बताते हुए कई बार डेनमार्क पर दबाव बनाया। जब बात आगे नहीं बढ़ी, तो ट्रंप ने सीधे आर्थिक दबाव की नीति अपनाई।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर समझौता नहीं हुआ, तो 1 फरवरी से डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन समेत आठ यूरोपीय देशों के उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यही नहीं, उन्होंने 1 जून से इस टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की धमकी भी दे डाली।
यूरोपीय संघ की इमरजेंसी मीटिंग
ट्रंप की धमकी के जवाब में यूरोपीय संघ ने तुरंत Emergency Meeting बुलाई। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क और अन्य प्रमुख देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का संदेश साफ था कि यूरोप किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है।

फ्रांस और जर्मनी ने खुलकर कहा कि अगर अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया, तो यूरोप भी चुप नहीं बैठेगा। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ अब अमेरिका पर 93 बिलियन यूरो का जवाबी टैरिफ लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय बाजार से बाहर करने जैसे सख्त विकल्प भी टेबल पर रखे गए हैं।
6 फरवरी से जवाबी कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक यूरोप की जवाबी कार्रवाई 6 फरवरी से लागू हो सकती है। यानी अगर अमेरिका 1 फरवरी को टैरिफ बढ़ाता है, तो सिर्फ पांच दिनों के भीतर उसे यूरोप से करारा जवाब मिल जाएगा।
यह जवाबी टैरिफ अमेरिका के ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सीधे प्रभावित कर सकता है। यूरोप अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है। ऐसे में 93 बिलियन यूरो का झटका अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।
व्यापार से आगे बढ़ा तनाव
यह विवाद अब केवल Trade तक सीमित नहीं रहा है। ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर रणनीतिक तनाव भी बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड के आसपास आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। यूरोप इसे अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का सवाल मान रहा है। संदेश साफ है कि किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कनाडा की सख्त प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर कनाडा ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल डेनमार्क के पास है।
अमेरिका फर्स्ट नीति पर सवाल
ट्रंप की America First नीति पहले भी विवादों में रही है, लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर होता दिख रहा है। यूरोप के साथ रिश्तों में आई यह दरार अमेरिका के लिए लंबे समय तक नुकसानदेह साबित हो सकती है।
यूरोपीय देशों का मानना है कि धमकियों के जरिए सहयोग नहीं बनाया जा सकता। अगर अमेरिका इसी तरह दबाव की नीति अपनाता रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।











