एयर इंडिया की 4 अगस्त की फुकेत-दिल्ली उड़ान में एक पायलट के कथित तौर पर नशे में पाए जाने की घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इस मामले के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए अपनी मौजूदा डोप टेस्ट नीति में बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं।
Air India Phuket-Delhi Flight: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़े पायलट डोप टेस्ट मामले के बाद भारत में विमानन सुरक्षा नियमों को और कड़ा करने की तैयारी शुरू हो गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) पायलटों के ड्रग टेस्ट से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्तावित बदलाव के तहत हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है।
यह मामला 4 अगस्त को संचालित फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट से जुड़ा है। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव और यात्रियों के घायल होने की घटना के बाद जांच शुरू की गई थी। इसी दौरान एक वरिष्ठ पायलट के कथित तौर पर डोप टेस्ट में असफल होने की जानकारी सामने आई।
हर पायलट का सालाना डोप टेस्ट कराने की तैयारी
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में हर साल एयरलाइन पायलटों के एक निश्चित हिस्से का रैंडम डोप टेस्ट किया जाता है। सरकार अब इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में हर पायलट का साल में 100 प्रतिशत टेस्ट सुनिश्चित करने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पायलट लंबे समय तक अनिवार्य जांच के दायरे से बाहर न रहे।
मंत्री के अनुसार, इस मुद्दे पर एयरलाइंस और विमानन क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के साथ चर्चा की जा रही है। अंतिम नीति तय होने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी।
मौजूदा डोप टेस्ट सिस्टम में क्या है?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, एयरलाइंस को अपने पायलटों के बीच हर वर्ष निर्धारित अनुपात में रैंडम डोप टेस्ट कराने होते हैं। इस व्यवस्था में सभी पायलटों का हर साल परीक्षण जरूरी नहीं होता। यही वजह है कि विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच इस प्रणाली की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यदि किसी पायलट का चयन लगातार रैंडम सैंपल में नहीं होता, तो वह लंबे समय तक जांच से बाहर रह सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर प्रत्येक पायलट के साल में कम से कम एक बार परीक्षण की संभावना होगी। इसके अलावा अतिरिक्त रैंडम टेस्ट की व्यवस्था भी जारी रह सकती है।

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में क्या हुआ था?
4 अगस्त की एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़ी घटना की जांच Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव हुआ, जिसके चलते कुछ यात्रियों और केबिन क्रू को चोटें आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान पहले करीब 400 फीट ऊपर उठा और इसके बाद लगभग 676 फीट नीचे आया। इस घटना में 20 यात्रियों और चार एयरहोस्टेस के घायल होने की बात सामने आई है।
हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। केवल डोप टेस्ट के नतीजे को विमान की ऊंचाई में बदलाव का कारण मानना उचित नहीं होगा। जांच एजेंसी उड़ान के तकनीकी, संचालन संबंधी और मानवीय पहलुओं की भी पड़ताल करेगी।
एक सप्ताह में आ सकती है शुरुआती रिपोर्ट
विमानन मंत्री ने संकेत दिया है कि फुकेत-दिल्ली उड़ान मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट करीब एक सप्ताह में सामने आ सकती है। यह रिपोर्ट घटना के शुरुआती कारणों और जांच में सामने आए तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद कर सकती है। अंतिम निष्कर्ष के लिए विस्तृत जांच पूरी होना जरूरी होगा। विमानन दुर्घटना या गंभीर घटना की जांच में तकनीकी डेटा, कॉकपिट रिकॉर्ड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल इनपुट और चालक दल से जुड़ी जानकारी जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
एयर इंडिया ने अपने पायलटों के डोप टेस्ट को लेकर कदम उठाए हैं। सवाल यह है कि क्या इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा एयर और अन्य भारतीय एयरलाइंस भी अपने सभी पायलटों के व्यापक परीक्षण की व्यवस्था करेंगी। सरकार की प्रस्तावित नीति यदि लागू होती है, तो यह व्यवस्था केवल किसी एक एयरलाइन तक सीमित नहीं रहेगी। इससे पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की मेडिकल और ड्रग-स्क्रीनिंग व्यवस्था अधिक व्यापक हो सकती है।










