आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हमारे कामकाज को आसान बना रही है, लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ सुरक्षा की चुनौती भी बड़ी होती जा रही है। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने फाइनेंशियल सेक्टर में AI के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई है।
AI Safety in Financial Sector: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से दुनिया के वित्तीय क्षेत्र का हिस्सा बन रहा है। बैंकिंग, लोन अप्रूवल, जोखिम का आकलन, फ्रॉड की पहचान और ग्राहक सेवाओं जैसे कई कामों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि, इसके बढ़ते प्रभाव के बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण चेतावनी दी है।
नई दिल्ली में आयोजित ASSOCHAM के तीसरे फिनटेक फेस्टिवल में नागेश्वरन ने कहा कि भारत को खासतौर पर वित्तीय क्षेत्र में AI की सुरक्षा और इससे जुड़े जोखिमों को लेकर अधिक सक्रिय और सतर्क रुख अपनाना होगा। उनके मुताबिक, टेक्नोलॉजी से मिलने वाले संभावित लाभों को हासिल करने की कोशिश में उन सुरक्षा उपायों और मानवीय व्यवस्थाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जो पहले से मौजूद हैं।
AI के फायदे के साथ जोखिम भी समझना जरूरी
वी. अनंत नागेश्वरन ने AI को एक ऐसी तकनीक बताया, जिसमें बड़े पैमाने पर बदलाव लाने की क्षमता है। वित्तीय संस्थान AI की मदद से बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं और कम समय में बेहतर निर्णय लेने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि AI के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा और बचाव से जुड़े सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। खासकर वित्तीय क्षेत्र में AI से जुड़े फैसलों का सीधा असर लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। ऐसे में तकनीक के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी को बनाए रखना जरूरी होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को AI सुरक्षा के मामले में केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी करने वाला यानी proactive approach अपनाना चाहिए। यह जरूरत केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी AI से जुड़े सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
लोन देने में AI से बैंकों को मिल सकती है मदद

मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक, AI वित्तीय संस्थानों के लिए कई महत्वपूर्ण काम आसान कर सकता है। उदाहरण के लिए, बैंक और फाइनेंस कंपनियां AI आधारित सिस्टम की मदद से यह आकलन कर सकती हैं कि किसी ग्राहक को कर्ज देने में कितना जोखिम है। AI बड़ी मात्रा में वित्तीय जानकारी और ग्राहक के डेटा का विश्लेषण करके संभावित डिफॉल्ट के जोखिम को पहले पहचानने में मदद कर सकता है। इससे बैंक समय रहते जोखिम को समझ सकते हैं और संभावित वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं।
हालांकि, AI आधारित क्रेडिट सिस्टम के साथ एक महत्वपूर्ण चुनौती भी जुड़ी है। अगर एल्गोरिदम में किसी तरह का पक्षपात या गलत मानदंड शामिल हो जाए, तो इससे कुछ लोगों को कर्ज मिलने में अनुचित नुकसान हो सकता है। इसलिए ऐसे सिस्टम में मानव निगरानी और उचित जांच की जरूरत बनी रहेगी।
AI को नौकरी खत्म करने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए
नागेश्वरन ने AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल केवल लोगों को काम से हटाने या कर्मचारियों की संख्या कम करने के उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI लोगों को सिस्टम से बाहर करने, उनके साथ भेदभाव करने या अनुचित तरीके से फिल्टर करने का माध्यम न बन जाए। AI आधारित निर्णयों में इंसानी भागीदारी और जवाबदेही को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में कंपनियां AI के इस्तेमाल से उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने की कोशिश कर रही हैं। इसी वजह से रोजगार के भविष्य और AI के कारण संभावित नौकरियों में बदलाव को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है।
आने वाले 20 साल होंगे ज्यादा चुनौतीपूर्ण
वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत की आर्थिक यात्रा और भविष्य की चुनौतियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने संकेत दिया कि अगले 20 वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद के शुरुआती तीन दशकों की तुलना में अधिक कठिन हो सकते हैं। उनके अनुसार, बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी बदलाव और नए आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए भारत को अपनी तैयारियां और तेज करनी होंगी। इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र, दोनों को अपनी क्षमता बढ़ाने और तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की जरूरत होगी।
उन्होंने आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए State Capacity, यानी सरकारों की प्रभावी ढंग से काम करने और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत संस्थागत क्षमता जरूरी होगी।












