इजरायल के हमले में IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत, ईरान की सैन्य स्थिति प्रभावित

इजरायल और अमेरिका के हमलों में IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत से ईरानी सैन्य नेतृत्व पर दबाव बढ़ा। मिडिल ईस्ट में तनाव और भी बढ़ गया है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता रहा, जब IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी इजरायली हमलों में मारे गए। इस घटना ने ईरानी सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर दबाव बढ़ाया, जबकि अमेरिका और इजरायल दोनों सक्रिय रूप से शामिल हैं।

Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान को एक और बड़ा झटका लगा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी हाल ही में हुए हमलों में मारे गए हैं। उनकी मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' ने शुक्रवार को की। यह हमला ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आया है, जिसमें अमेरिका और इजरायल दोनों सक्रिय रूप से शामिल हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब के खिलाफ हाल के हमलों के बाद यह घटनाक्रम ईरान के लिए और भी संवेदनशील बन गया है। पिछले कुछ हफ्तों में मारे गए वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की सूची में अली मोहम्मद नैनी का नाम भी शामिल हो गया है, जिससे ईरान की सैन्य और खुफिया संरचना पर दबाव बढ़ गया है।

इजरायल के लक्षित हमले और IRGC की स्थिति

गुरुवार को इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने घोषणा की कि उन्होंने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को मार गिराया है। IDF ने बताया कि खतीब ने 2022-2023 में महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरानी नागरिकों के खिलाफ कार्य किया था। इजरायल ने यह भी दावा किया कि खतीब ने दुनिया भर में इजरायल और अमेरिका के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों का नेतृत्व किया।

इसी तरह, IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत ने ईरानी सैन्य नेतृत्व पर और दबाव डाल दिया है। नैनी IRGC के रणनीतिक संचार और प्रचार के प्रमुख थे और उनकी भूमिका सैन्य और राजनीतिक संदेशों के संचालन में अहम मानी जाती थी।

इससे पहले इस सप्ताह की शुरुआत में, मंगलवार को इजरायली हवाई हमलों में ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी भी मारे गए थे। इन हमलों ने ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा ढांचे को चुनौती दी है और मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है।

ईरान का सैन्य ढांचा मजबूत

हालांकि, ईरान का राजनीतिक ढांचा बहुत मजबूत है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक इंटरव्यू में कहा कि देश का राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा स्थिर है और किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी से इसे कोई गंभीर क्षति नहीं पहुंचती। उन्होंने जोर दिया कि ईरान की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थाएं इतनी मजबूत हैं कि नेतृत्व में किसी के नुकसान से देश प्रभावित नहीं होगा।

अराघची ने कहा, "मुझे नहीं पता कि अमेरिकी और इजरायली लोग अब तक यह बात क्यों नहीं समझ पाए हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का ढांचा बहुत मजबूत है। कोई व्यक्ति अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, कोई कम, लेकिन कुल मिलाकर यह प्रणाली अपने आप में टिकाऊ है।"

ईरानी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी प्रत्येक का कार्य महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी एक की कमी से राष्ट्रीय सुरक्षा या राजनीतिक स्थिरता पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

महसा अमीनी विरोध प्रदर्शन

ईरान में 2022-2023 में हुए महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख इस समय विशेष रूप से किया जा रहा है। इन प्रदर्शनों के दौरान ईरानी नागरिकों ने महिलाओं के अधिकार और सामाजिक आजादी की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरानी सुरक्षा बलों और खुफिया अधिकारियों की कार्रवाई ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।

इसी संदर्भ में इजरायल ने दावा किया कि इस्माइल खतीब और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। इसके अलावा, इजरायल और अमेरिका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियों का नेतृत्व करने का आरोप भी उन पर लगाया गया। ऐसे में नैनी और खतीब के मारे जाने से ईरान के भीतर राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है।

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