अगले कुछ सालों में इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एक्टिविटी AI बॉट्स की होने वाली है। क्लाउडफ्लेयर के CEO मैथ्यू प्रिंस के अनुसार, जनरेटिव AI के तेजी से विकास के कारण बॉट्स ऑनलाइन ट्रैफिक में इंसानों को पीछे छोड़ देंगे। इससे नेटवर्क, डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा, जबकि व्यवसायों को अपनी डिजिटल संरचना को अपडेट करना आवश्यक होगा।
AI Bots On Internet: अगले साल तक इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एक्टिविटी AI बॉट्स की होने वाली है। क्लाउडफ्लेयर के CEO मैथ्यू प्रिंस ने बताया कि जनरेटिव AI के तेजी से फैलाव के कारण एआई एजेंट्स इंसानों वाली ऑनलाइन गतिविधियों को पीछे छोड़ देंगे। इस बदलाव से नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा, डेटा सेंटर और सर्वरों की मांग बढ़ेगी, और व्यवसायों को डिजिटल सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए तैयारी करनी होगी।
पहले बॉट ट्रैफिक की स्थिति
जनरेटिव AI से पहले इंटरनेट पर बॉट ट्रैफिक लगभग 20 प्रतिशत था। इसमें अधिकांश ट्रैफिक सर्च इंजन क्रॉलर जैसे भरोसेमंद सोर्स से आता था। बाकी बॉट्स स्कैम और मलेशियस एक्टिविटी से जुड़े होते थे। लेकिन अगले कुछ सालों में, 2027 तक, यह अनुपात इंसानों वाली एक्टिविटी को पीछे छोड़ सकता है।
AI बॉट्स की बढ़ती संख्या के कारण नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव पड़ेगा। डेटा सेंटर और सर्वरों की क्षमता बढ़ानी होगी ताकि ट्रैफिक की मांग को पूरा किया जा सके। प्रिंस ने कहा कि यह स्थिति कोरोना महामारी के दौरान वीडियो स्ट्रीमिंग में बढ़ोतरी जैसी चुनौती पैदा कर सकती है।

नेटवर्क और उद्योग पर प्रभाव
AI बॉट्स के बढ़ते ट्रैफिक से न केवल नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर जोखिम भी बढ़ सकते हैं। व्यवसायों को अपनी वेबसाइट और सर्वर क्षमता बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके साथ ही डिजिटल मार्केटिंग और डेटा एनालिटिक्स की रणनीतियों में भी बदलाव आवश्यक होगा।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्यवसाय और इंटरनेट सेवा प्रदाता AI बॉट्स के बढ़ते प्रभाव के लिए तैयार रहें। इसमें नेटवर्क अपग्रेड, सुरक्षा उपाय और AI मॉनिटरिंग टूल्स शामिल हैं। इससे न केवल ट्रैफिक प्रबंधन होगा बल्कि साइबर सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकेगा।








