आंध्र प्रदेश चुनाव 2024 के मतदान आंकड़ों पर उठे सवाल, देर रात वोटिंग और प्रतिशत बदलाव से बढ़ा विवाद

आंध्र प्रदेश चुनाव 2024 के मतदान आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठे। देर रात वोटिंग, प्रतिशत बदलाव और पारदर्शिता को लेकर विशेषज्ञों ने जांच की मांग की।

आंध्र प्रदेश चुनाव 2024 के मतदान आंकड़ों पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। देर रात वोटिंग, प्रतिशत में बदलाव और पारदर्शिता की कमी को लेकर जांच की मांग की गई है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है।

अमावती: आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद अब मतदान प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाए। इन विशेषज्ञों का दावा है कि मतदान के आंकड़ों में कुछ “असामान्य पैटर्न” दिखाई दे रहे हैं, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।

भारी जीत के बीच विवाद की शुरुआत

इन चुनावों में चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली TDP और NDA गठबंधन को भारी जनादेश मिला। कुल 175 सीटों में से 164 सीटें इस गठबंधन के खाते में गईं। TDP को 135 सीटें, BJP को 8 सीटें और पवन कल्याण की जन सेना पार्टी को 21 सीटें मिलीं। इस जीत के साथ नायडू चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

हालांकि, चुनावी नतीजों की इस बड़ी जीत के साथ ही मतदान के आंकड़ों को लेकर विवाद भी सामने आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जीत के आंकड़ों से ज्यादा जरूरी यह है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद हो।

रात में वोटिंग के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में परकला प्रभाकर ने सबसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि करीब 3,500 बूथों पर रात 2 बजे तक वोटिंग जारी रही। उनके अनुसार, कुल वोटों का लगभग 4.16 प्रतिशत हिस्सा रात 11:45 बजे से सुबह 2 बजे के बीच डाला गया।

उन्होंने कहा कि रात 8 बजे से 2 बजे के बीच लगभग 52 लाख वोट दर्ज किए गए। इनमें से अकेले आधी रात के बाद 17 लाख से ज्यादा वोट डाले गए। यह आंकड़ा अपने आप में कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि आमतौर पर मतदान शाम तक समाप्त हो जाता है।

6 सेकंड में वोट कैसे संभव

प्रभाकर ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट डाला जा रहा था। उनका सवाल था कि जब एक EVM को रीसेट होने में लगभग 14 सेकंड लगते हैं, तो केवल 6 सेकंड में एक वोट कैसे डाला जा सकता है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई मतदाता इतनी तेजी से बूथ में जाकर वोट डालकर बाहर आ सकता है। उनके अनुसार, यह आंकड़े सामान्य मतदान प्रक्रिया से मेल नहीं खाते और इस पर स्पष्ट जवाब जरूरी है।

वोटिंग प्रतिशत में बदलाव पर सवाल

चुनाव के दिन जारी किए गए मतदान प्रतिशत के आंकड़ों में भी लगातार बदलाव देखने को मिला। 13 मई 2024 को शाम 5 बजे मतदान खत्म होने के बाद प्रारंभिक आंकड़ा 68.04 प्रतिशत बताया गया। इसके बाद रात 8 बजे यह आंकड़ा 68.12 प्रतिशत हुआ। फिर रात 11:45 बजे इसे बढ़ाकर 76.50 प्रतिशत कर दिया गया। चार दिन बाद जारी अंतिम आंकड़े में यह 81.79 प्रतिशत तक पहुंच गया।

इन लगातार बदलावों ने विशेषज्ञों की चिंता को और बढ़ा दिया। उनका कहना है कि मतदान प्रतिशत में इतना बड़ा अंतर स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए।

पारदर्शिता की कमी पर उठे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फॉर्म 17C, जिसमें हर बूथ पर डाले गए वोटों का पूरा डेटा होता है, उसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट को machine-readable format में जारी नहीं किया गया, जिससे स्वतंत्र जांच करना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और इसके बिना चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो सकता है।

भूषण ने कहा कि अगर जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होगी, तो संदेह बढ़ना स्वाभाविक है।

VVPAT गिनती की मांग

प्रशांत भूषण ने VVPAT पर्चियों की अनिवार्य गिनती की भी मांग की। उनका कहना है कि इससे EVM में दर्ज वोटों और वास्तविक वोटिंग के बीच किसी भी अंतर को आसानी से पकड़ा जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदान खत्म होने के बाद कतार में खड़े मतदाताओं का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि देर रात तक कितने लोग वास्तव में मतदान कर रहे थे।

ऑडिट की मांग ने बढ़ाया दबाव

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने भी इन चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की। इसमें फॉर्म 17C और फॉर्म 20 दोनों शामिल हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बूथ स्तर पर फॉर्म 17C पर हस्ताक्षर और मुहर लगाई जाती है, तो बाद में कुल आंकड़ों में अंतर क्यों दिखाई देता है। उनके अनुसार, यह एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर स्पष्ट जवाब जरूरी है।

कुरैशी ने सुझाव दिया कि मतदान प्रतिशत उसी दिन सार्वजनिक किया जाना चाहिए और बूथ स्तर का डेटा तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की शंका को समय रहते दूर किया जा सके।

यह पूरा विवाद केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में लोगों के भरोसे से जुड़ा हुआ है। चुनाव प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, जनता का विश्वास उतना ही मजबूत रहेगा।

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