पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी बुशरा बानो का खड़गपुर ASP पद से तबादला कर स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन का डिप्टी कमांडेंट बनाया गया है। यह फैसला उनके UPSC वीडियो पर विवाद के कुछ दिन बाद हुआ, हालांकि सरकार ने सीधा कारण नहीं बताया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो का खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) पद से तबादला किए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय हुआ, जब 13 सितंबर को UPSC अभ्यर्थियों के लिए पोस्ट किए गए उनके एक वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से तबादले को सीधे वीडियो या उसमें इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
खड़गपुर ASP से स्टेट आर्म्ड पुलिस में तबादला
पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को अब स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन का डिप्टी कमांडेंट नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर पार्थ घोष को खड़गपुर का नया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। यह बदलाव पश्चिम बंगाल पुलिस के एक छोटे प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बताया गया है।
तबादले की अधिसूचना पुलिस सेवा सेल के जरिए गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग ने जारी की। इसी प्रशासनिक फेरबदल में पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा के दो अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गईं।
13 सितंबर के वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद
बुशरा बानो ने 13 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को प्रोत्साहित किया और अपनी तैयारी के अनुभव के बारे में बात की।
वीडियो में उन्होंने 'अस्सलामुअलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जजाकल्लाह' जैसे अरबी-उर्दू धार्मिक अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल किया था। वीडियो में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी से अपनी तैयारी के दौरान मिली मदद का भी उल्लेख किया था।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट्स ने सवाल उठाए। आलोचना का एक प्रमुख बिंदु यह था कि एक सरकारी अधिकारी के सार्वजनिक संदेश में धार्मिक अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल क्यों किया गया और उसमें 'जय हिंद' या 'वंदे मातरम' जैसे राष्ट्रीय अभिवादन क्यों नहीं थे।
'हिंदू लीगल फंड' ने शिकायत का दावा किया
'हिंदू लीगल फंड' नाम के एक X अकाउंट ने बुशरा बानो का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि उसने इस मामले में पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के समक्ष शिकायत की है।
संगठन ने वीडियो में इस्तेमाल किए गए 'अस्सलामुअलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जजाकल्लाह' शब्दों पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक संचार में निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि वीडियो में 'वंदे मातरम' या 'जय हिंद' का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
हालांकि, शिकायत के दावे और बाद में हुए तबादले के बीच सीधा कारण-सम्बंध स्थापित करने वाला कोई स्पष्ट सरकारी आदेश या आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। एक सरकारी अधिकारी ने तबादले को नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बताया है।
वीडियो अब सोशल मीडिया से हटाया गया
विवाद बढ़ने के बाद बुशरा बानो का यह वीडियो उनके सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में उनका मुख्य संदेश UPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को शिक्षा और कोचिंग के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना था।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी अधिकारियों के व्यक्तिगत या धार्मिक अभिव्यक्ति और उनके आधिकारिक सार्वजनिक संचार के बीच सीमा को लेकर बहस को जन्म दिया है।
अजहरुद्दीन ने तबादले पर उठाए सवाल
तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने बुशरा बानो के तबादले पर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर 'अस्सलाम वालेकुम' और 'इंशाअल्लाह' जैसे अभिवादन किसी लोक सेवक के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनते हैं, तो इससे अल्पसंख्यकों को दिए जाने वाले संदेश पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अजहरुद्दीन ने भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की ताकत उसकी विविधता में है। उनके बयान को इस मामले पर विपक्षी और सामाजिक प्रतिक्रिया के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
महुआ मोइत्रा और इमरान प्रतापगढ़ी ने भी प्रतिक्रिया दी
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बुशरा बानो के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक अभिवादन का इस्तेमाल करने को लेकर एक महिला IPS अधिकारी को निशाना बनाया गया।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर महिला अधिकारी की ट्रोलिंग हुई और उसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। हालांकि, ये दोनों नेताओं के राजनीतिक बयान हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों को स्वीकार किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सरकार ने क्या कहा?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि बुशरा बानो का तबादला 'अस्सलामुअलैकुम', 'इंशाअल्लाह' या 'जजाकल्लाह' कहने के कारण किया गया।
इसके विपरीत, एक सरकारी अधिकारी ने इसे प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बताया। इसलिए तबादले को सीधे धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल की सजा के रूप में पेश करना अभी स्थापित सरकारी तथ्य नहीं है।
कौन हैं बुशरा बानो?
बुशरा बानो 2021 बैच की IPS अधिकारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनका संबंध उत्तर प्रदेश के कन्नौज से है और उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने मैनेजमेंट में PhD की और NET-JRF भी क्वालिफाई किया।
IPS बनने से पहले वह सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुकी थीं। इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर सिविल सेवा की तैयारी की। रिपोर्टों में उनके UPSC परीक्षा को दो बार पास करने का भी उल्लेख है।
उनकी UPSC यात्रा ही 13 सितंबर के वीडियो का मुख्य विषय थी। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के साथ अपना अनुभव साझा किया और AMU की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी की भूमिका का उल्लेख किया था।
विवाद ने सरकारी संचार पर बहस छेड़ी
बुशरा बानो के तबादले ने सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल, धार्मिक अभिव्यक्ति और आधिकारिक संचार में निष्पक्षता को लेकर बहस को सामने ला दिया है।
एक तरफ आलोचकों का कहना है कि वर्दी में मौजूद अधिकारी को सार्वजनिक संदेशों में संस्थागत और राष्ट्रीय भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए। दूसरी ओर, उनके समर्थकों और कुछ विपक्षी नेताओं का तर्क है कि किसी अधिकारी के अभिवादन में इस्तेमाल धार्मिक शब्दों को प्रशासनिक कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर बुशरा बानो का तबादला एक प्रशासनिक आदेश है। वीडियो विवाद और तबादले के बीच समय का संबंध स्पष्ट है, लेकिन सरकार ने दोनों के बीच प्रत्यक्ष कारण संबंध की पुष्टि नहीं की है।











