आगरा में इस साल 15 फरवरी ने बीते 10 वर्षों का तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2017 से 2026 के बीच दर्ज आंकड़ों की तुलना में इस बार 15 फरवरी को सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। फरवरी के मध्य में ही गर्मी के तेवर देखने से लोगों को मार्च-अप्रैल जैसी तपिश का एहसास हुआ। दोपहर के समय धूप इतनी तेज रही कि सड़कों पर आवाजाही कम हो गई और लोग छांव तलाशते नजर आए।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता में कमी और लगातार साफ आसमान रहने के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। सुबह हल्की ठंडक जरूर महसूस हुई, लेकिन जैसे-जैसे सूरज चढ़ा, पारा तेजी से ऊपर गया। अधिकतम तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जिससे पिछले दशक का रिकॉर्ड टूट गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फरवरी में इतनी तेज गर्मी पहले कम ही महसूस हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को दोपहर में खासा असहज महसूस हुआ। कई जगहों पर लोग ठंडे पेय पदार्थों और आइसक्रीम की दुकानों पर भीड़ लगाते दिखे।
हालांकि राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने अगले दिन हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है। यदि बादल छाए और हल्की बारिश हुई तो तापमान में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्की वर्षा से वातावरण में नमी बढ़ेगी और दिन के तापमान में कुछ कमी आएगी।
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी बढ़ते तापमान पर चिंता जताई है। फरवरी के इस दौर में अचानक गर्मी बढ़ने से फसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि संभावित बूंदाबांदी से गेहूं और सरसों जैसी फसलों को कुछ राहत मिल सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर की तेज धूप से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।
आगरा में मौसम का यह बदलता मिजाज लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर फरवरी की गर्मी ने चौंकाया है, वहीं संभावित बूंदाबांदी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अब सबकी नजरें आसमान पर टिकी हैं कि क्या बारिश सचमुच तापमान में कमी लाएगी या गर्मी का असर आगे भी बना रहेगा।










