जागता रहा मरीज, निकल गया ब्रेन ट्यूमर: AIIMS देवघर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास

AIIMS देवघर में पहली बार Awake Craniotomy से ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी हुई। मरीज होश में रहा और डॉक्टरों ने न्यूरोमॉनिटरिंग की मदद से जटिल ऑपरेशन किया।
जागता रहा मरीज, निकल गया ब्रेन ट्यूमर: AIIMS देवघर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास
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झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS देवघर ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के डॉक्टरों ने पहली बार ऐसी जटिल ब्रेन सर्जरी सफलतापूर्वक की, जिसमें मरीज ऑपरेशन के दौरान पूरी तरह होश में रहा। इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में Awake Craniotomy कहा जाता है। इस सर्जरी के दौरान डॉक्टर ब्रेन के उस हिस्से के आसपास काम करते हैं, जहां शरीर की महत्वपूर्ण गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले हिस्से मौजूद हो सकते हैं। मरीज के जागते रहने से डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान उसकी न्यूरोलॉजिकल क्षमताओं की लगातार निगरानी कर पाते हैं। AIIMS देवघर में इस प्रक्रिया के सफल होने को संस्थान की न्यूरोसर्जिकल सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सामान्य तौर पर जब किसी मरीज की ब्रेन सर्जरी की जाती है तो उसे एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में मरीज को सर्जरी के एक महत्वपूर्ण चरण के दौरान जागृत रखा जाता है। Awake Craniotomy में डॉक्टरों का उद्देश्य केवल ट्यूमर को निकालना नहीं होता, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होता है कि ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क के उन महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान न पहुंचे, जो बोलने, समझने, शरीर की गतिविधियों या अन्य जरूरी न्यूरोलॉजिकल कार्यों से जुड़े होते हैं। इसी कारण इस तरह की सर्जरी में मरीज की प्रतिक्रियाएं डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती हैं।

AIIMS देवघर में की गई यह सर्जरी इसलिए भी खास है क्योंकि यह संस्थान में पहली Awake Craniotomy थी। रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों ने ब्रेन ट्यूमर को निकालने के लिए न्यूरोमॉनिटरिंग की मदद ली। इस तकनीक का उद्देश्य सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कार्यों की निगरानी करते हुए ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से हटाना होता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति और न्यूरोलॉजिकल कार्यों पर नजर रखी जाती है, जिससे सर्जिकल टीम को संवेदनशील हिस्सों के आसपास काम करने में अतिरिक्त जानकारी मिलती है।

मरीज का ऑपरेशन के दौरान जागते रहना सुनने में भले ही असामान्य लगे, लेकिन न्यूरोसर्जरी में यह एक विशेष तकनीक है। इसका इस्तेमाल खास तौर पर उन मामलों में किया जा सकता है, जहां ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के ऐसे हिस्से के नजदीक हो जो बोलने, भाषा समझने या शरीर की गतिविधियों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा हो। ऐसे मामलों में डॉक्टरों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि मस्तिष्क के किस हिस्से को छेड़ने पर मरीज की सामान्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। मरीज से बातचीत या उसकी प्रतिक्रियाओं की निगरानी के माध्यम से सर्जिकल टीम को इस बारे में वास्तविक समय में जानकारी मिल सकती है।

इस प्रक्रिया को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि Awake Craniotomy का मतलब यह नहीं है कि मरीज बिना किसी दर्द नियंत्रण के ऑपरेशन सहता है। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया और स्थानीय दर्द नियंत्रण की विशेष व्यवस्था की जाती है। सिर को स्थिर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है और ऑपरेशन के अलग-अलग चरणों में एनेस्थीसिया की रणनीति भी बदली जा सकती है। जब मस्तिष्क के कार्यों की निगरानी आवश्यक होती है, तब मरीज को जागृत अवस्था में लाकर डॉक्टर उससे बातचीत या निर्धारित कार्य कराने के जरिए न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया देखते हैं।

AIIMS देवघर में हुई इस सर्जरी के दौरान भी सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही था कि डॉक्टरों को ब्रेन के महत्वपूर्ण हिस्सों की निगरानी करते हुए ट्यूमर को निकालने का अवसर मिला। इस तरह की प्रक्रिया में न्यूरोसर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सा कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखना और ऑपरेशन के दौरान मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे की सर्जिकल प्रक्रिया को संभालना इस तरह की सर्जरी को सामान्य ब्रेन ऑपरेशन से अलग बनाता है।

AIIMS देवघर में इस उपलब्धि को संस्थान की चिकित्सा सुविधाओं के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी भी नए चिकित्सा संस्थान के लिए जटिल और विशेषज्ञता वाली सर्जरी करने की क्षमता विकसित करना उसकी सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी के लिए अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल होने से देवघर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए उन्नत चिकित्सा सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने की संभावना बढ़ती है। इससे जटिल न्यूरोसर्जरी के लिए मरीजों को दूसरे बड़े शहरों की ओर रेफर करने की जरूरत कुछ मामलों में कम हो सकती है।

AIIMS देवघर की न्यूरोसर्जरी सेवाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी भी संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है। संस्थान देवघर के देवीपुर क्षेत्र में स्थित है और वहां न्यूरोसर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की टीम मौजूद है।

ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती केवल ट्यूमर तक पहुंचना नहीं होती। कई मामलों में ट्यूमर मस्तिष्क के ऐसे क्षेत्र में मौजूद हो सकता है, जिसके आसपास बेहद महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कार्य नियंत्रित होते हैं। यदि सर्जरी के दौरान इन हिस्सों को नुकसान पहुंचे तो मरीज को बोलने, समझने, चलने या शरीर के किसी हिस्से की गतिविधि से संबंधित समस्या हो सकती है। इसलिए कुछ चुनिंदा मामलों में Awake Craniotomy डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क के कार्यों की निगरानी करने में मदद करती है।

इस तकनीक में मरीज की जागृत अवस्था डॉक्टरों के लिए एक तरह की वास्तविक समय की प्रतिक्रिया उपलब्ध कराती है। उदाहरण के तौर पर मरीज से बातचीत कराई जा सकती है या उससे कुछ सामान्य गतिविधियां करने को कहा जा सकता है, ताकि सर्जिकल टीम यह समझ सके कि ऑपरेशन के दौरान किसी महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कार्य पर प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है। इसी कारण इस तरह की सर्जरी में मरीज और मेडिकल टीम के बीच लगातार तालमेल बेहद जरूरी होता है।

AIIMS देवघर में पहली Awake Craniotomy का सफल होना इस बात का संकेत है कि संस्थान में जटिल न्यूरोसर्जिकल प्रक्रियाओं को संभालने की क्षमता विकसित हो रही है। हाल के दिनों में संस्थान में अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा प्रक्रियाएं भी की गई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि AIIMS देवघर अपनी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर रहा है और अलग-अलग विशेषज्ञता वाले विभागों में जटिल उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस उपलब्धि का महत्व केवल एक ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। किसी संस्थान में पहली बार किसी जटिल सर्जिकल तकनीक का सफल इस्तेमाल होने के बाद वहां की मेडिकल टीम को भविष्य में समान प्रकृति के मामलों को संभालने का अनुभव भी मिलता है। हालांकि हर ब्रेन ट्यूमर मरीज के लिए Awake Craniotomy उपयुक्त नहीं होती। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मरीज की बीमारी, ट्यूमर की स्थिति और उसके आसपास मौजूद महत्वपूर्ण मस्तिष्क क्षेत्रों सहित कई चिकित्सकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसलिए किसी भी मरीज के लिए ऐसी सर्जरी का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर ही करते हैं।

AIIMS देवघर के डॉक्टरों की यह उपलब्धि झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य के बाहर या बड़े महानगरों के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। ऐसे में देवघर में जटिल न्यूरोसर्जरी जैसी सुविधा का विकसित होना आसपास के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी में समय पर विशेषज्ञ सलाह और उपचार बेहद अहम होता है।

इस सर्जरी की सबसे अलग बात मरीज का ऑपरेशन के दौरान जागृत रहना रही। बाहर से देखने पर यह प्रक्रिया असामान्य लग सकती है, लेकिन आधुनिक न्यूरोसर्जरी में यह एक स्थापित तकनीक है, जिसका इस्तेमाल खास परिस्थितियों में किया जाता है। डॉक्टरों का लक्ष्य मरीज को जागृत रखकर असहज करना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करते हुए सुरक्षित तरीके से सर्जरी करना होता है।

AIIMS देवघर में पहली Awake Craniotomy के सफल होने से संस्थान की न्यूरोसर्जिकल सेवाओं में एक नया अध्याय जुड़ा है। ब्रेन ट्यूमर के जटिल ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ टीम और लगातार न्यूरोलॉजिकल मॉनिटरिंग के इस्तेमाल ने इस प्रक्रिया को संभव बनाया। मरीज के होश में रहते हुए ट्यूमर को निकालने की यह प्रक्रिया मेडिकल टीम के लिए भी चुनौतीपूर्ण रही होगी, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान सर्जरी और मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति दोनों पर एक साथ नजर रखनी होती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह प्रक्रिया सफल रही और AIIMS देवघर ने इसे अपनी न्यूरोसर्जरी सेवाओं की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज किया है।

इस उपलब्धि के बाद AIIMS देवघर में न्यूरोसर्जरी से जुड़े गंभीर मामलों के उपचार को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की सफलता को मरीज-विशेष की स्थिति और चिकित्सकीय मूल्यांकन के संदर्भ में ही समझना चाहिए। Awake Craniotomy एक विशेषज्ञ प्रक्रिया है और इसे हर ब्रेन ट्यूमर के मामले में नहीं किया जाता। लेकिन AIIMS देवघर में पहली बार इस तकनीक का सफल इस्तेमाल यह जरूर दिखाता है कि संस्थान में जटिल न्यूरोसर्जिकल उपचार की दिशा में नई क्षमताएं विकसित हो रही हैं।

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