78 करोड़ के फ्लाईओवर पर नगर निगम का 'फोटोशूट': कागजों में हुई सफाई, हकीकत में बालू-गिट्टी का अंबार और कीचड़

78 करोड़ के फ्लाईओवर पर सफाई के दावों के बीच सड़क पर बालू-गिट्टी और कीचड़ का अंबार दिखा। लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
78 करोड़ के फ्लाईओवर पर नगर निगम का 'फोटोशूट': कागजों में हुई सफाई, हकीकत में बालू-गिट्टी का अंबार और कीचड़
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शहर में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए फ्लाईओवर को लेकर एक बार फिर नगर निगम की सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में है। 78 करोड़ रुपए के इस फ्लाईओवर पर सफाई के नाम पर महज औपचारिकता किए जाने का आरोप सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सफाई अभियान चलाया गया, लेकिन मौके की तस्वीरें और स्थानीय लोगों की शिकायतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। सड़क के आसपास बालू-गिट्टी का अंबार, कीचड़ और गंदगी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फ्लाईओवर जैसे महत्वपूर्ण और करोड़ों रुपए की लागत वाले निर्माण पर साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। रोजाना बड़ी संख्या में वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर जमा बालू, गिट्टी और कीचड़ केवल शहर की खूबसूरती खराब नहीं करते, बल्कि यातायात के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से सफाई अभियान की तस्वीरें या गतिविधियां दिखा देने से समस्या का समाधान नहीं होता। जरूरी यह है कि सड़क वास्तव में साफ हो और आम लोगों को उसका लाभ मिले। लोगों का आरोप है कि मौके पर स्थिति देखने के बाद ऐसा लगता है कि सफाई की प्रक्रिया पूरी तरह जमीन पर नहीं उतरी है।

फ्लाईओवर के आसपास निर्माण सामग्री का जमा होना भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बालू और गिट्टी सड़क पर फैलने से वाहनों के फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बारिश के बाद यही सामग्री कीचड़ में बदल जाती है और सड़क पर चलना मुश्किल हो सकता है।

शहर में मानसून के दौरान सड़क की स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है। बारिश के पानी के साथ बालू और मिट्टी सड़क पर फैल जाती है। अगर समय पर इसकी सफाई नहीं की जाए तो वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने की स्थिति बन सकती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए ऐसी सड़क विशेष रूप से जोखिम वाली हो सकती है।

लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर फ्लाईओवर का निर्माण करने के बाद उसके आसपास की मूलभूत सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर सड़क के किनारे गंदगी, कीचड़ और निर्माण सामग्री पड़ी रहेगी तो करोड़ों की परियोजना का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।

स्थानीय नागरिकों ने सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि अधिकारियों को केवल निरीक्षण या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मौके पर सफाई के बाद उसकी निगरानी भी होनी चाहिए, ताकि कुछ ही समय में दोबारा वही स्थिति न बन जाए।

शहर के प्रमुख फ्लाईओवर पर यातायात का दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे रास्ते पर सड़क की स्थिति खराब होने का असर ट्रैफिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। बालू-गिट्टी सड़क पर फैलने से वाहन अपनी गति कम करते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों पर भी असर पड़ता है।

इसके अलावा कीचड़ जमा होने से पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। बारिश के समय सड़क किनारे पानी और कीचड़ होने पर लोगों को मुख्य सड़क के नजदीक से गुजरना पड़ सकता है। इससे पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सफाई के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। फ्लाईओवर के आसपास अगर निर्माण एजेंसी की सामग्री पड़ी है तो उसे हटाने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं सड़क और आसपास के हिस्से की सफाई नगर निगम के जिम्मे है तो नियमित सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कई बार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी सड़क के आसपास बची सामग्री लंबे समय तक नहीं हटाई जाती। बालू, गिट्टी, ईंट और मिट्टी बारिश के साथ बहकर नालियों में पहुंचती है। इससे जलनिकासी की समस्या भी पैदा हो सकती है। यदि नालियां जाम होती हैं तो बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

नागरिकों का कहना है कि शहर की बड़ी परियोजनाओं पर खर्च होने वाली राशि के साथ रखरखाव की स्थायी व्यवस्था भी तय होनी चाहिए। किसी फ्लाईओवर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद उसकी सफाई, स्ट्रीट लाइट, सड़क की स्थिति, जलनिकासी और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी जरूरी है।

फ्लाईओवर पर सफाई को लेकर उठे सवाल नगर निगम के लिए भी चुनौती हैं। अगर सफाई अभियान के बावजूद सड़क पर गंदगी और निर्माण सामग्री मौजूद है तो अधिकारियों को यह देखना होगा कि अभियान में कमी कहां रह गई। क्या सफाई केवल कुछ हिस्सों तक सीमित रही या सफाई के बाद दोबारा बालू-गिट्टी सड़क पर आ गई, इसकी जांच जरूरी है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब सड़क की नियमित सफाई के साथ निर्माण सामग्री को निर्धारित स्थान पर रखने की व्यवस्था की जाए। यदि आसपास लगातार निर्माण गतिविधियां चल रही हैं तो संबंधित एजेंसियों को सड़क पर सामग्री फैलने से रोकने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।

बारिश के मौसम में सड़क की सफाई का महत्व और बढ़ जाता है। सूखी सड़क पर मौजूद बालू और गिट्टी भी परेशानी पैदा करती है, लेकिन बारिश के बाद यही सामग्री फिसलन पैदा कर सकती है। इसलिए मानसून के दौरान प्रमुख सड़कों और फ्लाईओवर की नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।

शहरवासियों का सवाल यह भी है कि जब किसी परियोजना पर 78 करोड़ रुपए जैसी बड़ी राशि खर्च होती है तो उसके आसपास की सफाई व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण पूरा होने से नहीं बल्कि उसके बेहतर रखरखाव से तय होती है।

नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर पहले भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस फ्लाईओवर की स्थिति ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि शहर में सफाई अभियान वास्तव में कितने प्रभावी हैं और उनकी निगरानी किस स्तर पर होती है।

फ्लाईओवर से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी सड़क पर फैली सामग्री के कारण सावधानी बरतनी पड़ सकती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को कीचड़ और गिट्टी वाले हिस्सों पर गति कम रखनी पड़ती है। अचानक सामने आने वाली निर्माण सामग्री से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि फ्लाईओवर और उसके आसपास तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। सड़क से बालू-गिट्टी हटाई जाए, कीचड़ साफ किया जाए और जलनिकासी व्यवस्था की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण सामग्री दोबारा सड़क पर न फैले।

लोगों का कहना है कि सिर्फ सफाई के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी की तस्वीरें सामने आना पर्याप्त नहीं है। सफाई का असर सड़क पर दिखाई देना चाहिए। अगर अभियान के बाद भी कुछ घंटों या दिनों में वही गंदगी वापस आ जाती है तो ऐसी कार्रवाई का कोई स्थायी फायदा नहीं होगा।

इस मामले में संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। यदि सड़क पर निर्माण एजेंसी की वजह से बालू-गिट्टी फैल रही है तो उससे सफाई और सामग्री हटाने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं नगर निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक सड़क की नियमित सफाई होती रहे।

शहर के नागरिकों के लिए फ्लाईओवर केवल यातायात का रास्ता नहीं बल्कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर लापरवाही सीधे आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा मामला बन जाता है।

कुल मिलाकर, 78 करोड़ रुपए की लागत वाले फ्लाईओवर पर सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम पर सवाल उठ रहे हैं। सफाई अभियान के दावों के बावजूद सड़क पर बालू-गिट्टी, कीचड़ और गंदगी दिखाई देने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल फोटोशूट या कागजी कार्रवाई के बजाय मौके पर प्रभावी और नियमित सफाई होनी चाहिए। साथ ही निर्माण सामग्री को सड़क पर फैलने से रोकने और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने की जरूरत है, ताकि करोड़ों की परियोजना आम लोगों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक बनी रहे।

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