Adani Hindenburg Case: SEBI ने पांच अदाणी कंपनियों की कार्यवाही ₹1.51 करोड़ में निपटाई, जानें पूरा मामला

Adani Hindenburg Case: SEBI ने अदाणी ग्रुप की पांच कंपनियों से जुड़े मामलों को ₹1.51 करोड़ के सेटलमेंट में निपटा दिया। जानें किस कंपनी ने कितनी रकम दी और

अदाणी समूह से जुड़े चर्चित हिंडनबर्ग मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पांच कंपनियों के खिलाफ चल रही adjudication proceedings को कुल ₹1.51 करोड़ के settlement payment के बाद निपटा दिया है।

Adani Hindenburg Case: अदाणी समूह से जुड़े चर्चित हिंडनबर्ग मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पांच कंपनियों के खिलाफ चल रही adjudication proceedings को कुल ₹1.51 करोड़ के settlement payment के बाद निपटा दिया है। यह मामला हिंडनबर्ग रिसर्च की जनवरी 2023 की रिपोर्ट के बाद SEBI की जांच के दौरान सामने आए कथित disclosure और corporate governance से जुड़े मुद्दों से संबंधित था। SEBI ने 22 सितंबर 2026 को settlement order जारी किया।

हालांकि, इस settlement को हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि या खारिज किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पांचों कंपनियों ने settlement के तहत राशि का भुगतान किया और उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने तथ्यों या कानूनी निष्कर्षों को न तो स्वीकार किया और न ही खारिज किया।

पांच अदाणी कंपनियों ने कितनी राशि दी?

SEBI के settlement order के मुताबिक, Adani Enterprises ने ₹76.05 लाख का भुगतान किया। Adani Green Energy ने ₹45.50 लाख दिए। वहीं Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Energy Solutions ने ₹9.75 लाख-₹9.75 लाख का भुगतान किया। इन सभी भुगतानों को मिलाकर कुल रकम करीब ₹1.51 करोड़ बैठती है।

इन कंपनियों के खिलाफ proceedings का संबंध कुछ कथित regulatory और disclosure lapses से था। SEBI की जांच में संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन यानी Related Party Transactions (RPT) की जानकारी से जुड़े मुद्दे और कुछ audit तथा limited-review reports से संबंधित compliance concerns शामिल थे।

क्या थे SEBI की कार्यवाही के मुख्य मुद्दे?

SEBI के अनुसार, मामले में Adani Enterprises द्वारा एक कथित related-party transaction के disclosure से जुड़ा मुद्दा शामिल था। यह लेनदेन Adani Estates और Vakoder Investment के बीच था और वित्त वर्ष 2012-13 की annual report में इसके disclosure को लेकर नियामकीय सवाल उठे थे।इसके अलावा, समूह की कुछ कंपनियों की विभिन्न अवधियों की audit और limited-review reports को लेकर भी सवाल उठाए गए। 

SEBI की कार्यवाही में यह आरोप शामिल था कि कुछ रिपोर्ट ऐसी chartered accountancy firms द्वारा हस्ताक्षरित थीं, जिनके पास उस समय वैध Peer Review Certificate नहीं था। ये मामले listing और disclosure requirements से जुड़े थे।

2024 में जारी हुए थे Show-Cause Notices

मामले में SEBI ने फरवरी 2024 में संबंधित कंपनियों को show-cause notices जारी किए थे। इसके बाद कंपनियों की ओर से settlement का प्रस्ताव रखा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, settlement terms पर SEBI की High Powered Advisory Committee ने जून 2026 में सिफारिश की थी। इन संशोधित शर्तों को अगस्त में SEBI के पूर्णकालिक सदस्यों ने स्वीकार किया। इसके बाद कंपनियों ने सितंबर में settlement amount जमा किया और 22 सितंबर को proceedings का निपटारा कर दिया गया।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट से कैसे जुड़ा है मामला?

24 जनवरी 2023 को अमेरिकी शॉर्ट-सेलर Hindenburg Research ने अदाणी समूह पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट के बाद समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई और इस मामले ने भारतीय शेयर बाजार तथा नियामकीय संस्थाओं का ध्यान खींचा। SEBI ने बाद में हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों और उनसे जुड़े संभावित regulatory violations की जांच की। मौजूदा settlement proceedings उसी व्यापक नियामकीय जांच से जुड़े कुछ disclosure और audit-compliance मुद्दों से संबंधित थीं।

अब हिंडनबर्ग रिसर्च का क्या हुआ?

इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिस कंपनी ने 2023 में अदाणी समूह पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, Hindenburg Research अब सक्रिय नहीं है। कंपनी के संस्थापक नाथन एंडरसन ने जनवरी 2025 में रिसर्च फर्म को बंद करने की घोषणा की थी। इसलिए 2026 में SEBI की मौजूदा settlement proceedings में Hindenburg Research स्वयं पक्षकार के तौर पर मौजूद नहीं है।

Leave a comment