Child Abuse Case: NCPCR ने Meta India पर कसा शिकंजा, MD और हेड को भेजा समन

Child Abuse Case: NCPCR ने Meta India के MD और हेड को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित कंटेंट मामले में फिर समन किया है। मामले की जांच जारी है

बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मटीरियल (CSEAM) वाले विज्ञापनों के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और हेड को एक बार फिर समन भेजा है।

नई दिल्ली: भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर निगरानी बढ़ती जा रही है। बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री (CSEAM) वाले विज्ञापनों के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और संबंधित प्रमुख अधिकारी को दोबारा समन जारी किया है। आयोग ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने के बाद यह कदम उठाया है। इस मामले में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत सरकार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कंपनियों से अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। सरकार का रुख है कि भारत में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए।

जुलाई में Meta को भेजा गया था नोटिस

मामले की शुरुआत NCPCR की ओर से 3 जुलाई 2026 को Meta को भेजे गए नोटिस से हुई। आयोग ने CSEAM से संबंधित विज्ञापनों को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। Meta ने लगभग एक सप्ताह बाद आयोग के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत किया। कंपनी से प्राप्त जवाब और उपलब्ध जानकारी की समीक्षा के बाद NCPCR ने मामले के तथ्यों की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया। 

आयोग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित सामग्री किस परिस्थितियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई दी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों तथा प्रक्रियाओं का पालन किस तरह किया गया।

16 सितंबर को होगी सुनवाई

औपचारिक जांच के तहत NCPCR ने Meta India के MD और संबंधित हेड को फिर से समन भेजकर सुनवाई में उपस्थित होने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान आयोग कंपनी से मामले से जुड़े तथ्यों, प्लेटफॉर्म की नीतियों और अब तक उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांग सकता है। इससे पहले 9 सितंबर को Meta India के प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश हुए थे। अब दोबारा समन जारी किए जाने से संकेत मिलता है कि आयोग मामले में उपलब्ध जानकारी और कंपनी के जवाब की आगे समीक्षा करना चाहता है।

CSEAM की रिपोर्टिंग नीति में Meta ने किया बदलाव

NCPCR की कार्रवाई के बीच Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की रिपोर्टिंग और उससे निपटने की अपनी प्रक्रिया में बदलाव किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों की रिपोर्ट भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को किए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। CSEAM यानी Child Sexual Exploitation and Abuse Material बच्चों के यौन शोषण या दुर्व्यवहार से संबंधित ऐसी सामग्री को कहा जाता है, जिसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित या साझा किया जा सकता है। इस तरह की सामग्री से निपटना दुनियाभर में ऑनलाइन सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

बेंगलुरु के डे-केयर मामले में भी कार्रवाई

NCPCR की कार्रवाई केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े मामले तक सीमित नहीं है। बेंगलुरु में Capgemini द्वारा संचालित एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के कथित शोषण से जुड़े अलग मामले में भी आयोग ने कदम उठाया है। इस मामले में आयोग ने Capgemini के एक वाइस प्रेसिडेंट (VP) को समन जारी किया है।

आयोग इस मामले में कथित घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किन स्तरों पर थी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

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