इंजीनियर राशिद को दिल्ली हाई कोर्ट से संसद सत्र में भाग लेने के लिए 2 दिन की पैरोल मिली, लेकिन कुछ शर्तों के साथ, एनआईए ने इसका विरोध किया था।
Delhi: जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद को दिल्ली हाई कोर्ट से संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए 2 दिन की पैरोल मिल गई है। यह फैसला शुक्रवार, 10 फरवरी 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया। इससे पहले, एनआईए ने इस पैरोल के खिलाफ आपत्ति जताई थी, लेकिन कोर्ट ने कई शर्तों के साथ इसे मंजूरी दी।
एनआईए का विरोध, कोर्ट ने रखी शर्तें
एनआईए ने कहा था कि इंजीनियर राशिद को संसद सत्र में शामिल होने का कोई विशेष अधिकार नहीं है और इस पैरोल के लिए उनका कोई जायज कारण नहीं है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इंजीनियर राशिद को कुछ शर्तों के साथ पैरोल दी है, जिनमें फोन या किसी दूरसंचार उपकरण का इस्तेमाल न करना, इंटरनेट का उपयोग न करना, मीडिया से बातचीत न करना और संसद सदस्य के रूप में अपनी सीमित जिम्मेदारी को छोड़कर किसी से भी बातचीत न करना शामिल है। इसके अलावा, लोकसभा महासचिव के परामर्श से उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।
भूख हड़ताल पर थे इंजीनियर राशिद
इंजीनियर राशिद वर्तमान में जेल में हैं। 7 फरवरी 2025 को उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वे संसद सत्र में शामिल होने की अपनी मांगों के साथ भूख हड़ताल पर थे। उनकी हालत गंभीर होने पर अवामी इत्तिहाद पार्टी (AIP) के प्रवक्ता इनाम उन्न नबी ने कहा था कि "इंजीनियर राशिद की स्थिति चिंताजनक है, लेकिन उनकी आवाज़ इंसाफ के लिए मजबूत बनी हुई है। हम मानवाधिकार के आधार पर उनकी इलाज की मांग करते हैं।"
कोर्ट में फैसले से पहले की स्थिति
दिल्ली हाई कोर्ट में इंजीनियर राशिद ने कस्टडी पैरोल की अर्जी दी थी, जिसे एनआईए ने विरोध किया था। एनआईए का कहना था कि राशिद के पास संसद सत्र में भाग लेने का कोई विशेष कारण नहीं है। कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रखते हुए पैरोल की अर्जी पर विचार किया था, और आज (10 फरवरी 2025) दो दिनों की पैरोल मंजूर की।
इंजीनियर राशिद का मामला
एनआईए के मुताबिक, इंजीनियर राशिद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के आरोप में जेल में हैं। उन पर आतंकवादी संगठनों से हवाला के जरिए पैसे इकट्ठा करने का आरोप है। हालांकि, राशिद का नाम एनआईए की पहली चार्जशीट या पूरक चार्जशीट में आरोपी के रूप में नहीं था। उन्हें 9 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद गिरफ्तार किया गया था और 4 अक्टूबर 2019 को दायर दूसरी चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाया गया।