ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भी BJP मायूस, BMC में 110 का लक्ष्य रहा अधूरा

ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भी BJP मायूस, BMC में 110 का लक्ष्य रहा अधूरा

BMC चुनाव में BJP ने 89 सीटें जीतकर बड़ी सफलता दर्ज की, लेकिन तय लक्ष्य से पीछे रह गई। 110 सीटों का आंकड़ा न छू पाने से पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट दिखा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रणनीतिक चूक और करीबी हार को कारण बताया।

Maharashtra: देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 89 सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। साल 2002 के बाद यह पहला मौका है जब किसी एक पार्टी को BMC में इतनी ज्यादा सीटें मिली हैं। इसके बावजूद पार्टी के भीतर जश्न का माहौल नहीं है। बीजेपी नेतृत्व इस जीत से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रहा है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

ऐतिहासिक जीत फिर भी मायूसी

BMC चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन आंकड़ों के लिहाज से मजबूत रहा है। 227 सदस्यीय नगर निगम में 89 सीटें जीतना अपने आप में बड़ी बात है। लेकिन पार्टी की रणनीति इससे कहीं आगे की थी। बीजेपी ने चुनाव से पहले 110 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया था। यही वजह है कि 100 का आंकड़ा पार न कर पाने को पार्टी अपनी रणनीतिक विफलता मान रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह जीत उम्मीदों से कम है और इसी कारण आंतरिक असंतोष सामने आया है।

110 सीटों का टारगेट क्यों अहम था

दरअसल, BMC चुनाव को बीजेपी ने प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में लिया था। महाराष्ट्र में लगातार मजबूत होती स्थिति के बाद पार्टी को भरोसा था कि वह 110 सीटों के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगी। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन से पहले बीजेपी 155 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थी। उस वक्त पार्टी का आकलन था कि वह 120 से 125 सीटें जीत सकती है। गठबंधन के बाद बीजेपी को 137 सीटें मिलीं और उम्मीद थी कि इनमें से कम से कम 110 सीटों पर जीत दर्ज होगी। लेकिन नतीजे इससे पीछे रह गए।

कहां चूक गई बीजेपी

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी नेताओं ने खुद अपनी कमियों को स्वीकार किया है। पार्टी के अंदर यह माना जा रहा है कि नेताओं के बीच तालमेल की कमी चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ी। कई वार्डों में संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच सामंजस्य नहीं दिखा। इसके अलावा उम्मीदवार चयन में भी गलतियां हुईं। कुछ जगहों पर ऐसे उम्मीदवार उतारे गए जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ नहीं रखते थे, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।

मराठी अस्मिता का असर

चुनाव में ठाकरे बंधुओं की रणनीति भी बीजेपी के लिए चुनौती बन गई। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मराठी अस्मिता (Marathi identity) और मराठी गौरव का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने मुंबई की पहचान और मराठी मान-सम्मान को बचाने की अपील की। पार्टी सूत्रों का मानना है कि इस भावनात्मक अपील ने खासतौर पर मुंबई के कई इलाकों में वोटरों को प्रभावित किया। बीजेपी इस narrative का प्रभावी जवाब देने में नाकाम रही, जिससे उसका वोट शेयर प्रभावित हुआ।

फडणवीस की नाराजगी की वजह

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर असंतोष जताया है। उनका मानना है कि अगर कुछ रणनीतिक गलतियां न होतीं तो नतीजे और बेहतर हो सकते थे। फडणवीस ने यह भी कहा कि रविवार को शिवाजी पार्क में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की संयुक्त रैली का मतदान पर सीधा असर पड़ा। इस रैली ने मुंबई और मराठी पहचान को लेकर लोगों को एकजुट किया, जिससे बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा।

करीबी हार ने बढ़ाया मलाल

देवेंद्र फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी कई सीटों पर बेहद कम अंतर से हारी है। उनके अनुसार, पार्टी 14 सीटों पर सिर्फ 7 से 100 वोटों के अंतर से हार गई। अगर ये सीटें जीत ली जातीं तो बीजेपी का आंकड़ा आसानी से 100 के पार पहुंच जाता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले तीन चुनावों में शिवसेना भी कभी इस स्तर तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बावजूद बीजेपी नेतृत्व को लगता है कि यह मौका पूरी तरह भुनाया नहीं जा सका।

महायुति का कुल प्रदर्शन

फडणवीस ने महायुति गठबंधन के प्रदर्शन को संतोषजनक बताया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने कुल 119 सीटें जीती हैं, जो अपने आप में मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, बीजेपी की नजर अकेले दम पर और बड़ी जीत पर थी। यही कारण है कि गठबंधन की जीत के बावजूद पार्टी अपने आंतरिक लक्ष्य से पीछे रह जाने को गंभीरता से ले रही है।

राज्यभर के नतीजों का असर

15 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में मतदान हुआ था। इन चुनावों में बीजेपी ने कुल 49 प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल की है। यह आंकड़ा राज्य स्तर पर पार्टी की मजबूत पकड़ को दिखाता है। लेकिन मुंबई जैसे बड़े और रणनीतिक शहर में बीजेपी के हिस्से में सिर्फ 64 प्रतिशत सीटें आना पार्टी को खटक रहा है। नेतृत्व का मानना है कि मुंबई में प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था।

Leave a comment