कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब राजस्थान से आए छह श्रद्धालु अचानक बढ़े पानी के कारण खड्ड के बीच फंस गए। श्रद्धालु खड्ड में नहाने के लिए उतरे थे। इसी दौरान ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण पानी का स्तर अचानक बढ़ गया और सभी छह लोग पानी के बीच एक सूखे हिस्से पर फंस गए। खतरा बढ़ता देख श्रद्धालुओं ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद प्रशासन और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जानकारी के अनुसार घटना कांगड़ा के बंगंगा घाट के पास की है। राजस्थान से आए श्रद्धालु वहां पहुंचे थे और खड्ड में पानी देखकर नहाने के लिए उतर गए। इस दौरान उन्हें पानी के अचानक बढ़ने का अंदाजा नहीं था। बताया गया कि ऊपरी इलाकों में बारिश होने के कारण खड्ड में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते पानी का स्तर बढ़ने लगा और श्रद्धालुओं के लिए वापस किनारे तक पहुंचना मुश्किल हो गया। छह लोग पानी के बीच एक अपेक्षाकृत सुरक्षित सूखे हिस्से पर रुक गए और वहीं से मदद की गुहार लगाने लगे।
श्रद्धालुओं के खड्ड में फंसने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ। कांगड़ा तहसीलदार प्रकाश चंद ठाकुर और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। पानी के बहाव और स्थिति को देखते हुए टीम ने सावधानी के साथ श्रद्धालुओं तक पहुंच बनाई और उन्हें एक-एक कर सुरक्षित स्थान की ओर निकाला। करीब आधे घंटे की कोशिश के बाद सभी छह श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
यह घटना एक बार फिर हिमाचल के नदी-नालों और खड्डों में अचानक बढ़ने वाले जलस्तर के खतरे को सामने लाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। ऊपरी हिस्सों में बारिश होने के बाद कई बार नीचे बहने वाली खड्डों में बिना किसी स्थानीय बारिश के भी अचानक पानी बढ़ सकता है। ऐसे में किसी खड्ड या नदी के शांत दिखाई देने पर उसके पानी में उतरना जोखिम भरा हो सकता है। इस मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली, जब श्रद्धालु पानी में नहाने उतरे और कुछ ही देर में जलस्तर बढ़ने से उनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को क्षेत्र में पानी के खतरे को लेकर चेतावनी दी गई थी, इसके बावजूद वे नहाने के लिए खड्ड में चले गए। हालांकि आधिकारिक बचाव विवरण में घटना के दौरान जलस्तर बढ़ने की वजह ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश बताई गई है। पानी बढ़ने के बाद श्रद्धालुओं को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ और उन्होंने सहायता के लिए आवाज लगाई। समय रहते सूचना मिलने से बचाव दल मौके पर पहुंच सका और बड़ी घटना टल गई।
हिमाचल प्रदेश में इस समय बारिश और नदी-नालों के जलस्तर को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत बनी हुई है। मौसम विभाग की हालिया जानकारी के मुताबिक हिमाचल समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। ऐसे मौसम में पहाड़ी नदियों और खड्डों में जलस्तर तेजी से बदल सकता है।
खड्ड में फंसे छह श्रद्धालुओं के लिए सबसे मुश्किल समय वह रहा होगा जब पानी उनके चारों तरफ बढ़ने लगा और वापस किनारे तक पहुंचने का रास्ता मुश्किल दिखाई देने लगा। ऐसे हालात में घबराहट की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है। श्रद्धालुओं ने सूखे हिस्से पर रुककर मदद का इंतजार किया और सूचना मिलने के बाद बचाव दल ने उन्हें वहां से निकालने की कार्रवाई की। करीब 30 मिनट तक चले रेस्क्यू के बाद सभी की जान बचा ली गई।
स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई के कारण यह घटना किसी बड़े हादसे में नहीं बदली। यदि पानी का स्तर लगातार बढ़ता रहता या श्रद्धालु बहाव वाले हिस्से में फंस जाते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इस तरह की घटनाओं में कुछ ही मिनटों में परिस्थितियां बदल सकती हैं, खासकर जब पानी ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से अचानक नीचे की ओर आता है।
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में घूमने और धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी रहती है। कई स्थानों पर नदी, खड्ड और झरने पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होते हैं। गर्मी या बारिश के बीच लोग पानी के पास समय बिताते हैं और कई बार नहाने के लिए भी उतर जाते हैं। लेकिन पहाड़ी नदियों और खड्डों की प्रकृति मैदानी इलाकों की नदियों से अलग होती है। यहां जलस्तर ऊपर की ओर हुई बारिश से भी अचानक बढ़ सकता है। इसलिए किनारे पर पानी कम दिखने के बावजूद कुछ दूरी पर बहाव तेज हो सकता है।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि खड्ड या नदी के आसपास मौजूद चेतावनियों को नजरअंदाज करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बारिश के दौरान प्रशासन और स्थानीय लोग बार-बार लोगों से नदी-नालों से दूरी बनाए रखने की अपील करते हैं। इसका कारण केवल मौके पर हो रही बारिश नहीं बल्कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली बारिश भी है। पानी का बहाव अचानक बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित दूरी पर मौजूद व्यक्ति भी मुश्किल में पड़ सकता है।
घटना के बाद राहत की बात यह रही कि सभी छह श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाव अभियान में दमकल विभाग की टीम के साथ तहसील प्रशासन की मौजूदगी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और बचाव कार्य को आगे बढ़ाया। करीब आधे घंटे में रेस्क्यू पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया गया।
राजस्थान से हिमाचल घूमने या धार्मिक यात्रा पर आए इन श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा एक समय अचानक जान बचाने की कोशिश में बदल गई। खड्ड में नहाने के दौरान पानी बढ़ने की घटना ने उन्हें खतरे में डाल दिया। हालांकि राहत और बचाव टीम की तत्परता से सभी सुरक्षित निकल आए। इस घटना के बाद नदी और खड्ड के आसपास जाने वाले लोगों के लिए सावधानी बरतना और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है।
मौसम में बदलाव के बीच ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है। हिमाचल में पहाड़ी इलाकों के जलस्रोतों में पानी का स्तर स्थानीय मौसम के साथ-साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली बारिश से भी प्रभावित होता है। इसलिए किसी नदी या खड्ड में पानी कम दिखाई देने पर भी वहां उतरना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से जब प्रशासन या स्थानीय लोग पानी में नहीं उतरने की चेतावनी दे रहे हों, तब उस चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है।
फिलहाल कांगड़ा में हुई इस घटना में छह श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचा लिया गया है और किसी जनहानि की सूचना नहीं है। लेकिन यह घटना पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक अहम चेतावनी जरूर है कि पहाड़ी नदियों, खड्डों और बरसाती जलधाराओं के साथ किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। अचानक बढ़ता पानी कुछ ही मिनटों में सामान्य स्थिति को खतरनाक बना सकता है। कांगड़ा में भी छह श्रद्धालुओं के साथ यही हुआ, लेकिन समय पर सूचना और दमकल विभाग की कार्रवाई के कारण सभी सुरक्षित बाहर आ सके।












