X पर वायरल एक पोस्ट में Zomato के डिलीवरी सिस्टम में कथित खामी का दावा किया गया है। इस तरीके से ग्राहक और रेस्टोरेंट प्लेटफॉर्म फीस व कमीशन बचा सकते हैं, जिससे कंपनी के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
Tech: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुई एक पोस्ट ने Zomato के डिलीवरी मॉडल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट में दावा किया गया है कि ग्राहक ऐप पर छोटा ऑर्डर देकर रेस्टोरेंट से सीधे बड़ा ऑर्डर मंगवा सकते हैं, जिससे प्लेटफॉर्म फीस और कमीशन से बचा जा सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Zomato के Viral Loophole Claim ने बढ़ाई चिंता, Delivery Model पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर सामने आए एक दावे ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल पोस्ट के अनुसार, कुछ ग्राहक ऐप पर बेहद कम कीमत का ऑर्डर प्लेस करते हैं और इसके बाद रेस्टोरेंट से सीधे फोन या WhatsApp के जरिए बड़ा ऑर्डर देकर भुगतान कर देते हैं। बाद में रेस्टोरेंट पूरे खाने को उसी ऐप ऑर्डर के साथ पैक कर डिलीवर कर देता है।
कैसे काम करने का दावा किया गया यह तरीका?
वायरल पोस्ट में बताया गया कि ग्राहक ऐप पर केवल एक कम कीमत वाली आइटम ऑर्डर करता है, जबकि बाकी भोजन का ऑर्डर सीधे रेस्टोरेंट को दिया जाता है। इस व्यवस्था में डिलीवरी पार्टनर केवल ऐप पर दिख रहे छोटे ऑर्डर को ही देखता है, जबकि वास्तविक ऑर्डर का बड़ा हिस्सा प्लेटफॉर्म के बाहर पूरा किया जाता है।
दावे के मुताबिक इससे ग्राहक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस और अन्य शुल्क बचा सकते हैं, जबकि रेस्टोरेंट भी एग्रीगेटर को दिए जाने वाले कमीशन से बच जाता है।
कंपनी के रेवेन्यू मॉडल पर असर की आशंका
विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का मुख्य विषय यह है कि यदि इस तरह की प्रैक्टिस बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म को अपेक्षित कमीशन नहीं मिल पाएगा। ऐसे में कंपनी डिलीवरी की लागत तो वहन करेगी, लेकिन ऑर्डर वैल्यू का बड़ा हिस्सा उसके इकोसिस्टम से बाहर रहेगा।
कुछ यूजर्स का मानना है कि यह तरीका छोटे शहरों या उन क्षेत्रों में अधिक संभव हो सकता है जहां ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच पहले से संपर्क मौजूद हो।
रोकथाम को लेकर भी सामने आए सुझाव
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने संभावित समाधान भी सुझाए हैं। इनमें ऑर्डर और बिल का मिलान, पैक किए गए सामान की अतिरिक्त जांच तथा फोटो-आधारित डिलीवरी सत्यापन जैसे उपाय शामिल हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि यदि किसी रेस्टोरेंट द्वारा ऐसी गतिविधि करते हुए पाया जाता है, तो उसे प्लेटफॉर्म से हटाए जाने या सस्पेंड किए जाने का जोखिम भी उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल Zomato की ओर से इस वायरल दावे पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है और यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा तरीका वास्तव में कितने बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
2023 में भी सामने आया था एक अलग मामला
यह पहला अवसर नहीं है जब फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म में कथित खामी को लेकर चर्चा हुई हो। वर्ष 2023 में कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑर्डर से जुड़ा एक मामला सामने आया था, जिसमें कुछ डिलीवरी पार्टनर्स द्वारा सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका जताई गई थी।
उस समय कंपनी के सह-संस्थापक ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि संबंधित समस्या की जानकारी उन्हें है और उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान वायरल दावे ने एक बार फिर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की निगरानी व्यवस्था और यूनिट इकॉनॉमिक्स को लेकर बहस तेज कर दी है।








