आज देशभर में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट्स की हड़ताल

आज देशभर में मेडिकल स्टोर बंद हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में केमिस्ट्स ने हड़ताल का ऐलान किया है। जानें किन सेवाओं पर पड़ेगा असर और क्या हैं

All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) ने अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों की कथित अनुचित प्रतिस्पर्धा के विरोध में 20 मई 2026 को देशव्यापी दवा विक्रेता बंद बुलाया है।

नई दिल्ली: भारत में 20 मई 2026 को देशभर के मेडिकल स्टोर बंद रहने की संभावना है। केमिस्ट्स, फार्मासिस्ट्स और दवा वितरकों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यह विरोध मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉरपोरेट कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी और कथित असमान प्रतिस्पर्धा के खिलाफ किया जा रहा है।

संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण अब देशव्यापी बंद का रास्ता अपनाना पड़ा है।

ऑनलाइन दवा बिक्री बना मुख्य मुद्दा

All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) के अनुसार, भारत में दवा व्यवसाय वर्तमान में Drugs and Cosmetics Act 1940 और Rules 1945 के तहत संचालित होता है। हालांकि, ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट कानूनी ढांचा अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में ऑनलाइन फार्मेसी से संबंधित जीएसआर 817(E) अधिसूचना जारी की थी, लेकिन उसे अब तक कानून का रूप नहीं दिया गया। इसके बावजूद देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

AIOCD का कहना है कि इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी और अदालत ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने संबंधी निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

छोटे मेडिकल स्टोर्स पर बढ़ा दबाव

संगठन का दावा है कि ऑनलाइन और कॉरपोरेट फार्मा कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। इससे देशभर के छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। AIOCD के अनुसार, भारत में करीब 12.5 लाख दवा विक्रेता इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं।

संगठन का कहना है कि, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 20% से 50% तक की छूट दे रहे हैं. छोटे केमिस्ट्स सीमित मुनाफे में काम करते हैं. मौजूदा नियम पारंपरिक दुकानदारों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल बना रहे हैं।

कोविड काल की अस्थायी छूट पर भी सवाल

AIOCD ने कोविड-19 महामारी के दौरान जारी की गई जीएसआर 220(E) अधिसूचना पर भी सवाल उठाए हैं। मार्च 2020 में सरकार ने दवाओं की होम डिलीवरी को अस्थायी राहत के तौर पर अनुमति दी थी। संगठन का कहना है कि महामारी समाप्त हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था अभी तक वापस नहीं ली गई। इसके कारण ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों को लगातार लाभ मिल रहा है।

सरकार से क्या हैं प्रमुख मांगें?

दवा विक्रेताओं के संगठन ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए स्पष्ट और सख्त नियम लागू किए जाएं
  • जीएसआर 817(E) अधिसूचना को वापस लिया जाए
  • छोटे दवा विक्रेताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जाए
  • DPCO 2013 (Drug Price Control Order) के तहत लाभ सीमा पर पुनर्विचार हो
  • केमिस्ट्स को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं के वैकल्पिक ब्रांड देने की अनुमति मिले

संगठन का मानना है कि इन कदमों से छोटे और पारंपरिक दवा विक्रेताओं को राहत मिल सकती है। हड़ताल के दौरान देश के कई हिस्सों में मेडिकल स्टोर्स बंद रह सकते हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर आपातकालीन सेवाओं के लिए सीमित व्यवस्था बनाए जाने की संभावना है।

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